नई दिल्ली। चीनी आधारित एथेनॉल रोक 2026-27 पर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि एथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) 2026-27 में चीनी डायवर्जन शून्य रहेगा — यानी गन्ने के रस, चीनी, चीनी सिरप और बी-हैवी मोलेसिस (BHM) से बना एथेनॉल अब सरकारी ऑयल कंपनियां नहीं खरीदेंगी। इसके साथ ही पांच सरकारी ऑयल कंपनियों ने 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद के लिए टेंडर जारी कर दिया है।

मुख्य बातें एक नजर में:
- टेंडर 16 अक्टूबर को जारी; इंडियन ऑयल, BPCL, HPCL, MRPL और नुमालीगढ़ रिफाइनरी शामिल
- सप्लाई अवधि: 1 नवंबर 2026 से 31 अक्टूबर 2027 (चार तिमाहियों में)
- कुल खरीद लक्ष्य: करीब 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल
- पाबंदी: गन्ने का रस, चीनी, चीनी सिरप और बी-हैवी मोलेसिस से बना एथेनॉल नहीं खरीदा जाएगा
- विकल्प: सी-हैवी मोलेसिस, खराब खाद्यान्न, FCI का अधिशेष चावल, मक्का और अन्य अनुमत फीडस्टॉक
चीनी आधारित एथेनॉल रोक 2026-27: फैसला क्यों लिया गया
इस फैसले की सबसे बड़ी वजह है कमजोर मानसून। महाराष्ट्र और कर्नाटक — देश के दो सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्यों — में खराब बारिश के कारण गन्ने की फसल पर असर पड़ने की आशंका है। दूसरी ओर घरेलू बाजार में चीनी की खुदरा कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता साफ है: पहले देश की थाली, फिर ईंधन। यानी घरेलू खपत के लिए पर्याप्त चीनी सुनिश्चित करना।
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने यह कदम उठाया है। दिसंबर 2023 में भी ESY 2023-24 के लिए चीनी डायवर्जन पर इसी तरह की पाबंदी लगाई गई थी, जिसे अगले साल हटा लिया गया था। कृषि नीति विशेषज्ञों का कहना है कि सी-हैवी मोलेसिस चीनी का उप-उत्पाद है — इसमें बची हुई चीनी नहीं होती, इसलिए इससे एथेनॉल बनाने पर चीनी का नुकसान नहीं होता। यही वजह है कि इसे प्रतिबंधित सूची से बाहर रखा गया है।
किस फीडस्टॉक पर क्या रेट मिलेगा
टेंडर में अलग-अलग फीडस्टॉक के लिए बुनियादी खरीद दरें तय की गई हैं: सी-हैवी मोलेसिस से बने एथेनॉल के लिए 57.97 रुपये प्रति लीटर, खराब खाद्यान्न से बने एथेनॉल के लिए 64 रुपये, FCI के अधिशेष चावल से बने एथेनॉल के लिए 60.32 रुपये और मक्का से बने एथेनॉल के लिए 66.07 रुपये प्रति लीटर। मक्के पर 2.79 रुपये प्रति लीटर का इंसेंटिव भी मिलेगा — हालांकि यह पहले के 5.79 रुपये से घटा दिया गया है, यानी कुल भाव अब 71.86 रुपये से घटकर 68.86 रुपये प्रति लीटर रह गया है।
शुगर मिलों और निवेशकों पर असर
इस फैसले का सबसे सीधा असर चीनी मिलों पर पड़ेगा। कई मिलें अब तक बी-हैवी मोलेसिस से एथेनॉल बनाकर ज्यादा मार्जिन कमाती थीं, क्योंकि इससे चीनी का उत्पादन घटाकर एथेनॉल से बेहतर कमाई की जा सकती थी। अब उन्हें या तो सी-हैवी मोलेसिस पर निर्भर रहना होगा या मक्का व अनाज प्रसंस्करण के लिए नई मशीनरी में निवेश करना होगा। राहत के तौर पर सरकार ने मिलों को अनुमति दी है कि वे अक्टूबर 2026 में बनी चीनी को अक्टूबर और नवंबर — दोनों महीनों में बेच सकेंगी, जो उनके नियमित मासिक रिलीज कोटे के अलावा होगा।
हालांकि, इस रोक का मतलब एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का अंत नहीं है। भारत ने 2025 में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया था, और कार्यक्रम अब अनाज-आधारित फीडस्टॉक के सहारे आगे बढ़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह नीतिगत समायोजन खाद्य आपूर्ति की रक्षा के लिए लिया गया मौसमी कदम है, न कि ब्लेंडिंग लक्ष्य से पीछे हटना।

