नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वार्षिक विजयादशमी उत्सव में मंगलवार को सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का संबोधन सुर्खियों में रहा। Mohan Bhagwat Vijayadashami speech में उन्होंने सामाजिक एकता और राष्ट्रीय लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर दिया। 20 अक्टूबर 2026 को नागपुर के रेशिमबाग में सुबह 7:40 बजे से शुरू हुए समारोह में शस्त्र पूजा की गई और संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस बार का उत्सव इसलिए भी विशेष रहा, क्योंकि यह संघ के शताब्दी वर्ष के समापन वर्ष में आयोजित हुआ — संगठन की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन ही नागपुर में हुई थी।
समारोह का विवरण
समारोह के मुख्य अतिथि दैनिक जागरण के प्रधान संपादक संजय गुप्ता रहे। कार्यक्रम की शुरुआत शस्त्र पूजा से हुई, जो संघ के वार्षिक विजयादशमी उत्सव की परंपरा का अहम हिस्सा है। इसके बाद संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की गई और फिर सरसंघचालक ने अपना वार्षिक संबोधन प्रस्तुत किया। विजयादशमी के अवसर पर दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रावण दहन कार्यक्रम की पूरी खबर यहां पढ़ें।
Mohan Bhagwat Vijayadashami speech के मुख्य संदेश
अपने संबोधन में भागवत ने सामाजिक एकता और राष्ट्रीय लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता पर सबसे अधिक बल दिया। उनका कहना था, “हम कमजोर हुए क्योंकि हम बंटे।” उनके अनुसार, भाषा, जाति, संप्रदाय और समुदाय के भेद भावनात्मक एकता और भारतीय राष्ट्रीय पहचान पर हावी हो गए, और इसी वजह से देश कमजोर हुआ। Mohan Bhagwat Vijayadashami speech के इस हिस्से में उन्होंने भावनात्मक एकता को राष्ट्रीय शक्ति का आधार बताया।
आंदोलनों और सामाजिक पहल पर जोर
Mohan Bhagwat Vijayadashami speech में भागवत ने कहा कि आंदोलन लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन उनका उद्देश्य समस्याओं का समाधान होना चाहिए, न कि राजनीतिक स्वार्थ का माध्यम बनना चाहिए। संबोधन में उन्होंने संत रविदास की शिक्षाओं का उल्लेख किया और संघ की ‘पंच परिवर्तन’ पहल की भी चर्चा की।

‘रिजीम चेंज’ वाला संदेश — खबरों के अनुसार
खबरों के अनुसार, News18 की कवरेज में Mohan Bhagwat Vijayadashami speech का “रिजीम चेंज न हुआ, न आगे होगा” वाला संदेश विशेष चर्चा में रहा। बताया गया कि फ्रांस, बांग्लादेश, नेपाल और अल्बानिया जैसी घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा गया कि भारत में भी सत्ता परिवर्तन की कोशिशों पर नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि केवल सत्ता बदलने से परिस्थितियां नहीं बदलतीं। यह विवरण मीडिया कवरेज पर आधारित है। राजनीति से जुड़ी अन्य ताजा खबरें यहां पढ़ें।
शताब्दी वर्ष का ऐतिहासिक संदर्भ
2026 का विजयादशमी समारोह संघ के शताब्दी वर्ष के समापन वर्ष में पड़ा। संगठन की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन ही नागपुर में हुई थी, इसलिए इस शहर का इस उत्सव से गहरा ऐतिहासिक नाता है। शताब्दी वर्ष के इस समापन चरण में संघ ने सामाजिक एकता और राष्ट्र-निर्माण के संकल्प को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
समापन
कुल मिलाकर, इस साल का विजयादशमी संबोधन सामाजिक एकता, भारतीय राष्ट्रीय पहचान और शताब्दी वर्ष के संकल्प पर केंद्रित रहा। Mohan Bhagwat Vijayadashami speech को संघ के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए आगे की दिशा तय करने वाला संदेश माना जा रहा है।
(स्रोत: internationalnewsandviews; News18 वीडियो कवरेज)

