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आलू में दिखे हरा रंग या अंकुर तो तुरंत कर दें किचन से बाहर? जानिए सेहत पर क्या पड़ सकता है असर

अंकुरित या हरा आलू देखकर उसे नजरअंदाज न करें। जानिए अंकुरित आलू खाने से क्या हो सकता है और इसे इस्तेमाल करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

अंकुरित आलू खाना चाहिए या नहीं

अंकुरित और हरे आलू को खाने से पहले इन बातों का ध्यान रखें।

आलू लगभग हर घर की रसोई में इस्तेमाल होता है। सब्जी हो, पराठे हों या कोई स्नैक, आलू कई तरह से हमारी थाली का हिस्सा रहता है। लेकिन अगर रखे हुए आलू में अंकुर निकल आएं या उसका रंग हरा पड़ जाए तो क्या उसे खाना चाहिए?

हाल ही में हमारे पास भी ऐसे सवाल आए कि अंकुरित आलू खाना चाहिए या नहीं और इसे खाने से क्या नुकसान हो सकता है। इसी सवाल का जवाब जानने के लिए आलू में मौजूद प्राकृतिक compounds और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी जानकारी को समझना जरूरी है।

अंकुरित आलू खाना चाहिए या नहीं?

अगर आलू में छोटे-छोटे अंकुर निकल आए हैं तो उसे देखकर तुरंत यह कहना सही नहीं है कि पूरा आलू जहरीला हो गया है। लेकिन अंकुर निकलने और आलू के हरे होने पर उसमें मौजूद glycoalkaloids की मात्रा बढ़ सकती है। इनमें मुख्य रूप से alpha-solanine और alpha-chaconine शामिल हैं।

अगर आलू बहुत ज्यादा अंकुरित हो गया है, काफी हरा पड़ गया है, सड़ रहा है या उसका स्वाद कड़वा और जलन वाला है तो उसे खाना नहीं चाहिए। ऐसे आलू को फेंक देना बेहतर विकल्प है।

रसोई में इस्तेमाल होने वाली चीजों और सेहत से जुड़ी ऐसी ही जानकारी के लिए पहली खबर के हेल्थ सेक्शन पर भी पढ़ सकते हैं।

अंकुरित आलू खाने से क्या होता है?

आलू में प्राकृतिक रूप से glycoalkaloids पाए जाते हैं। सामान्य मात्रा में इनकी मौजूदगी चिंता की बात नहीं होती, लेकिन आलू के हरे होने, अंकुर निकलने या खराब तरीके से स्टोर होने पर इनकी मात्रा बढ़ सकती है।

इन compounds की ज्यादा मात्रा शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है। इससे मतली, उल्टी, पेट दर्द, पेट में ऐंठन और दस्त जैसी परेशानियां हो सकती हैं। कुछ मामलों में सिरदर्द और दूसरे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

इसलिए अगर आलू का स्वाद सामान्य से काफी कड़वा लगे या खाने के बाद मुंह में जलन महसूस हो तो उसे खाना जारी नहीं रखना चाहिए।

अंकुरित आलू खाने के नुकसान क्या हैं?

अंकुरित आलू में glycoalkaloids की मात्रा बढ़ने की वजह से ज्यादा मात्रा में सेवन करने पर स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है। इसी कारण खाद्य सुरक्षा से जुड़ी संस्थाएं बहुत ज्यादा हरे, अंकुरित या खराब आलू खाने से बचने की सलाह देती हैं।

आलू में अंकुर निकलने का मतलब यह भी नहीं है कि उसके सभी पोषक तत्व खत्म हो गए हैं। असली चिंता उसमें बढ़ सकने वाले glycoalkaloids की मात्रा को लेकर होती है।

आलू हरा क्यों हो जाता है?

जब आलू लंबे समय तक रोशनी के संपर्क में रहता है तो उसकी त्वचा के नीचे हरा रंग दिखाई दे सकता है। यह हरा रंग chlorophyll की वजह से बनता है, लेकिन इसके साथ glycoalkaloids की मात्रा भी बढ़ सकती है।

इसी वजह से आलू को घर में ऐसी जगह रखना बेहतर होता है जहां सीधी रोशनी न पड़े। ठंडी, सूखी और अंधेरी जगह आलू रखने के लिए ज्यादा उपयुक्त मानी जाती है।

क्या अंकुर वाला हिस्सा काटकर आलू खा सकते हैं?

अगर आलू में बहुत कम अंकुर हैं और बाकी आलू सामान्य दिख रहा है तो कुछ खाद्य सुरक्षा सलाहों के अनुसार अंकुर और आसपास के हिस्से को अच्छी तरह काटकर हटाया जा सकता है। आलू को छीलने से भी glycoalkaloids की कुछ मात्रा कम हो सकती है।

लेकिन अगर पूरा आलू काफी हरा हो चुका है, बहुत ज्यादा अंकुर निकल आए हैं, आलू सड़ रहा है या उसका स्वाद कड़वा है तो उसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसे मामले में पूरा आलू फेंक देना बेहतर है।

क्या पकाने से अंकुरित आलू सुरक्षित हो जाता है?

सिर्फ आलू को उबालने, तलने या पकाने से उसमें मौजूद glycoalkaloids पूरी तरह खत्म नहीं होते। इसलिए यह मान लेना सही नहीं है कि बहुत ज्यादा अंकुरित या हरे आलू को अच्छी तरह पकाने के बाद वह पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा।

अगर आलू पहले से ही काफी हरा, खराब या बहुत ज्यादा अंकुरित है तो उसे पकाकर इस्तेमाल करने के बजाय फेंक देना बेहतर है।

अंकुरित आलू को कैसे पहचानें?

अंकुरित आलू की पहचान करना काफी आसान है। इसके लिए आलू को इस्तेमाल करने से पहले कुछ चीजें जरूर देखें।

  • आलू की सतह पर छोटे या बड़े अंकुर निकल आए हों।
  • आलू का रंग सामान्य से ज्यादा हरा दिखाई दे।
  • आलू दबाने पर बहुत नरम या खराब महसूस हो।
  • आलू से सड़ने जैसी गंध आ रही हो।
  • आलू का स्वाद सामान्य से ज्यादा कड़वा या जलन वाला हो।

इनमें से कई संकेत एक साथ दिखाई दें तो ऐसे आलू को इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

आलू को अंकुरित होने से कैसे बचाएं?

आलू खरीदने के बाद उसे लंबे समय तक रोशनी में खुला न रखें। इसे ठंडी, सूखी और अंधेरी जगह पर रखना बेहतर है। आलू को इस्तेमाल करने से पहले भी एक बार अच्छी तरह देख लें कि कहीं उसमें अंकुर या हरा रंग तो नहीं आ गया है।

बहुत ज्यादा मात्रा में आलू खरीदकर लंबे समय तक रखने के बजाय जरूरत के हिसाब से खरीदना भी एक आसान तरीका है। इससे खराब या पुराने आलू इस्तेमाल होने की संभावना कम हो सकती है।

अंकुरित आलू को लेकर क्या सावधानी रखें?

अगर आलू में सिर्फ थोड़ा अंकुर निकला है तो उसे देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन आलू की हालत, रंग और स्वाद को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। खासकर बहुत ज्यादा हरा, सड़ा या अंकुरित आलू खाने से बचना चाहिए।

खाने के बाद अगर किसी व्यक्ति को लगातार उल्टी, तेज पेट दर्द या दूसरी गंभीर परेशानी महसूस हो तो डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

निष्कर्ष

अंकुरित आलू खाना चाहिए या नहीं, इसका जवाब आलू की हालत पर निर्भर करता है। हल्के अंकुर वाले सामान्य आलू में खराब हिस्से को हटाने की सलाह कुछ खाद्य सुरक्षा स्रोत देते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा अंकुरित, हरे, सड़े या कड़वे आलू को खाना सुरक्षित विकल्प नहीं माना जाता।

आलू को हमेशा ठंडी, सूखी और अंधेरी जगह पर रखें और इस्तेमाल करने से पहले उसका रंग और हालत जरूर जांचें।

स्रोत: U.S. Food and Drug Administration (FDA) और Health Canada की खाद्य सुरक्षा संबंधी जानकारी।

लेखक

Rakesh Kumar

नमस्कार, मैं राकेश कुमार हूँ। PAHALI KHABAR के माध्यम से मैं आपके लिए ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, खेल और अन्य महत्वपूर्ण खबरें लेकर आता हूँ। मेरा उद्देश्य है कि आपको हर खबर सरल भाषा में, सही तथ्यों के साथ और समय पर मिले।

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