Mirzapur The Movie Review: वेब सीरीज की दुनिया में सबसे बड़ा नाम बन चुकी मिर्जापुर अब सिनेमाघरों की स्क्रीन पर उतर आई है। तीन सीजन तक दर्शकों को बांधे रखने वाली इस फ्रेंचाइजी से उम्मीदें आसमान छू रही थीं, और 4 सितंबर 2026 को रिलीज हुई Mirzapur The Movie ने पहले ही शो से यह साबित करना शुरू कर दिया कि यह सफर बड़े पर्दे पर भी उतना ही दमदार है। रिलीज के कुछ घंटों के भीतर ही सोशल मीडिया पर रिएक्शन की बाढ़ आ गई, और ज्यादातर दर्शक फिल्म को लेकर उत्साहित नजर आए।
इस लेख में हम आपको बताएंगे कि फिल्म की कहानी कैसी है, कौन सा किरदार सबसे ज्यादा छाप छोड़ता है, कहां फिल्म कमजोर पड़ती है, और क्या इसे थिएटर में देखना पैसा वसूल है या नहीं।
Mirzapur The Movie Review: एक नजर में
रिलीज से पहले ही इस फिल्म को लेकर माहौल बना हुआ था। ट्रेलर, गानों और प्रोमोशनल इवेंट्स ने फैंस की उत्सुकता को कई गुना बढ़ा दिया था। अब जब फिल्म सिनेमाघरों में पहुंच चुकी है, तो सवाल यही है — क्या यह उम्मीदों पर खरी उतरती है? शुरुआती जवाब ज्यादातर हां में ही मिल रहा है, हालांकि हर तारीफ के साथ कुछ आलोचनाएं भी जुड़ी हुई हैं।
यह फिल्म वेब सीरीज के तीसरे सीजन की सीधी अगली कड़ी नहीं है। इसके बजाय यह मिर्जापुर की उसी दुनिया के भीतर एक समानांतर रास्ता चुनती है, जहां सत्ता की कुर्सी, पुराने रिश्तों में दरार और नए सिरे से बनते-बिगड़ते समीकरण कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
जो दर्शक पहले से इस फ्रेंचाइजी से जुड़े हैं, उनके लिए ज्यादातर किरदार और उनकी आपसी दुश्मनी जानी-पहचानी लगेगी। लेकिन कहानी में कुछ नए मोड़ भी जोड़े गए हैं, जो पुराने ढांचे को दोहराने के बजाय उसे आगे ले जाने की कोशिश करते हैं। सत्ता की भूख, बदले की आग और परिवारों के बीच की खींचतान — यही तीन धागे पूरी फिल्म को बांधे रखते हैं।
रवि किशन: इस बार की सबसे बड़ी एंट्री
फिल्म को लेकर जितनी चर्चा पुराने किरदारों की वापसी की हो रही थी, उतनी ही उत्सुकता एक नए चेहरे को लेकर भी थी — और वह चेहरा है रवि किशन का। वह इस फिल्म में बबुआ यादव नाम के किरदार में नजर आते हैं, जो सीधे तौर पर खलनायक जैसा रौब रखता है, लेकिन उसमें एक अलग तरह की चुलबुली और रोमांटिक परत भी छिपी है।

यही मिश्रण उनके किरदार को बाकी विलेन किरदारों से अलग बनाता है। दर्शकों का शुरुआती रिएक्शन बताता है कि उनकी एंट्री सीटी और तालियों के साथ हुई, और कई लोग उनके अंदाज को फिल्म का सबसे बड़ा सरप्राइज बता रहे हैं। भोजपुरी और लोक अंदाज में रचा-बसा उनका किरदार मिर्जापुर की मिट्टी से जुड़ा हुआ महसूस होता है, जो फ्रेंचाइजी के मूल स्वभाव से मेल खाता है।
कालीन भैया का किरदार इस फ्रेंचाइजी की रीढ़ रहा है, और पंकज त्रिपाठी एक बार फिर इसमें जान डालते नजर आते हैं। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि वह डायलॉगबाजी से ज्यादा खामोशी, ठहराव और आंखों से असर छोड़ते हैं।
फिल्म में भी उनका यही अंदाज बरकरार दिखता है। जब भी वह स्क्रीन पर आते हैं, माहौल में एक अलग तरह का तनाव पैदा हो जाता है — यही उनके अभिनय की ताकत है। शुरुआती समीक्षाओं में उनके प्रदर्शन को फिल्म की सबसे मजबूत कड़ियों में गिना जा रहा है।
मुन्ना भैया की वापसी ने बढ़ाया उत्साह
दिव्येंदु शर्मा एक बार फिर मुन्ना त्रिपाठी के किरदार में लौटे हैं, और उनकी वापसी को फैंस ने खुले दिल से स्वीकार किया है। मुन्ना का पागलपन, उसका अहंकार और सत्ता की भूख — यही वे तत्व हैं जिन्होंने इस किरदार को वेब सीरीज के दौर में इतना लोकप्रिय बनाया था। बड़े पर्दे पर भी वह उसी ऊर्जा के साथ नजर आते हैं।
गुड्डू पंडित हमेशा से शारीरिक ताकत, गुस्से और बदले की भावना का प्रतीक रहा है, और अली फजल इस बार भी उसी आक्रामकता के साथ स्क्रीन पर दिखते हैं। मुन्ना और गुड्डू की आपसी टक्कर एक बार फिर फिल्म के केंद्र में है, और यही टकराव कहानी को गति देता है।
जिस चीज के लिए मिर्जापुर फ्रेंचाइजी सबसे ज्यादा जानी जाती है, वह है उसका कच्चा और बेबाक अंदाज — गाली, गोली और भौकाल। फिल्म में यह फॉर्मूला बरकरार रखा गया है। एक्शन सीक्वेंस बड़े पर्दे के हिसाब से भव्य बनाए गए हैं, और बैकग्राउंड म्यूजिक हर सीन में तनाव और रोमांच बढ़ाने का काम करता है।
डायलॉग्स भी फ्रेंचाइजी की पुरानी पहचान के मुताबिक तीखे और यादगार हैं। कई दर्शकों ने फिल्म के क्लाइमैक्स को खासतौर पर सराहा है, जिसमें कहानी के सारे धागे एक साथ आकर टकराते हैं।
हर फिल्म की तरह इसमें भी कुछ कमियां हैं, और शुरुआती रिव्यू में सबसे ज्यादा शिकायत इसकी लंबाई और रफ्तार को लेकर है। वेब सीरीज का फॉर्मेट कहानी को धीरे-धीरे खोलने की इजाजत देता है, लेकिन सिनेमाघर में वही तरीका हर जगह उतना असरदार नहीं लगता।
कुछ दर्शकों ने यह भी महसूस किया कि फिल्म में किरदारों और रिश्तों की संख्या इतनी ज्यादा है कि कहानी को समझाने में ही काफी समय चला जाता है। बीच के हिस्से में गति धीमी पड़ने की शिकायतें भी सामने आई हैं। अगर आप दो घंटे की तेज-तर्रार फिल्म की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो यह पहलू आपको थोड़ा खटक सकता है।
सर्टिफिकेट और दर्शक वर्ग
यह साफ तौर पर पारिवारिक फिल्म नहीं है। मिर्जापुर फ्रेंचाइजी शुरू से ही अपनी बोल्ड, हिंसक और गाली-गलौज भरी शैली के लिए जानी जाती रही है, और फिल्म भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाती है। इसे A सर्टिफिकेट मिला है और सेंसर बोर्ड की तरफ से कुछ दृश्यों में कट भी लगाए गए हैं। इसलिए बच्चों या पूरे परिवार के साथ इसे देखने की सलाह नहीं दी जा सकती — यह पूरी तरह वयस्क दर्शकों के लिए बनी फिल्म है।
रिलीज से पहले ही एडवांस बुकिंग को लेकर अच्छी खबरें आ रही थीं, और मिर्जापुर फ्रेंचाइजी का बड़ा फैनबेस इसका सबसे मजबूत पक्ष माना जा रहा है। इसी हफ्ते सिनेमाघरों में एक और फिल्म भी दस्तक दे रही है, जिससे बॉक्स ऑफिस पर टक्कर देखने को मिल सकती है। इस मुकाबले पर विस्तार से नजर डालने के लिए हमारा Awarapan 2 vs Batwara 1947 एडवांस बुकिंग रिपोर्ट जरूर पढ़ें।
सोशल मीडिया पर दर्शकों का मूड
रिलीज के साथ ही ट्विटर (X) पर #MirzapurTheMovie ट्रेंड करने लगा। फैंस अपने पसंदीदा किरदारों की एंट्री, डायलॉग और एक्शन सीक्वेंस के स्क्रीनशॉट और वीडियो शेयर कर रहे हैं। नीचे एक ऐसा ही रिएक्शन देखें, जिसमें स्टारकास्ट को लेकर उत्साह साफ झलकता है:
Why are you so excited? It’s just a movie…
Meanwhile the cast 👀🔥#MirzapurTheMovie pic.twitter.com/jIkbo20Q4u
— 𝙍𝙞𝙎𝙃𝙞 (@Rishi_vk_18) September 4, 2026
क्या फिल्म देखने लायक है?
अगर इसे एक अलग-थलग क्राइम-ड्रामा की तरह परखा जाए, तो इसकी लंबाई और कहानी का फैलाव कमजोरी लग सकते हैं। लेकिन अगर इसे पूरी फ्रेंचाइजी की कड़ी के तौर पर देखा जाए, तो यह अपने मकसद में काफी हद तक कामयाब नजर आती है।
फिल्म की असली ताकत उसके किरदार और उन्हें निभाने वाले कलाकारों का स्टार पावर है। पंकज त्रिपाठी का कालीन भैया, अली फजल का गुड्डू पंडित, दिव्येंदु का मुन्ना भैया और रवि किशन का बबुआ यादव — इन चारों की मौजूदगी ऐसी पहचान गढ़ती है, जो किसी नई क्राइम फिल्म के लिए आसान नहीं होती।
हमारी रेटिंग
⭐ 3.5/5
किसके लिए देखें: मिर्जापुर के पुराने फैंस, क्राइम-ड्रामा पसंद करने वाले दर्शक और बड़े पर्दे पर पावर गेम, एक्शन व दमदार डायलॉग देखने के शौकीन।
किसे परेशानी हो सकती है: जो दर्शक छोटी अवधि और तेज रफ्तार वाली कहानी पसंद करते हैं।
“नाम छोटा है, भौकाल नहीं” — यह टैगलाइन फिल्म पर पूरी तरह सटीक बैठती है। मिर्जापुर अपने फैनबेस के दबाव में सिमटने के बजाय उसे बड़े पर्दे पर और विस्तार देने की कोशिश करती है। सत्ता, बदला, धोखा और भौकाल — फ्रेंचाइजी का वह पुराना स्वाद इस फिल्म में मौजूद है, भले ही लंबाई को लेकर कुछ सवाल उठें।
जो दर्शक वेब सीरीज से जुड़े रहे हैं, उनके लिए यह बड़े पर्दे पर एक अलग ही अनुभव साबित हो सकती है। वहीं जिन्होंने सीरीज नहीं देखी, उन्हें किरदारों की गहराई और उनके रिश्ते समझने में थोड़ी दिक्कत महसूस हो सकती है।
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Mirzapur The Movie कब रिलीज हुई?
फिल्म 4 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है।
फिल्म में मुख्य कलाकार कौन-कौन हैं?
पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु शर्मा और रवि किशन के अलावा फ्रेंचाइजी के कई परिचित चेहरे फिल्म में नजर आते हैं।
क्या मुन्ना भैया इस फिल्म में हैं?
हां, दिव्येंदु शर्मा एक बार फिर मुन्ना भैया के किरदार में वापसी करते हैं।
रवि किशन का किरदार क्या है?
रवि किशन फिल्म में बबुआ यादव की भूमिका में हैं, जिसे शुरुआती दर्शक प्रतिक्रियाओं में खूब सराहा जा रहा है।
क्या फिल्म की लंबाई ज्यादा है?
हां, शुरुआती समीक्षाओं में फिल्म की लंबाई और बीच के हिस्से में गति धीमी होने की शिकायतें सामने आई हैं।
क्या यह फिल्म बच्चों के साथ देखी जा सकती है?
नहीं, फिल्म को A सर्टिफिकेट मिला है और यह पूरी तरह वयस्क दर्शकों के लिए बनाई गई है।
क्या फिल्म देखने लायक है?
एक्शन, डायलॉग और कलाकारों का प्रदर्शन इसकी ताकत हैं, जबकि लंबाई इसकी सबसे बड़ी कमी मानी जा रही है। मिर्जापुर के फैंस के लिए यह जरूर देखने लायक है।
(नोट: यह समीक्षा रिलीज के पहले दिन की शुरुआती दर्शक प्रतिक्रियाओं और शुरुआती रिव्यू पर आधारित है। पूरी समीक्षा और बॉक्स ऑफिस रुझान के लिए अपडेट रहें।)

