मुख्य सामग्री पर जाएँ
मंगलवार, 29 सितम्बर 2026
PAHALI KHABAR
पहली खबर
ताजा हिंदी समाचार
ब्रेकिंग न्यूज़
सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर, कीमतों में आई भारी गिरावट, जानें नए रेट  |  2026 Renault Triber Turbo लॉन्च: 100 PS पावर और 180 Nm टॉर्क के साथ कीमत ₹7.84 लाख से शुरू  |  खाते में आएंगे एक साथ 18 लाख! मालामाल हो जाएंगे ये कर्मचारी, 8वें वेतन आयोग में बढ़ेगी सैलरी  |  उज्जैन शाही मस्जिद को लेकर बवाल, पथराव के बाद आंसू गैस और लाठीचार्ज  |  PM Awas Yojana Gramin List 2026: नाम नहीं आया? घबराएं नहीं—नई लिस्ट ऐसे देखें
Home / देश-दुनिया

तरुण तेजपाल को 10 साल की सजा: 13 साल बाद तहलका के पूर्व संपादक को मिला न्याय, बॉम्बे हाईकोर्ट ने पलटा बरी करने का फैसला

बॉम्बे हाईकोर्ट ने तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने गोवा ट्रायल कोर्ट का बरी करने वाला फैसला पलट दिया। तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।

तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट ने रेप मामले में दोषी ठहराया, 10 साल की सजा

तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराया

गोवा की एक लिफ्ट में 2013 में घटी एक घटना ने तहलका पत्रिका के तत्कालीन प्रधान संपादक तरुण तेजपाल के करियर और छवि को हमेशा के लिए बदल दिया था। लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई गुरुवार को एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई, जब बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने उन्हें दोषी करार देते हुए 10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुना दी। यह फैसला न सिर्फ पीड़िता के लिए बल्कि पूरे मीडिया जगत के लिए एक अहम संदेश माना जा रहा है।

गोवा ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा

मामले की जड़ों में जाएं तो 2021 में गोवा की सत्र अदालत ने तरुण तेजपाल को इसी मामले में बरी कर दिया था। उस फैसले से नाराज गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की और बरी किए जाने के आदेश को चुनौती दी। पांच साल तक चली सुनवाई के बाद अब हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को खारिज करते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया है। अदालत ने उन्हें आत्मसमर्पण करने और सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

62 वर्षीय तरुण तेजपाल पर IPC की धारा 376(2)(f) और 376(2)(k) के तहत दोषसिद्धि हुई है, जो किसी विश्वास या अधिकार के पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा किए गए बलात्कार से जुड़ी हैं। इसके साथ ही धारा 354, 354A और 354B के तहत भी सजा सुनाई गई है, जो मुख्य सजा के साथ-साथ ही चलेगी। कोर्ट ने मुख्य आरोपों के तहत पांच-पांच लाख रुपये, यानी कुल दस लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जो पीड़िता को दिया जाएगा।

गोवा के पांच सितारा होटल में हुई थी घटना

यह पूरा मामला नवंबर 2013 का है, जब तहलका पत्रिका गोवा में अपने वार्षिक थिंक सम्मेलन का आयोजन कर रही थी। इसी दौरान एक पांच सितारा होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल की एक जूनियर सहकर्मी ने उन पर यौन उत्पीड़न और बलात्कार का आरोप लगाया। घटना सामने आते ही गोवा पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज किया और तेजपाल को गिरफ्तार कर लिया गया था। तब से लेकर आज तक यह मामला अदालतों में उलझा रहा।


🔥 Pahali Khabar : ख़ास ख़बरें


MUST READ



विशेष विश्लेषण

2047 तक आरक्षण मुक्त भारत: क्या है पूरा रोडमैप और मुख्य बिंदु? →



बड़ी कार्रवाई

मेटा इंडिया प्रमुख पर FIR: PM मोदी वीडियो मामले में बड़ी कार्रवाई →

 


🌐 देश-दुनिया की और भी ख़बरें पढ़ें


यहाँ क्लिक करें

 

सॉलिसिटर जनरल की दलील बनी अहम आधार

सुनवाई के दौरान भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गोवा सरकार का पक्ष रखते हुए अदालत से अधिकतम सजा देने की मांग की। उन्होंने कोर्ट में कहा कि अब समय आ गया है कि राज्य की सर्वोच्च संवैधानिक अदालत सख्त फैसला सुनाए, क्योंकि जब कोई लड़की मना करती है तो उसका मतलब सिर्फ मना ही होता है, चाहे सामने वाला व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। मेहता ने इसे किसी गलतफहमी या मजाक की श्रेणी में रखे जाने से भी इनकार किया और कहा कि पीड़िता के लगातार विरोध और इनकार के बावजूद आरोपी का रवैया बेहद दुस्साहसिक रहा। उन्होंने इस फैसले को समाज के लिए एक कड़ा और निवारक संदेश बताया।

वहीं दूसरी ओर, तरुण तेजपाल ने अदालत में खुद अपना पक्ष रखते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने दावा किया कि उनके पक्ष में इतने सबूत मौजूद हैं कि उन्हें दस बार भी बरी किया जा सकता था। हालांकि अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को ज्यादा वजनदार माना। गोवा सरकार ने अपनी अपील में यह भी तर्क दिया था कि पीड़िता एक भरोसेमंद और मजबूत गवाह साबित हुई, और घटना के बाद तेजपाल की ओर से भेजा गया माफीनामा संदेश ही उनके अपराध का सबसे बड़ा सबूत था।

मामले को क्यों माना जा रहा है अहम

यह फैसला भारत में #MeToo आंदोलन से जुड़े सबसे बड़े और चर्चित मामलों में से एक माना जा रहा है। मीडिया जगत में एक वरिष्ठ पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा अपने ही अधीनस्थ कर्मचारी के साथ की गई इस कथित घटना ने उस दौर में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और सत्ता के दुरुपयोग जैसे सवालों को गहराई से उठाया था। लगभग 13 साल तक चली इस कानूनी लड़ाई के बाद आया यह फैसला यह संकेत देता है कि न्यायपालिका ऐसे मामलों में देर से ही सही, लेकिन निर्णायक कदम उठाने से पीछे नहीं हटती।

तरुण तेजपाल दोषी करार आगे क्या होगा

तरुण तेजपाल के पास अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प मौजूद है, और हाईकोर्ट ने इसके लिए उन्हें दो हफ्ते का समय भी दिया है। देखना यह होगा कि क्या शीर्ष अदालत इस फैसले को बरकरार रखती है या इसमें कोई बदलाव करती है। फिलहाल के लिए, यह फैसला पीड़िता और उसके परिवार के लिए एक लंबे इंतजार के बाद मिली राहत की तरह है, जिन्होंने बरसों तक न्याय की उम्मीद नहीं छोड़ी।

तेरह साल पुराना यह मामला भारतीय न्याय व्यवस्था की धीमी लेकिन दृढ़ प्रक्रिया की एक मिसाल बनकर सामने आया है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट में यह लड़ाई किस दिशा में आगे बढ़ती है।

लेखक

Rakesh Kumar

नमस्कार, मैं राकेश कुमार हूँ। PAHALI KHABAR के माध्यम से मैं आपके लिए ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, खेल और अन्य महत्वपूर्ण खबरें लेकर आता हूँ। मेरा उद्देश्य है कि आपको हर खबर सरल भाषा में, सही तथ्यों के साथ और समय पर मिले।

और खबरें पढ़ें ›