प्रमुख बातें
- भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.0 दर्ज की गई।
- भूकंप गुरुवार, 22 अक्टूबर की रात तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में आया।
- अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार केंद्र मारू टाउनशिप, बाछेन काउंटी के पास जमीन से महज 10 किमी नीचे था; भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) ने गहराई 173 किमी बताई है।
- अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि, 32 से अधिक घायल, 300 से अधिक मकान पूरी तरह ढह गए।
- चीन ने लेवल-2 भूकंप आपदा प्रतिक्रिया लागू कर दी है; राहत-बचाव दल युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं।
तिब्बत की वादियों में गुरुवार की रात अचानक धरती डोल उठी। रिक्टर स्केल पर 7.0 तीव्रता के इस शक्तिशाली भूकंप ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। मिनटों के भीतर पत्थरों के बने घर ताश के पत्तों की तरह ढह गए और धूल के बादलों ने पहाड़ी गांवों को ढक लिया। चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से आई शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 32 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
कहां था भूकंप का केंद्र?
तिब्बत भूकंप के केंद्र को लेकर दो बड़ी एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर सामने आया है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र तिब्बत के दुर्गम पहाड़ी इलाके में स्थित मारू टाउनशिप, बाछेन काउंटी के पास था — नागचू से करीब 190 किलोमीटर पूर्व-उत्तरपूर्व और राजधानी ल्हासा से लगभग 390 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में। USGS के मुताबिक केंद्र जमीन से महज 10 किलोमीटर की गहराई पर था, जिससे झटके बेहद तीव्र महसूस हुए।
वहीं भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) ने भूकंप की गहराई करीब 173 किलोमीटर दर्ज की है और समय रात लगभग 8:03 बजे बताया है। गहराई के इन अलग-अलग आंकड़ों को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम वैज्ञानिक समीक्षा के बाद ही केंद्र और गहराई का अंतिम मान तय होगा।
मारू टाउनशिप के उप प्रमुख ल्हावांग दागपो ने मीडिया को बताया कि टाउनशिप कार्यालय की मजबूत दीवारें भी इस झटके को नहीं झेल पाईं और उनमें बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं।
राहत-बचाव अभियान जारी
चीन ने इस आपदा के बाद लेवल-2 भूकंप आपदा प्रतिक्रिया लागू कर दी है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव दल युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। सड़कों के क्षतिग्रस्त होने और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के कारण कई गांवों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। अधिकारियों के अनुसार, मलबे में फंसे लोगों को निकालने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम प्राथमिकता पर चल रहा है।
पहले भी आफत झेल चुका है यह इलाका
यह भूकंप ऐसे समय आया है जब यह क्षेत्र पिछली आपदाओं से उबरने की कोशिश ही कर रहा था। 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के बड़े हिमस्खलन से आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई थी। नेपाल में इस आपदा में कम से कम 1,455 लोगों की मौत हुई और 5,285 लोग लापता बताए गए। तिब्बत की ओर चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार 43 लोगों की मौत और 500 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई थी।
इसके अलावा 3 सितंबर को भी तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था, और जनवरी 2025 में 6.8 तीव्रता के बड़े भूकंप में 120 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान, तेजी से पिघलते ग्लेशियर और लगातार बढ़ रही चरम मौसमी घटनाएं चिंगहाई-तिब्बत पठार में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को और बढ़ा सकती हैं।
क्यों कांपता है हिमालय क्षेत्र?
धरती के भीतर टेक्टोनिक प्लेटें लगातार खिसकती रहती हैं। भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे धंस रही है, और इसी टक्कर से हिमालय क्षेत्र भूकंप के लिए दुनिया के सबसे संवेदनशील इलाकों में गिना जाता है। जब प्लेटों की टक्कर से ज्यादा ऊर्जा निकलती है तो धरती की सतह पर कंपन पैदा होता है — यही भूकंप है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यही कारण है कि तिब्बत-हिमालय बेल्ट में बार-बार तेज झटके महसूस होते हैं।
आगे क्या?
बचाव दल अभी भी मलबे की सफाई और लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। मृतकों की संख्या में बदलाव संभव है, क्योंकि कई दूरदराज गांवों से अब भी पूरी जानकारी आना बाकी है। तिब्बत भूकंप से जुड़ी हर ताजा जानकारी के लिए पहिली खबर से जुड़े रहें।

स्रोत: भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की रिपोर्ट और USGS आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट; मौत और घायलों के आंकड़े उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित हैं — इनमें बदलाव संभव है।
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