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“बोलना भी मुश्किल हो जाता था”: तलाक के बाद शराब की लत से जूझे चहल, 26 दिन रिहैब में बिताकर की वापसी

तलाक के बाद शराब की लत और पैनिक अटैक से जूझे युजवेंद्र चहल ने 26 दिन रिहैब सेंटर में बिताए। आकाश चोपड़ा के पॉडकास्ट में चहल ने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर और वापसी की कहानी साझा की।

युजवेंद्र चहल रिहैब के बाद क्रिकेट में वापसी — सूर्योदय पर खाली स्टेडियम का प्रतीकात्मक दृश्य (प्रतीकात्मक फोटो)

युजवेंद्र चहल क्रिकेट वापसी 2026 (प्रतीकात्मक फोटो)

मैदान पर अपनी फिरकी से बल्लेबाजों को छकाने वाले युजवेंद्र चहल ने पहली बार अपने युजवेंद्र चहल रिहैब अनुभव के बारे में खुलकर बात की है — उस दौर के बारे में जब गेंद उनके हाथ में नहीं, बल्कि उनकी अपनी जिंदगी उनके काबू से बाहर होती जा रही थी। पूर्व भारतीय क्रिकेटर आकाश चोपड़ा के पॉडकास्ट में चहल ने बताया कि तलाक के बाद उनकी शराब पीने की आदत हद से ज्यादा बढ़ गई थी, और इस दलदल से निकलने के लिए उन्होंने रिहैब सेंटर में 26 दिन बिताए।

युजवेंद्र चहल रिहैब के बाद क्रिकेट में वापसी — सूर्योदय पर खाली स्टेडियम का प्रतीकात्मक दृश्य (प्रतीकात्मक फोटो)
युजवेंद्र चहल क्रिकेट वापसी 2026 (प्रतीकात्मक फोटो)

जब पार्टी की आदत लत में बदल गई

चहल ने पॉडकास्ट में ईमानदारी से स्वीकार किया कि शुरुआत में शराब पीना दोस्तों के साथ पार्टियों तक सीमित था। 2011 में उन्होंने अपना पहला आईपीएल खेला था — तब वह काफी युवा थे। चहल ने याद किया कि एक बार एबी डिविलियर्स ने उनसे कहा था कि जिंदगी में संतुलन बहुत जरूरी है। सुनने में यह बात आसान लगती है, लेकिन अमल करना उतना ही मुश्किल।

धनश्री वर्मा से तलाक के बाद हालात बिगड़ते चले गए। चहल के मुताबिक शराब की आदत हद से बाहर हो गई और उनकी मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं रही। एक पब्लिक फिगर होने के नाते उनकी निजी जिंदगी का हर उतार-चढ़ाव सुर्खियां बनता रहा, और इसका असर उनके खेल पर भी पड़ने लगा।

पैनिक अटैक का वह खौफनाक दौर

सबसे ज्यादा झकझोरने वाला खुलासा पैनिक अटैक को लेकर था। चहल ने बताया कि इस दौरान उनकी दिल की धड़कनें तेज हो जाती थीं, चेहरा सिकुड़ जाता था और होंठ एक तरफ खिंच जाते थे। कई बार उनके लिए बोलना भी मुश्किल हो जाता था। आसपास मौजूद लोगों को उनकी हालत देखकर ही अंदाजा हो जाता था कि कुछ ठीक नहीं है।

चहल ने कहा कि चिंता और मानसिक दबाव किसी इंसान को किस हद तक प्रभावित कर सकते हैं, इसका एहसास उन्हें इसी दौर में हुआ। यह सिर्फ निजी जिंदगी की परेशानी नहीं थी — इसका असर क्रिकेट पर भी पड़ रहा था। उस साल उन्होंने सिर्फ दो व्हाइट-बॉल मैच खेले और फिर टी20 नहीं खेले, क्योंकि उनका मानसिक स्तर ठीक नहीं था। वह पूरी तरह तैयार नहीं थे और नहीं चाहते थे कि उनकी वजह से टीम को नुकसान हो।

युजवेंद्र चहल रिहैब: वह फैसला जिसने जिंदगी बदल दी

टर्निंग पॉइंट तब आया जब चहल को एहसास हुआ कि अगर उन्होंने अपनी आदतों पर काबू नहीं पाया तो इसका असर उस चीज पर पड़ेगा जिससे उन्हें सबसे ज्यादा प्यार है — क्रिकेट। चहल ने कहा कि वह कब तक इस बोझ को ढोते रहेंगे।

पिछले साल काउंटी क्रिकेट के सीजन के बाद उन्होंने रिहैब सेंटर में भर्ती होने का फैसला किया और वहां 26 दिन बिताए। चहल के मुताबिक इस फैसले से उनकी निजी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। उनकी भावनाओं को संभालने की क्षमता बेहतर हुई और वह अपने जीवन को ज्यादा संतुलित नजरिए से देखने लगे। शराब को उन्होंने पूरी तरह छोड़ दिया।

मुश्किल समय में साथ देने के लिए चहल ने अपने दोस्तों और परिवार का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि निजी जिंदगी की परेशानियों के दौरान उनके करीबी लोग उनके साथ खड़े रहे।

नई शुरुआत का एहसास

युजवेंद्र चहल रिहैब से लौटने के बाद का अनुभव चहल ने बेहद सकारात्मक शब्दों में बयां किया। उन्होंने कहा कि पिछले आईपीएल के दौरान उन्हें ऐसा लगा जैसे वह फिर से 30 साल के हो गए हैं — जिम में वर्कआउट करना, फील्डिंग की प्रैक्टिस करना और सही तरीके से ट्रेनिंग करना। उनकी समझदारी बढ़ी है और भावनाएं अब संतुलित हैं।

चहल ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने कोच से बात करके ब्रेक मांगा था और उन्हें पूरा साथ मिला। आज वह पहले से कहीं ज्यादा खुश हैं और बेहतर स्थिति में हैं।

एक जरूरी संदेश

चहल की यह कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर के निजी संघर्ष की कहानी नहीं है। यह उस सच्चाई की तरफ भी इशारा करती है कि मेंटल हेल्थ की परेशानियां किसी को भी हो सकती हैं — चाहे वह मैदान का सितारा ही क्यों न हो। और सबसे अहम बात यह है कि मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि वापसी की पहली सीढ़ी है। चहल ने यह साबित किया है कि सही समय पर सही फैसला जिंदगी की दिशा बदल सकता है।

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लेखक

Rakesh Kumar

नमस्कार, मैं राकेश कुमार हूँ। PAHALI KHABAR के माध्यम से मैं आपके लिए ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, खेल और अन्य महत्वपूर्ण खबरें लेकर आता हूँ। मेरा उद्देश्य है कि आपको हर खबर सरल भाषा में, सही तथ्यों के साथ और समय पर मिले।

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