तिरंगा मार्च दिल्ली आज शाम राजधानी के केंद्र में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है। “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने नागरिकों से अपील की है कि वे शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में राष्ट्रीय ध्वज लेकर इकट्ठा हों। पार्टी का कहना है कि यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने क्षेत्र में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं।
मुख्य बिंदु: CJP ने 16 अक्टूबर शाम 5 बजे सेंट्रल पार्क, कनॉट प्लेस में तिरंगा लेकर शांतिपूर्ण इकट्ठा होने का आह्वान किया; NDMC ने “प्रशासनिक कारणों” से सेंट्रल पार्क 16-17 अक्टूबर तक बंद किया; दिल्ली पुलिस ने BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किया और 30,000 से अधिक जवान तैनात; पुलिस चुनिंदा करीब 11 लोगों को तिरंगा लेकर राष्ट्रीय गान गाने की अनुमति देने पर विचार कर सकती है; CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया; सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग के SIR से जुड़ी याचिकाओं पर नोटिस जारी किए।

तिरंगा मार्च दिल्ली का आह्वान क्यों?
CJP का कहना है कि यह आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण और नागरिक-नेतृत्व वाला होगा। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने लोगों से अपील की है कि वे हाथ में तिरंगा लेकर सेंट्रल पार्क पहुंचें और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर अपनी चिंताएं शांतिपूर्ण तरीके से जाहिर करें। पार्टी की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की है। दीपके ने आशंका जताई है कि मार्च से पहले रात या सुबह उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी अपने समर्थकों से इस आयोजन में शामिल होने की अपील की है। पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग की मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर चल रहा विवाद है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दल इस प्रक्रिया और कथित मतदाता हटाने के आरोपों को चुनौती दे रहे हैं।
तिरंगा मार्च दिल्ली पर प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
नगर निगम (NDMC) ने 15 अक्टूबर को घोषणा की कि सेंट्रल पार्क 16 और 17 अक्टूबर को “प्रशासनिक कारणों” से जनता के लिए बंद रहेगा। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिया। सुरक्षा के लिहाज से 30,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है और 21 सड़कों के लिए यातायात परामर्श जारी किया गया है। व्यापारिक संगठनों ने त्योहारी सीजन में कारोबार पर असर की चिंता जताई है। पुलिस का कहना है कि भीड़ जुटने से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है, इसलिए एहतियातन यह कार्रवाई जरूरी है।
कानूनी पृष्ठभूमि क्या है?
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के खिलाफ चल रहे विपक्षी अभियान से जुड़ी याचिकाओं पर नोटिस जारी किए। उधर, दिल्ली हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है, जिसमें तिरंगा मार्च दिल्ली के आयोजन को रोकने की मांग की गई है — यह याचिका पालिका बाजार के एक फेरीवाले ने दायर की है। इससे पहले CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद उन्हें 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
तिरंगा मार्च दिल्ली के बाद आगे क्या होगा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि शाम 5 बजे का आयोजन किस रूप में सामने आएगा। पुलिस की ओर से सिर्फ चुनिंदा लोगों को अनुमति देने का विकल्प सामने आया है, जबकि पार्टी बड़े पैमाने पर नागरिकों के जुटने की उम्मीद कर रही है। यह मामला चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता, विरोध के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन जैसे बुनियादी सवालों को सामने लाता है। तिरंगा मार्च दिल्ली से जुड़े अदालतों में चल रहे मामलों और प्रशासन के अगले फैसलों पर सभी की नजर रहेगी।
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