भारत अमेरिका ट्रेड डील को लेकर बुधवार को सबसे बड़ा बयान सामने आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते का करीब 99% काम पूरा हो चुका है, और अब इसे अंतिम रूप देने में महीनों नहीं, बल्कि सिर्फ कुछ हफ्तों का समय लग सकता है।

मुख्य बिंदु
- रुबियो ने द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा — भारत अमेरिका ट्रेड डील का 99% काम पूरा, बाकी सिर्फ शब्दों की बारीकी
- ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा — भारत समझौता करना चाहता है, दोनों देश बेहद करीब
- डेढ़ साल से जारी बातचीत अब अंतिम चरण में; डेयरी जैसे कुछ मुद्दे अभी बाकी
रुबियो ने इंटरव्यू में क्या कहा?
भारत की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान रुबियो ने द इंडियन एक्सप्रेस को एक विशेष इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने भारत अमेरिका ट्रेड डील की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से बात की।
उनके मुताबिक, बातचीत पिछले डेढ़ साल से ज्यादा समय से चल रही है और अब जो मतभेद बचे हैं, वे मुख्य रूप से समझौते के शब्दों और वाक्यांशों के अर्थ से जुड़े हैं। उन्होंने इन्हें सिर्फ “तकनीकी मुद्दे” कहने से परहेज किया और कहा कि किसी भी घोषणा से पहले यह जरूरी है कि दोनों देश समझौते की शर्तों को एक ही अर्थ में समझें और उन पर पूरी तरह सहमत हों।
रुबियो ने नेटवर्क18 के प्रधान संपादक राहुल जोशी को दिए एक अन्य इंटरव्यू में भी यही दोहराया कि समझौता कुछ हफ्तों में पूरा हो सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी टैरिफ और वीजा प्रतिबंध भारत को निशाना बनाकर नहीं लगाए गए हैं।
ट्रंप का बयान: “दोनों देश बेहद करीब”
मंगलवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भारत के साथ व्यापार समझौते को लेकर सवाल पूछा गया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि भारत समझौता करना चाहता है और दोनों देश इसे पूरा करने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि भारत के साथ होने वाला व्यापार समझौता पहले की अपेक्षा से कुछ अलग स्वरूप का हो सकता है, हालांकि उन्होंने शर्तों में किस तरह के बदलाव हो सकते हैं, इस पर विस्तार नहीं दिया। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अंतिम समझौते में दोनों देशों के लिए क्या प्रावधान तय होते हैं।
रूस से तेल खरीद पर क्या बोले रुबियो?
इंटरव्यू में रुबियो ने रूस से तेल खरीद, चीन के साथ व्यापारिक तनाव, पाकिस्तान के साथ अमेरिकी रिश्तों और ऊर्जा सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने भारत के साथ संबंधों को सकारात्मक बताया और कहा कि व्यापार समझौते को आगे बढ़ाना अमेरिकी विदेश नीति की प्राथमिकताओं में शामिल है।
अब तक की बातचीत कहां पहुंची?
फरवरी में घोषित फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया था और रूसी तेल खरीद से जुड़ी अतिरिक्त 25% ड्यूटी हटा दी थी। बदले में भारत ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कृषि उत्पादों — जिनमें ट्री नट्स, फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट शामिल हैं — पर टैरिफ घटाने की प्रतिबद्धता जताई थी।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि समझौते का पहला चरण अंतिम रूप से तय हो चुका है और उसकी कानूनी ड्राफ्टिंग चल रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बातचीत को “लैंडिंग पॉइंट” के करीब बताया था। हालांकि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने 2 अक्टूबर को कहा था कि समझौता निकट भविष्य में नहीं है।
डेयरी सेक्टर से जुड़ा मुद्दा अभी भी बातचीत की एक बड़ी अड़चन माना जा रहा है।
भारत के लिए क्या मायने?
समझौता होने पर भारतीय निर्यातकों — खासकर कपड़ा, दवाइयों, तकनीक और अन्य उत्पादों के कारोबार — को अमेरिकी बाजार में नए अवसर मिल सकते हैं। सितंबर 2026 में भारत का माल निर्यात 23% बढ़कर 44.4 अरब डॉलर पहुंच चुका है, और व्यापार घाटा घटकर 30.21 अरब डॉलर रह गया है। कम और अनुमानित अमेरिकी टैरिफ से निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी।
आगे क्या होगा?
रुबियो का आकलन है कि औपचारिक हस्ताक्षर में हफ्ते लग सकते हैं, महीने नहीं। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह उनका आकलन है — अंतिम हस्ताक्षर या औपचारिक घोषणा अभी बाकी है। ऊर्जा, रक्षा, तकनीक और व्यापार से जुड़े मुद्दे बातचीत में अहम बने हुए हैं। अगले कुछ हफ्तों में इस पर सबकी नजर रहेगी।

