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बिना रुके चार्ज होगी EV! Honda की नई तकनीक से सड़क ही बन गई चार्जर

Honda ने जापान की दो कंपनियों के साथ मिलकर ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे इलेक्ट्रिक वाहन हाईवे पर चलते-चलते वायरलेस चार्ज हो सकेंगे। 2027 से जापान में पब्लिक रोड पर टेस्ट शुरू होगा।

होंडा वायरलेस ईवी चार्जिंग तकनीक - चलते हुए इलेक्ट्रिक वाहन की प्रतीकात्मक तस्वीर

होंडा वायरलेस ईवी चार्जिंग तकनीक अब कल्पना नहीं रही। Honda R&D ने जापान की दो कंपनियों — Taisei Corporation और Taisei Rotec — के साथ मिलकर ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन हाईवे की रफ्तार पर चलते-चलते वायरलेस चार्ज हो सकेंगे। यानी न चार्जिंग स्टेशन पर रुकने की जरूरत, न केबल लगाने का झंझट। सोचिए — आपकी गाड़ी सड़क पर दौड़ रही है और साथ-साथ उसकी बैटरी भी चार्ज हो रही है!

होंडा वायरलेस ईवी चार्जिंग तकनीक - चलते हुए इलेक्ट्रिक वाहन की प्रतीकात्मक तस्वीर
होंडा वायरलेस ईवी चार्जिंग टेक्नोलॉजी 2027 (प्रतीकात्मक फोटो)

यह तकनीक आखिर है क्या?

Honda इसे Dynamic Wireless Power Transfer (DWPT) कहती है। इसका आधार है चुंबकीय-क्षेत्र युग्मन (magnetic-field coupling) — वही सिद्धांत जिस पर स्मार्टफोन की वायरलेस चार्जिंग काम करती है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां चुनौती कहीं ज्यादा बड़ी है: एक चलती हुई गाड़ी, सड़क और गाड़ी के बीच ज्यादा दूरी, और हाई-पावर ट्रांसफर।

सिस्टम के तीन हिस्से — आसान भाषा में समझें

1. जमीन पर DC पावर सप्लाई: सबसे पहले बिजली को सड़क तक पहुंचाना होगा। इसके लिए Taisei Corporation ने एक DC पावर सप्लाई सिस्टम बनाया है, जो सड़क के नीचे लगे चार्जिंग उपकरणों को बिजली देगा।

2. सड़क में धंसे चार्जिंग यूनिट: सड़क की सतह के नीचे खास Ground Assembly यूनिट लगाए जाएंगे। Honda ने ऐसा यूनिट विकसित किया है जिसमें इन्वर्टर और कॉइल एक ही इकाई में एकीकृत हैं — कंपनी के मुताबिक सितंबर 2026 तक यह अपनी तरह का पहला सार्वजनिक रूप से घोषित डिज़ाइन था।

3. गाड़ी में लगा रिसीवर: EV के नीचे एक Vehicle Assembly यूनिट लगा होगा। जैसे ही गाड़ी चार्जिंग सेक्शन के ऊपर से गुजरेगी, सड़क और गाड़ी के बीच चुंबकीय युग्मन से बिजली बिना किसी केबल के बैटरी में पहुंच जाएगी। ड्राइवर को कुछ नहीं करना — न रुकना, न प्लग लगाना।

कितनी पावर मिलेगी और कब शुरू होगा टेस्ट?

कंपनियों का लक्ष्य बड़े कमर्शियल वाहनों के लिए 150 kW तक का पावर ट्रांसफर हासिल करना है। पूरा सिस्टम एक्सप्रेसवे की अधिकतम रफ्तार और 20 टन तक के भारी वाहनों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है।

2026 के अंत तक Taisei के T-FIELD/Tamra परिसर में एक टेस्ट रोड बनाई जाएगी, जहां 10 लाख व्हील-लोड के बराबर टिकाऊपन, चार्जिंग परफॉर्मेंस और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सुरक्षा की जांच होगी। इसके बाद अप्रैल 2027 से — जापान के नए वित्त वर्ष की शुरुआत से — चिबा के Tateyama Expressway पर NEXCO East के साथ पब्लिक-रोड डेमो शुरू होगा।

यह तकनीक क्यों है गेम-चेंजर?

इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की दो सबसे बड़ी बाधाएं हैं — रेंज एंग्जायटी (बैटरी खत्म होने का डर) और लंबा चार्जिंग टाइम। चलते-चलते चार्जिंग से लंबी दूरी के सफर में रुकने की जरूरत ही खत्म हो जाएगी। इतना ही नहीं, लगातार चार्जिंग मिलने से गाड़ियों में छोटी बैटरियां लगाई जा सकेंगी — यानी हल्की और सस्ती EVs।

Honda का शुरुआती फोकस लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर है, जहां ट्रकों को बार-बार चार्जिंग स्टॉप की जरूरत पड़ती है। यह तकनीक कंपनी के 2050 तक कार्बन न्यूट्रैलिटी के लक्ष्य का भी हिस्सा है। इस पर शोध 2021 से चल रहा है, और Taisei के साथ संयुक्त शोध 2025 में शुरू हुआ था।

चुनौतियां भी कम नहीं हैं

लागत सबसे बड़ी दीवार: मौजूदा सड़कों को खोदकर उनके नीचे उपकरण लगाने होंगे — यह बेहद महंगा काम है। इसीलिए कंपनियां ट्रैफिक वॉल्यूम के हिसाब से चुनिंदा सड़क खंडों पर इसे लगाने की सोच रही हैं।

चुंबकीय क्षेत्र का रिसाव: भटके हुए मैग्नेटिक फील्ड को रोकना अभी बाकी है — यह सुरक्षा की अहम शर्त है।

टिकाऊपन: सड़क के नीचे दबे यूनिट को सालों तक भारी ट्रकों का भार झेलना होगा।

दुनिया में और कौन कर रहा है यह काम?

Honda इस दौड़ में अकेली नहीं है। 2017 में Qualcomm ने फ्रांस में ‘Halo’ नाम से प्रोटोटाइप दिखाया था, लेकिन 2019 में उसने प्रोजेक्ट बेच दिया। 2022 में Stellantis ने इटली के Arena del Futuro ट्रैक पर Fiat 500 EV को हाईवे स्पीड पर बैटरी खर्च किए बिना चलाकर दिखाया। 2023 में डेट्रॉयट में Electreon के कॉइल वाली सड़क खुली, और अक्टूबर 2025 में फ्रांस के A10 हाईवे के 1.5 किमी हिस्से में चार प्रोटोटाइप गाड़ियों का लाइव ट्रैफिक टेस्ट हुआ।

भारत के लिए क्या मतलब?

भारत में EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी शुरुआती दौर में है। अगर यह तकनीक व्यावहारिक और सस्ती होती है, तो भविष्य में भारतीय हाईवे पर भी “चार्जिंग लेन” की कल्पना की जा सकती है। फिलहाल यह जापान के टेस्ट ट्रैक तक सीमित है, लेकिन दिशा साफ है — भविष्य की सड़कें सिर्फ चलने के लिए नहीं, चार्ज करने के लिए भी होंगी।

लेखक

Rakesh Kumar

नमस्कार, मैं राकेश कुमार हूँ। PAHALI KHABAR के माध्यम से मैं आपके लिए ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, खेल और अन्य महत्वपूर्ण खबरें लेकर आता हूँ। मेरा उद्देश्य है कि आपको हर खबर सरल भाषा में, सही तथ्यों के साथ और समय पर मिले।

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