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शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
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49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर: भारत की कहानी जानकर हैरान रह जाएंगे

विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 2011 से 2023 के बीच दुनिया की सबसे तेज गरीबी गिरावट में से एक दर्ज की है। लेकिन आय की खाई अब भी बड़ी चुनौती है।

विश्व बैंक भारत गरीबी रिपोर्ट 2026 गरीबी में गिरावट

विश्व बैंक भारत गरीबी रिपोर्ट में भारत की गरीबी में बड़ी गिरावट की कहानी सामने आई है, जिसे जानकर हैरान रह जाएंगे और जो आने वाले वर्षों की चुनौतियों को भी साफ दिखाती है।

एक नजर में: 5 बड़े आंकड़े

  • अत्यधिक गरीबी 27.1% (2011) से घटकर 2.6% (2023) रह गई।
  • 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाली गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों का हिस्सा 57.7% से घटकर 16.1% हुआ — करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले।
  • 2017 से 2023 के बीच रोजगार में करीब 13.4 करोड़ लोगों की बढ़ोतरी हुई, जो कामकाजी आयु वाली आबादी की वृद्धि से लगभग दोगुनी है।
  • ग्रामीण गरीबी 19.3% है, जबकि शहरी गरीबी 8.6% — यानी गांवों में चुनौती अब भी दोगुनी से ज्यादा है।
  • सबसे ज्यादा कमाने वाले 10% श्रमिकों की औसत कमाई सबसे कम कमाने वाले 10% से करीब 13 गुना है।
विश्व बैंक भारत गरीबी रिपोर्ट 2026 गरीबी में गिरावट
विश्व बैंक भारत गरीबी रिपोर्ट, गरीबी में गिरावट, भारतीय अर्थव्यवस्था (प्रतीकात्मक फोटो)

विश्व बैंक भारत गरीबी रिपोर्ट की अक्टूबर 2026 की ‘Poverty and Equity Brief‘ में भारत की कहानी एक साथ उम्मीद और चेतावनी दोनों देती है। एक तरफ, 2011 से 2023 के बीच देश ने दुनिया की सबसे तेज गरीबी गिरावट में से एक दर्ज की है। दूसरी तरफ, आय की खाई और नौकरियों की गुणवत्ता अब भी बड़े सवाल बने हुए हैं।

विश्व बैंक भारत गरीबी रिपोर्ट: गरीबी घटी कैसे

रिपोर्ट के अनुसार, इस गिरावट के पीछे तीन बड़ी वजहें हैं। पहली, घरेलू उपभोग में मजबूत वृद्धि — लोगों की खरीदारी और जीवन-स्तर बढ़ा। दूसरी, रोजगार में विस्तार, खासकर महिलाओं के रोजगार में बढ़ोतरी, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों की भागीदारी अहम रही। तीसरी, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार, जिसमें खाद्य सब्सिडी जैसे हस्तांतरण शामिल हैं।
गरीबी सिर्फ आय से नहीं मापी जाती। बहुआयामी गरीबी — यानी स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन-स्तर में वंचना — भी घटी है। ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव के माप के अनुसार यह 2005-06 के 53.8% से घटकर 2019-21 में 16.4% रह गई, जबकि विश्व बैंक का अपना बहुआयामी माप 2022-23 में 15.5% रहा।

विश्व बैंक भारत गरीबी रिपोर्ट: कहां अब भी चुनौती है

रिपोर्ट की दूसरी तस्वीर कम चमकदार है। ग्रामीण इलाकों में गरीबी (19.3%) शहरी इलाकों (8.6%) से दोगुनी से ज्यादा है। देश के गरीबों का करीब 57% हिस्सा उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैली पट्टी में केंद्रित है।
सबसे बड़ी चेतावनी आय की असमानता को लेकर है। सबसे ज्यादा कमाने वाले 10% और सबसे कम कमाने वाले 10% के बीच औसत कमाई का अंतर करीब 13 गुना है। विश्व बैंक का गिनी सूचकांक 2023 में 23.0 दर्ज हुआ, लेकिन बैंक ने खुद चेतावनी दी है कि घरेलू सर्वेक्षण अमीर परिवारों के उपभोग को पूरी तरह नहीं पकड़ पाते, इसलिए असमानता का आंकड़ा कम आंका जा सकता है।
एक और चिंता यह है कि रोजगार बढ़ा है, लेकिन वास्तविक मजदूरी लगभग ठहरी हुई है। नई नौकरियों का बड़ा हिस्सा कम उत्पादकता वाले क्षेत्रों में है, जिससे लोगों की खर्च करने की क्षमता सीमित रहती है।

आगे का अनुमान क्या कहता है

विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार, 4.20 डॉलर वाली गरीबी दर 2026 में 14.2% और 2028 तक 12.1% तक आ सकती है। लेकिन बैंक ने साफ किया है कि ये माइक्रोसिमुलेशन पर आधारित सांकेतिक अनुमान हैं, जो नए श्रम बाजार और आर्थिक आंकड़े आने पर बदल सकते हैं।
रिपोर्ट यह भी याद दिलाती है कि ऊंची गरीबी रेखा से देखने पर तस्वीर अलग है — 2023 में करीब 80% आबादी 8.30 डॉलर प्रतिदिन वाली उच्च-मध्यम आय वाली गरीबी रेखा से नीचे थी। यानी अत्यधिक गरीबी से बाहर निकलना एक बड़ी जीत है, लेकिन मध्यम वर्ग तक का सफर अब भी लंबा है।
भारत की यह कहानी इसलिए भी अहम है, क्योंकि यह बताती है कि गरीबी घटाना संभव है — लेकिन उसे टिकाऊ बनाना, गांवों तक पहुंचाना और मजदूरी बढ़ाना ही अगली बड़ी परीक्षा होगी। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निर्यात और रोजगार दोनों की मजबूती इसी दिशा में अहम होगी।

लेखक

Rakesh Kumar

नमस्कार, मैं राकेश कुमार हूँ। PAHALI KHABAR के माध्यम से मैं आपके लिए ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, खेल और अन्य महत्वपूर्ण खबरें लेकर आता हूँ। मेरा उद्देश्य है कि आपको हर खबर सरल भाषा में, सही तथ्यों के साथ और समय पर मिले।

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