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नीले ड्रम वाली मुस्कान को फांसी या उम्रकैद? 14 अक्टूबर को आएगा फैसला

Excerpt: मेरठ के नीले ड्रम और सौरभ हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को दोषी माना गया है। अब 14 अक्टूबर को फैसला होगा कि दोनों को फांसी मिलेगी या उम्रकैद। मुस्कान के मामले में फांसी की चर्चा के बीच जानिए क्या कहता है कानून और क्यों इस सजा पर सबकी नजर है।

नीले ड्रम वाली मुस्कान को फांसी या उम्रकैद?

नीले ड्रम वाली मुस्कान को फांसी या उम्रकैद?

मेरठ के नीले ड्रम और सौरभ हत्याकांड में अब एक बड़ा सवाल सामने है। अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी मान लिया है। लेकिन अब अगला सवाल है कि सही ओर मुस्कान को फांसी या उम्रकैद? इनको सजा क्या मिलेगी?

 

क्या मुस्कान और साहिल को फांसी होगी या फिर उम्रकैद की सजा मिलेगी?

मुस्कान को फांसी या उम्रकैद? इसका जवाब 14 अक्टूबर को मिलेगा

 

मुस्कान के मामले में फांसी की चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि यह हत्या का बेहद गंभीर मामला है। लेकिन सिर्फ मामला गंभीर होने से किसी को सीधे फांसी नहीं दी जाती। अदालत को यह भी देखना होता है कि क्या मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ यानी बेहद दुर्लभ मामलों की कैटेगरी में आता है या नहीं।

 

वरिष्ठ वकील वीकेपी वर्मा का कहना है कि मेरठ का यह मामला फिलहाल ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ केस जैसा नहीं लगता। ऐसे में उनका मानना है कि फांसी की जगह उम्रकैद की सजा मिलने की संभावना ज्यादा हो सकती है।

 

लेकिन यहां एक और बात है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

 

आजाद भारत में अब तक किसी महिला को फांसी नहीं हुई

 

1947 के बाद भारत में कई महिलाओं को अदालतों से मौत की सजा सुनाई गई है। लेकिन अब तक किसी महिला कैदी को फांसी पर लटकाए जाने का मामला नहीं है।

 

सबसे ज्यादा चर्चा शबनम के मामले की हुई। उत्तर प्रदेश की शबनम को अपने ही परिवार के सात लोगों की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। उनकी दया याचिका भी खारिज हो चुकी है, लेकिन अभी तक उन्हें फांसी नहीं दी गई।

 

इसके अलावा महाराष्ट्र की बहनों रेणुका शिंदे और सीमा गावित का मामला भी काफी चर्चित रहा। दोनों को बच्चों के अपहरण और हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। लेकिन इस मामले में भी फांसी की सजा पर अमल नहीं हुआ।

 

यानी अदालत ने महिलाओं को फांसी की सजा सुनाई जरूर है, लेकिन आजाद भारत के इतिहास में अभी तक किसी महिला को फांसी दी नहीं गई।

 

अब यही वजह है कि मेरठ के मामले में भी 14 अक्टूबर का फैसला काफी अहम माना जा रहा है।

 

अदालत के सामने अब यह सवाल होगा कि मुस्कान और साहिल को किस सजा का हकदार माना जाए। फांसी या उम्रकैद?

 

फिलहाल इसका जवाब किसी के पास पक्का नहीं है। 14 अक्टूबर को अदालत का फैसला आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।

लेखक

Rakesh Kumar

नमस्कार, मैं राकेश कुमार हूँ। PAHALI KHABAR के माध्यम से मैं आपके लिए ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, खेल और अन्य महत्वपूर्ण खबरें लेकर आता हूँ। मेरा उद्देश्य है कि आपको हर खबर सरल भाषा में, सही तथ्यों के साथ और समय पर मिले।

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