मुख्य सामग्री पर जाएँ
बुधवार, 21 अक्टूबर 2026
पहली खबर
पहलीखबर
ताजा हिंदी समाचार
ब्रेकिंग न्यूज़
आपके नाम पर कितनी SIM चल रही हैं? 2 मिनट में ऐसे करें चेक  |  जुबिन नौटियाल के पिता BJP छोड़ कांग्रेस में शामिल: ‘सम्मान से बढ़कर कुछ नहीं’  |  आज जामनगर में मिलेंगे रुबियो-अंबानी: वेनेजुएला तेल पर क्यों टिकी अमेरिका की नजर?  |  भारत में एंट्री लेंगी 2 नई कार कंपनियां, लॉन्च होंगी ये 5 धांसू SUVs  |  टाइगर श्रॉफ फायरिंग में चौथी गिरफ्तारी, अमेरिका से लाइव थी कमांड
Home / स्वास्थ्य

Dengue Cases in India 2025: लक्षण, बचाव और जरूरी सावधानियां

Dengue ka kahar

2025 में भारत में डेंगू के मामले देश के अलग-अलग हिस्सों में सामने आए। डेंगू एक मच्छर से फैलने वाली वायरल बीमारी है, जिसका संक्रमण गर्म और बारिश वाले मौसम में बढ़ सकता है। इसके सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी और त्वचा पर चकत्ते शामिल हैं।

राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र (NCVBDC) के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत में 29,509 डेंगू मामले और 2 मौतें दर्ज की गई थीं। राज्यवार आंकड़ों में कई राज्यों में डेंगू के मामले दर्ज हुए, इसलिए केवल कुछ राज्यों को पूरे देश की स्थिति का प्रतिनिधि मानना सही नहीं होगा।

डेंगू क्या है और कैसे फैलता है?

डेंगू एक वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से संक्रमित Aedes aegypti मच्छर के काटने से फैलता है। ये मच्छर दिन के समय भी सक्रिय रहते हैं।

घर के आसपास जमा साफ पानी, कूलर, गमले, टायर, पानी की टंकियां और दूसरे कंटेनर मच्छरों के प्रजनन की जगह बन सकते हैं। इसलिए डेंगू से बचाव में घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देना सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है।

Dengue Cases in India 2025: किन राज्यों में मामले सामने आए?

NCVBDC के राज्यवार आंकड़ों में 2025 के दौरान कई राज्यों में डेंगू संक्रमण दर्ज किया गया। उदाहरण के तौर पर:

  • महाराष्ट्र: 14,168 मामले और 24 मौतें
  • तमिलनाडु: 23,407 मामले और 12 मौतें
  • राजस्थान: 4,348 मामले और 3 मौतें
  • पंजाब: 4,981 मामले और 8 मौतें
  • आंध्र प्रदेश: 2,686 मामले और 5 मौतें
  • बिहार: 3,902 मामले और 2 मौतें

ये NCVBDC के 2025 के राज्यवार आंकड़े हैं। आंकड़ों को पढ़ते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि अलग-अलग राज्यों में रिपोर्टिंग और निगरानी की व्यवस्था अलग हो सकती है।

डेंगू के प्रमुख लक्षण क्या हैं?

डेंगू होने पर हर व्यक्ति में एक जैसे लक्षण दिखाई नहीं देते। WHO के अनुसार कई संक्रमित लोगों में लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं या बिल्कुल नहीं दिखाई दे सकते।

सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • तेज बुखार
  • तेज सिरदर्द
  • आंखों के पीछे दर्द
  • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
  • जी मिचलाना और उल्टी
  • त्वचा पर लाल चकत्ते
  • कमजोरी और थकान

आमतौर पर लक्षण संक्रमण के 4 से 10 दिन बाद दिखाई दे सकते हैं और 2 से 7 दिन तक रह सकते हैं।

यह भी पढ़ें: भारत की Health Tech Revolution: गांवों से शहरों तक कैसे बदल रहा इलाज?

डेंगू में कौन से संकेत गंभीर हो सकते हैं?

डेंगू में बुखार कम होना हमेशा ठीक होने का संकेत नहीं होता। WHO के अनुसार बीमारी के गंभीर चरण में कुछ चेतावनी संकेत सामने आ सकते हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • तेज पेट दर्द
  • लगातार उल्टी
  • तेजी से सांस लेना
  • मसूड़ों या नाक से खून आना
  • उल्टी या मल में खून
  • बहुत ज्यादा कमजोरी या बेचैनी
  • अत्यधिक प्यास
  • त्वचा का पीला, ठंडा या चिपचिपा होना

ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। गंभीर डेंगू में अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है।

डेंगू से बचने के 5 आसान उपाय

1. घर के आसपास पानी जमा न होने दें

कूलर, गमले, पुराने टायर, बाल्टी और दूसरे बर्तनों में जमा पानी नियमित रूप से साफ करें। पानी की टंकियों और कंटेनरों को ढककर रखें।

2. मच्छरों से बचाव करें

पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें और जरूरत के अनुसार मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट का इस्तेमाल करें। खिड़कियों पर स्क्रीन और सोते समय मच्छरदानी भी मददगार हो सकती है।

3. दिन में भी सावधानी रखें

डेंगू फैलाने वाले Aedes मच्छर दिन के समय भी काट सकते हैं। इसलिए केवल रात में मच्छरों से बचाव करना पर्याप्त नहीं है।

4. बुखार को नजरअंदाज न करें

लगातार तेज बुखार या डेंगू जैसे लक्षण होने पर डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर जरूरत के अनुसार जांच की सलाह दे सकते हैं।

5. दवा खुद से न लें

डेंगू के दौरान एस्पिरिन और इबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचना चाहिए, क्योंकि इनसे रक्तस्राव का जोखिम बढ़ सकता है। WHO के अनुसार बुखार और दर्द के लिए पैरासिटामोल का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन दवा डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेना बेहतर है।

क्या प्लेटलेट्स कम होना ही डेंगू की पहचान है?

यह मानना सही नहीं है कि हर डेंगू मरीज में प्लेटलेट्स की संख्या कम होना ही बीमारी की पहचान है।

डेंगू की पुष्टि के लिए डॉक्टर मरीज के लक्षण, बीमारी की अवधि और जरूरत के अनुसार प्रयोगशाला जांच का इस्तेमाल करते हैं। WHO के अनुसार डेंगू की जांच के लिए अलग-अलग प्रकार के टेस्ट उपलब्ध हैं और टेस्ट का चुनाव बीमारी के चरण तथा उपलब्ध सुविधाओं पर निर्भर करता है।

इसलिए केवल प्लेटलेट्स की संख्या देखकर डेंगू का इलाज या गंभीरता तय नहीं करनी चाहिए।

डेंगू का इलाज कैसे होता है?

डेंगू वायरस के लिए अभी कोई विशेष एंटीवायरल इलाज उपलब्ध नहीं है। ज्यादातर मामलों में आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ और लक्षणों के अनुसार उपचार किया जाता है।

WHO के अनुसार एस्पिरिन और इबुप्रोफेन जैसी NSAID दवाओं से बचना चाहिए क्योंकि उनसे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। गंभीर लक्षण आने पर अस्पताल में चिकित्सा देखभाल जरूरी हो सकती है।

डेंगू से बचाव में पूरी कॉलोनी की भूमिका

डेंगू केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं है। अगर एक घर में पानी जमा है और आसपास मच्छरों के प्रजनन की जगह बनी हुई है, तो पूरे इलाके में संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।

इसलिए घर के साथ-साथ आसपास की गलियों, खाली प्लॉट, पार्क और सार्वजनिक स्थानों पर भी पानी जमा होने से रोकना जरूरी है।

स्थानीय प्रशासन के सफाई और मच्छर नियंत्रण अभियानों के साथ आम लोगों की भागीदारी भी डेंगू नियंत्रण में मदद कर सकती है।

निष्कर्ष

Dengue Cases in India 2025 के आंकड़े बताते हैं कि डेंगू देश के कई हिस्सों में स्वास्थ्य संबंधी चुनौती बना रहा। इससे बचने के लिए मच्छरों के प्रजनन की जगह खत्म करना, मच्छर के काटने से बचना और लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

खास तौर पर तेज बुखार के बाद पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, खून आना या अत्यधिक कमजोरी जैसे संकेत दिखाई दें तो देरी नहीं करनी चाहिए।

FAQs

1. डेंगू कैसे फैलता है?
डेंगू संक्रमित Aedes मच्छर के काटने से फैलता है। ये मच्छर दिन में भी सक्रिय रहते हैं।

2. डेंगू के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, उल्टी और त्वचा पर चकत्ते सामान्य लक्षण हैं।

3. डेंगू में कौन सी दवा नहीं लेनी चाहिए?
WHO के अनुसार एस्पिरिन और इबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचना चाहिए, क्योंकि इनसे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है।

4. क्या डेंगू में प्लेटलेट्स कम होना जरूरी है?
नहीं। केवल प्लेटलेट्स की संख्या के आधार पर डेंगू की पुष्टि या गंभीरता तय नहीं की जानी चाहिए।

5. डेंगू से बचने का सबसे आसान तरीका क्या है?
मच्छरों के काटने से बचना और घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देना सबसे महत्वपूर्ण बचाव उपायों में शामिल है।

लेखक

Rakesh Kumar

नमस्कार, मैं राकेश कुमार हूँ। PAHALI KHABAR के माध्यम से मैं आपके लिए ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, खेल और अन्य महत्वपूर्ण खबरें लेकर आता हूँ। मेरा उद्देश्य है कि आपको हर खबर सरल भाषा में, सही तथ्यों के साथ और समय पर मिले।

और खबरें पढ़ें ›