सोविमा के मैदान पर सोमवार का दिन भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। रणजी ट्रॉफी के प्लेट ग्रुप में नागालैंड के खिलाफ खेलते हुए मिजोरम के बल्लेबाज चिन्मय सुतार ने 517 गेंदों में नाबाद 400 रन ठोक डाले। चिन्मय सुतार 400 रन बनाकर फर्स्ट-क्लास क्रिकेट की एक पारी में यह कारनामा करने वाले सिर्फ दूसरे भारतीय बन गए हैं — उनसे पहले 1948 में भाऊसाहेब बाबासाहेब निम्बालकर ने यह उपलब्धि हासिल की थी, यानी पूरे 78 साल बाद।
मैच के दूसरे दिन जब सुतार क्रीज पर उतरे, तो शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह पारी इतिहास रच देगी। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने 46 चौके और 7 छक्के लगाए और एक भी बार आउट नहीं हुए। उनकी इस मैराथन पारी की बदौलत मिजोरम ने अपनी पहली पारी 9 विकेट पर 581 रन बनाकर घोषित कर दी।

आखिरी विकेट पर 190 रन की अविश्वसनीय साझेदारी
इस पारी का सबसे रोमांचक मोड़ तब आया, जब मिजोरम का स्कोर 392 रन पर 9 विकेट गिर चुके थे और सुतार 231 रन बनाकर खेल रहे थे। क्रीज पर आखिरी बल्लेबाज के रूप में आए लालरेमपुइया छकछुआक — और फिर जो हुआ, वह क्रिकेट प्रेमी लंबे समय तक याद रखेंगे।
दोनों ने दसवें विकेट के लिए नाबाद 190 रन जोड़े, जिसमें सुतार का योगदान 169 रन का रहा, जबकि छकछुआक ने दूसरे छोर पर डटे रहकर नाबाद 14 रन बनाए। यह रणजी ट्रॉफी के इतिहास में दसवें विकेट की तीसरी सबसे बड़ी साझेदारी है। इससे आगे सिर्फ 1991-92 में मुंबई के खिलाफ दिल्ली के लिए अजय शर्मा और मनिंदर सिंह की 233 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी है।
रिकॉर्ड बुक में कहां खड़े हैं सुतार?
चिन्मय सुतार का नाबाद 400 उन्हें एक बेहद खास क्लब में ले गया है — वह फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के इतिहास में चौहरा शतक लगाने वाले सिर्फ 10वें बल्लेबाज बने हैं। इस सूची में ब्रायन लारा (नाबाद 501, 1994 में वारविकशायर के लिए) और सर डॉन ब्रैडमैन (नाबाद 452, 1930) जैसे दिग्गजों के नाम हैं। लारा का रिकॉर्ड आज भी कायम है, जबकि पाकिस्तान के हनीफ मोहम्मद 1959 में 499 रन बनाकर 500 के बेहद करीब पहुंचे थे।
भारतीय संदर्भ में देखें तो सुतार ने पृथ्वी शॉ के 379 रनों (2022-23 में असम के खिलाफ मुंबई के लिए) को पीछे छोड़ दिया है। निम्बालकर का नाबाद 443 रन (दिसंबर 1948, काठियावाड़ के खिलाफ महाराष्ट्र के लिए) अब भी किसी भारतीय का सर्वोच्च फर्स्ट-क्लास स्कोर है। इस पारी में मिजोरम का दूसरा सबसे बड़ा स्कोर विकेटकीपर जेहू एंडरसन के 69 रन रहे — जो सुतार के दबदबे को साफ दर्शाता है।
मुंबई से मिजोरम तक का सफर
सुतार का यह मुकाम रातोंरात नहीं आया। उनका सफर मुंबई के प्रतिस्पर्धी क्रिकेट सर्किट से शुरू हुआ, जहां उन्होंने स्थानीय टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन किया और विजय हजारे ट्रॉफी में मुंबई का प्रतिनिधित्व किया। इस घरेलू सीजन में उन्होंने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ लेकर मिजोरम का प्रतिनिधित्व करने का फैसला किया।
सीजन के पहले मैच में मणिपुर के खिलाफ उन्होंने पहली पारी में 35 और दूसरी पारी में 99 रन बनाकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी — और अब यह ऐतिहासिक 400। मिजोरम जैसे उभरते क्रिकेट राज्य के लिए यह पारी किसी तोहफे से कम नहीं है, और सुतार के लिए यह राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान खींचने का सबसे बड़ा मौका हो सकता है।

