जोधपुर के आसमान में F-35A: मुख्य बात क्या है?
राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर भारतीय वायुसेना की मेजबानी वाले बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास Tarang Shakti 2026 के दौरान अमेरिकी वायुसेना के F-35A लाइटनिंग II फाइटर जेट भी उड़ान भरते दिखे। यह पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है। भारतीय वायुसेना के साथ इसका साझा अभ्यास दोनों देशों के बढ़ते रक्षा सहयोग का अहम संकेत माना जा रहा है।
सीधे शब्दों में कहें तो यह अभ्यास इसलिए चर्चा में है क्योंकि भारतीय पायलटों को दुनिया के सबसे आधुनिक फाइटर जेट्स में से एक के साथ एक ही आसमान में काम करने और उसकी रणनीतियों को करीब से समझने का मौका मिल रहा है।
Tarang Shakti अभ्यास क्या है?
Tarang Shakti भारतीय वायुसेना द्वारा आयोजित एक बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास है। इसके 2024 संस्करण में भी जोधपुर में अभ्यास हुआ था। Pahali Khabar पर Tejas फाइटर जेट से जुड़ी पिछली रिपोर्ट भी पढ़ी जा सकती है। 2026 अभ्यास की अवधि, भागीदार देशों और शामिल विमानों की आधिकारिक जानकारी रक्षा मंत्रालय की PIB विज्ञप्ति में दी गई है। इसका पहला संस्करण 2024 में हुआ था, जब इसे दो चरणों में आयोजित किया गया था। पहला चरण तमिलनाडु के सुलूर में और दूसरा चरण राजस्थान के जोधपुर में हुआ था। उस समय कई मित्र देशों की वायुसेनाओं ने इसमें हिस्सा लिया था।
इस अभ्यास का उद्देश्य अलग-अलग देशों की वायुसेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना, एक-दूसरे की कार्यप्रणाली समझना और जटिल युद्ध परिस्थितियों में संयुक्त अभियान चलाने का अनुभव हासिल करना है। Tarang Shakti 2026 इसी श्रृंखला का अगला अध्याय है।
जोधपुर ही क्यों चुना गया?
जोधपुर भारतीय वायुसेना का एक महत्वपूर्ण ठिकाना है। थार रेगिस्तान के ऊपर फैला खुला आसमान, अनुकूल मौसम और विशाल हवाई क्षेत्र बड़े पैमाने के हवाई अभ्यासों के लिए आदर्श माना जाता है। रणनीतिक रूप से भी पश्चिमी सीमा के नजदीक होने के कारण यह क्षेत्र प्रशिक्षण की दृष्टि से अहम है।
F-35A की खासियतें जो इसे अलग बनाती हैं
F-35A अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा विकसित किया गया है। F-35 परिवार के तीन संस्करण हैं, जिनमें “A” संस्करण पारंपरिक रनवे से उड़ान भरने वाला मॉडल है और मुख्य रूप से अमेरिकी वायुसेना इसका इस्तेमाल करती है।
स्टील्थ क्षमता
इसका डिज़ाइन दुश्मन के रडार पर पकड़ में आने की संभावना कम करता है, जिससे यह खतरनाक क्षेत्रों में भी काम कर सकता है।
सेंसर फ्यूज़न
कई सेंसरों की जानकारी एक साथ जोड़कर पायलट को युद्धक्षेत्र की स्पष्ट तस्वीर मिलती है।
बहु-भूमिका क्षमता
हवाई मुकाबला, ज़मीनी हमला और निगरानी जैसे अलग-अलग मिशन एक ही विमान से संभव हैं।
भारत में F-35 इससे पहले बेंगलुरु में आयोजित Aero India प्रदर्शनी में दिख चुका है, लेकिन किसी संयुक्त युद्धाभ्यास में भारतीय वायुसेना के साथ इसकी भागीदारी कहीं अधिक व्यावहारिक महत्व रखती है।
एक नज़र में अभ्यास से जुड़ी अहम जानकारी
भारत के लिए इस अभ्यास का महत्व
इस तरह के बहुराष्ट्रीय अभ्यास केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं होते। इनसे वायुसेना को कई ठोस फायदे मिलते हैं:
- पांचवीं पीढ़ी के विमान से परिचय: भारतीय पायलट समझ पाते हैं कि स्टील्थ विमान के साथ या उसके खिलाफ अभियान कैसे चलाया जाता है।
- इंटरऑपरेबिलिटी: संचार प्रक्रियाओं, मिशन प्लानिंग और संयुक्त ऑपरेशन में तालमेल बेहतर होता है।
- रणनीतिक संदेश: भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की मजबूती दुनिया के सामने आती है।
- स्वदेशी तैयारियों को दिशा: भारत अपने उन्नत लड़ाकू विमान कार्यक्रम पर काम कर रहा है, ऐसे में आधुनिक तकनीक का प्रत्यक्ष अनुभव उपयोगी साबित हो सकता है।
क्या भारत F-35 खरीदेगा?
यह सवाल अक्सर उठता है। सच यह है कि केवल किसी अभ्यास में भागीदारी का मतलब खरीद का फैसला नहीं होता। F-35 को लेकर समय-समय पर चर्चाएं जरूर होती रही हैं, लेकिन ऐसी किसी भी डील की पुष्टि सिर्फ सरकार की आधिकारिक घोषणा से ही मानी जानी चाहिए। फिलहाल इस अभ्यास को प्रशिक्षण और सहयोग के नजरिए से देखना ही सही है।
स्थानीय लोगों और पाठकों के लिए उपयोगी बातें
अभ्यास के दौरान जोधपुर और आसपास के इलाकों में लड़ाकू विमानों की तेज आवाज़ सुनाई देना सामान्य है। इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।
- एयरबेस के पास तस्वीरें या वीडियो लेने से बचें, सैन्य प्रतिष्ठानों के आसपास फोटोग्राफी पर प्रतिबंध हो सकता है।
- ड्रोन उड़ाने से पहले स्थानीय नियमों की जानकारी लें, अभ्यास के समय हवाई क्षेत्र में अतिरिक्त पाबंदियां लागू हो सकती हैं।
- सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो या दावों को आगे बढ़ाने से पहले उनकी पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
F-35A और F-35B में क्या अंतर है?
F-35A सामान्य रनवे से उड़ान भरता है, जबकि F-35B छोटे रनवे से टेकऑफ और वर्टिकल लैंडिंग करने में सक्षम है। B संस्करण का इस्तेमाल मुख्य रूप से एयरक्राफ्ट कैरियर और विशेष अभियानों में होता है।
क्या आम लोग यह अभ्यास देख सकते हैं?
आमतौर पर ऐसे अभ्यास सुरक्षित सैन्य क्षेत्र में होते हैं और जनता के लिए खुले नहीं होते। अगर कोई सार्वजनिक प्रदर्शन आयोजित होता है, तो उसकी घोषणा वायुसेना की ओर से अलग से की जाती है।
निष्कर्ष
जोधपुर में Tarang Shakti 2026 के दौरान अमेरिकी F-35A की मौजूदगी भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इससे भारतीय वायुसेना को आधुनिक युद्ध तकनीकों और संयुक्त अभियानों का बहुमूल्य अनुभव मिलता है। हालांकि, इसे किसी हथियार सौदे के संकेत के बजाय रणनीतिक साझेदारी और प्रशिक्षण के रूप में देखना ज्यादा सटीक है।
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