निवेशकों के लंबे इंतजार का अंत हो गया है। जियो आईपीओ को लेकर तस्वीर अब साफ हो चुकी है — मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज समर्थित जियो प्लेटफॉर्म्स ने 14 अक्टूबर को अपना रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है। दस्तावेज के मुताबिक यह जियो आईपीओ 21 अक्टूबर 2026 को खुलेगा और 23 अक्टूबर तक इसमें बोली लगाई जा सकेगी। एंकर निवेशकों के लिए बोली की प्रक्रिया एक दिन पहले, यानी 19 अक्टूबर को होगी।

मुख्य बातें:
- आईपीओ खुलेगा: 21 अक्टूबर 2026 | बंद होगा: 23 अक्टूबर 2026
- एंकर निवेशकों की बोली: 19 अक्टूबर 2026
- प्राइस बैंड: ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर
- लॉट साइज: कम से कम 12 शेयर, इसके बाद 12 के गुणांक में बोली
- कर्मचारियों के लिए: ₹500 करोड़ तक आरक्षण, ₹54 प्रति शेयर डिस्काउंट
- रिलायंस शेयरधारकों के लिए: ₹2,500 करोड़ तक आरक्षण
जियो आईपीओ: प्राइस बैंड और लॉट साइज तय
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शेयर बाजार को सूचित किया है कि जियो आईपीओ में प्रति शेयर ₹1,065 से ₹1,119 का मूल्य दायरा तय किया गया है। निवेशक कम से कम 12 शेयरों के लिए बोली लगा सकेंगे, और उसके बाद 12 के गुणांक में ही आवेदन किया जा सकेगा — यानी 12, 24, 36 या इससे अधिक शेयर। प्राइस बैंड के ऊपरी सिरे पर एक लॉट की कीमत करीब ₹13,428 बनेगी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस जियो आईपीओ में कंपनी 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी करने की योजना बना रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, आईपीओ के बाद जियो का मूल्यांकन करीब ₹10.3 लाख करोड़ रहने का लक्ष्य है — यानी यह भारतीय बाजार के इतिहास के सबसे बड़े पब्लिक इश्यू में से एक हो सकता है।
कर्मचारियों और रिलायंस शेयरधारकों को खास आरक्षण
इस आईपीओ की एक खास बात आरक्षण की व्यवस्था है। पात्र कर्मचारियों के लिए ₹500 करोड़ तक के शेयर आरक्षित रखे गए हैं, और उन्हें तय मूल्य दायरे पर ₹54 प्रति शेयर का डिस्काउंट भी मिलेगा। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए ₹2,500 करोड़ तक के शेयर आरक्षित हैं। दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, वे व्यक्तिगत निवेशक और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) इस श्रेणी में आ सकते हैं, जिनके पास 14 अक्टूबर 2026 तक मूल कंपनी के सार्वजनिक इक्विटी शेयर थे — बशर्ते वे लागू पात्रता शर्तें पूरी करते हों।
जुटाई गई रकम कहां इस्तेमाल होगी
जियो आईपीओ पूरी तरह नए शेयरों का इश्यू होगा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इससे जुटाई गई रकम का इस्तेमाल मुख्य रूप से टेलीकॉम कारोबार से जुड़ी कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज को चुकाने और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जा सकता है। आईपीओ की कुल राशि और शेयरों की पेशकश की संरचना का अंतिम विवरण आरएचपी और आगे जारी होने वाले दस्तावेजों में दर्ज होगा।
क्यों अहम है यह आईपीओ
जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस इंडस्ट्रीज की दूरसंचार और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी इकाई है, और जियो आज भारत का सबसे बड़ा टेलीकॉम ऑपरेटर है। 5G विस्तार, डिजिटल सेवाओं और एंटरप्राइज कारोबार के दम पर कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से वृद्धि की है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस आईपीओ की सफलता भारतीय पूंजी बाजार में टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम क्षेत्र के प्रति निवेशकों के भरोसे का पैमाना बनेगी। दिवाली से ठीक पहले आ रहा यह इश्यू त्योहारी सीजन में बाजार की धड़कन बढ़ाने वाला है।
निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान
विशेषज्ञों की सामान्य सलाह है कि किसी भी आईपीओ में पैसा लगाने से पहले कंपनी के दस्तावेजों में दर्ज जोखिम कारकों को जरूर पढ़ें। जियो आईपीओ का प्राइस बैंड अब आधिकारिक हो चुका है, लेकिन अंतिम इश्यू प्राइस और अलॉटमेंट से जुड़ी हर जानकारी के लिए कंपनी की आधिकारिक घोषणाओं पर ही भरोसा करें। यह खबर निवेश सलाह नहीं है — फैसला अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय सलाहकार से चर्चा के बाद ही लें।
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— पहली खबर डेस्क

