ग्रेटर नोएडा से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जेवर एयरपोर्ट से महज 500 मीटर दूर चलती एसी स्लीपर बस में अचानक आग लग गई, जिसमें सवार नौ यात्रियों की जलकर मौत हो गई। हादसे में कई लोग बुरी तरह झुलस गए और कुछ ने शीशे तोड़कर किसी तरह अपनी जान बचाई।
कैसे हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक यह एसी स्लीपर बस दिल्ली के कश्मीरी गेट से रात करीब 9:30 बजे उत्तर प्रदेश के महोबा के लिए रवाना हुई थी। बस में कुल 35 यात्री सवार थे। रात करीब 11:30 बजे कुछ यात्रियों को बस के अंदर जलने की गंध महसूस हुई। यात्रियों ने तुरंत ड्राइवर और क्लीनर को इसकी सूचना दी, लेकिन आरोप है कि दोनों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। कुछ ही देर बाद बस में आग भड़क उठी और अफरातफरी मच गई। यात्रियों के शोर मचाने के बावजूद ड्राइवर ने तुरंत बस नहीं रोकी, जिसके बाद यात्रियों ने खुद शीशे तोड़े, तब जाकर बस रोकी गई।
समस्तीपुर में छेड़खानी का मामला सामने आया, चार आरोपी गिरफ्तार, गांव में मचा हड़कंप
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि बस के एसी में स्पार्क होने से आग लगी, जो देखते ही देखते पूरी बस में फैल गई। धुएं से कई यात्री बस के अंदर ही फंस गए। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की पांच गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। स्लीपर बस का पिछला हिस्सा काटकर दमकलकर्मियों ने अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला। करीब दो घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सभी शव बाहर निकाले जा सके।
पीड़ित परिवारों का दर्द
हादसे में अपनी मां को खोने वाले एक युवक ने बताया कि आग लगने पर उसकी मां मदद के लिए पुकार रही थी, लेकिन समय पर कोई मदद नहीं पहुंच सकी। कई घायलों ने बताया कि भगदड़ में एक-दूसरे के ऊपर गिरने से भी लोग बुरी तरह घायल हुए। एक पीड़ित के पैर में रॉड फंसी होने के कारण वे बस से बाहर नहीं निकल पाए।
हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुख जताया है। मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया गया है। पुलिस ने बस के ड्राइवर और क्लीनर को गिरफ्तार कर लिया है।
बस के कागजातों में बड़ा फर्जीवाड़ा
हादसे के बाद बस से जुड़ा एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। बस का मालिक मध्य प्रदेश का रहने वाला बताया जा रहा है, जबकि बस दिल्ली से संचालित हो रही थी। इसका रजिस्ट्रेशन बिहार के मधुबनी में हुआ, फिटनेस सर्टिफिकेट राजस्थान से जारी हुआ और प्रदूषण प्रमाण पत्र हरियाणा से बना था। यानी एक ही बस का कनेक्शन छह अलग-अलग राज्यों से जुड़ा हुआ है।
पुलिस के मुताबिक इस बस पर करीब 1.75 लाख रुपये के 19 चालान पहले से बकाया थे, जिनमें ओवरस्पीडिंग, बिना लाइसेंस गाड़ी चलाना, परमिट नियमों का उल्लंघन और कम उम्र के चालक से बस चलवाने जैसे मामले शामिल हैं। शिकायत है कि बस के इंजन से आवाज आने की जानकारी पहले भी दी गई थी, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया।
डीसीपी ने बताया कि जांच में आईएसी की कमी के चलते स्पार्किंग होने और फिर आग फैलने की बात सामने आई है। इस मामले में जेवर थाने में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर ड्राइवर व क्लीनर को हिरासत में लिया गया है।
आखिर क्यों लगती है बसों में आग
परिवहन विशेषज्ञों के मुताबिक बसों में आग लगने के पीछे कई वजहें होती हैं। सबसे बड़ी वजह शॉर्ट सर्किट है, जिससे दरवाजे जाम हो जाते हैं और यात्री बस में ही कैद हो जाते हैं। इसके अलावा ज्यादा कमाई के लालच में बस मालिक अवैध तरीके से मॉडिफिकेशन कराते हैं, नॉर्मल बसों को एसी बस में बदल देते हैं और अतिरिक्त चार्जिंग पॉइंट व लाइटिंग लगवा देते हैं, जिससे वायरिंग पर लोड बढ़ जाता है।
नियमित रखरखाव और जांच न होना भी बड़ी वजह है, जिससे इमरजेंसी गेट अक्सर जाम रहते हैं और शीशा तोड़ने वाले हथौड़े तक बस में मौजूद नहीं होते। नियमों के अनुसार एसी बसों में मेडिकल किट और अग्निशमन यंत्र रखना अनिवार्य है, लेकिन कई बसों में यह सुरक्षा उपकरण नदारद रहते हैं।
उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री ने बताया कि बस दिल्ली से महोबा जा रही राष्ट्रीय परमिट की बस थी, जिसका रजिस्ट्रेशन बिहार में और फिटनेस-प्रदूषण प्रमाण पत्र अलग-अलग राज्यों में बना था। ड्राइवर का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। सवाल यह उठता है कि इतने चालान कटने के बावजूद यह बस सड़क पर कैसे दौड़ती रही, और समय रहते कार्रवाई होती तो शायद नौ जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।