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ट्रंप ने भारत पर 100% टैरिफ का फैसला टाला: ग्रैहम कानून के तहत छूट, लेकिन GTRI की चेतावनी — ‘अस्थायी राहत, स्थायी गारंटी नहीं’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 अक्टूबर की समयसीमा से ठीक पहले ग्रैहम कानून के तहत 100% टैरिफ और प्रतिबंधों से भारत समेत 5 देशों को छूट दे दी — भारत को ऊर्जा सुरक्षा और निर्यात दोनों मोर्चों पर राहत। लेकिन थिंक टैंक GTRI ने चेताया: यह अस्थायी राहत है, स्थायी गारंटी नहीं।

ट्रंप टैरिफ छूट भारत — भारत-अमेरिका व्यापार का प्रतीकात्मक चित्र

ट्रंप टैरिफ छूट भारत को: समयसीमा से ठीक पहले लिया गया फैसला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 अक्टूबर की समयसीमा से ठीक पहले एक ऐसा फैसला लिया, जिससे नई दिल्ली ने राहत की सांस ली है। ट्रंप ने शुक्रवार रात एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर कर ‘लिंडसे ओ. ग्रैहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ के तहत निर्धारित प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों को लागू करने से भारत समेत पांच देशों को छूट दे दी।

इस कानून के तहत रूस से कच्चा तेल या गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों — भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान — से आने वाली वस्तुओं पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार ट्रंप को मिला था। अब यह फैसला फिलहाल टल गया है। लेकिन क्या यह राहत स्थायी है? आइए विस्तार से समझते हैं।

ट्रंप टैरिफ छूट भारत — व्यापार कूटनीति का प्रतीकात्मक चित्र
ट्रंप टैरिफ छूट भारत रूस तेल अक्टूबर 2026 (प्रतीकात्मक फोटो)

सवाल-जवाब: इस फैसले का पूरा मतलब

आखिर हुआ क्या?

अमेरिकी कांग्रेस ने 16 सितंबर को ग्रैहम अधिनियम पारित किया था, जिसके तहत 18 अक्टूबर से रूस से तेल-गैस खरीदने वाले पांच देशों पर कड़े प्रतिबंध और 100% तक टैरिफ लगने थे। ट्रंप ने समयसीमा से पहले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी कर इन प्रतिबंधों से छूट दे दी। अपने आदेश में ट्रंप ने कहा कि इस समय यह छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।

भारत को इससे क्या-क्या फायदा होगा?

पहला — ऊर्जा सुरक्षा बची: भारत रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रख सकेगा। अगस्त में भारतीय तेल आयात में रूस का हिस्सा 44 फीसदी था। यह छूट घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाएगी।

दूसरा — निर्यातकों को राहत: कानून लागू होता तो अमेरिका जाने वाले भारतीय सामानों पर 100 फीसदी तक दंडात्मक टैरिफ लग सकता था। इस फैसले ने भारतीय निर्यातकों को संभावित भारी नुकसान से बचा लिया है। साथ ही, भारत और अमेरिका के बीच जारी द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के पटरी से उतरने का जोखिम भी खत्म हो गया है।

ट्रंप ने यह फैसला क्यों लिया?

रिपोर्टों के मुताबिक, यह कदम रूस के साथ अमेरिका और वैश्विक बाजारों के लिए डीजल की सप्लाई को लेकर हुए समझौते के कुछ दिन बाद उठाया गया है। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से पहले डीजल की बढ़ती कीमतों ने ट्रंप प्रशासन पर दबाव बना रखा था। खुद अमेरिका ने रूस से डीजल खरीद का समझौता किया है — ऐसे में वह भारत को रूस से तेल खरीदने से रोकने की स्थिति में नहीं था।

हालांकि, अमेरिकी सांसद रिचर्ड ब्लूमेंथल ने इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि इन छूटों का मकसद व्लादिमीर पुतिन को खुश करना है।

क्या यह राहत स्थायी है? — GTRI ने क्या चेताया

थिंक टैंक GTRI ने शनिवार को कहा कि ट्रंप की यह छूट भारत को केवल अस्थायी राहत दे सकती है, लेकिन इससे कोई स्थायी निश्चितता नहीं मिलेगी। GTRI के मुताबिक:

  • इस कानून में वाशिंगटन ने टैरिफ को फिर से लागू करने का अधिकार सुरक्षित रखा है।
  • इस छूट की कोई निश्चित समाप्ति तारीख नहीं है और इसे कभी भी वापस लिया जा सकता है।
  • अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रूसी ऊर्जा की खरीद पर निगरानी जारी रखेंगे, जिससे प्रशासन को जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टैरिफ फिर से लगाने का मौका मिल सकता है।

GTRI ने सुझाव दिया है कि नई दिल्ली को अपनी ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा करनी चाहिए और वाणिज्यिक शर्तों पर तेल खरीदना जारी रखना चाहिए।

रुबियो की भारत यात्रा से ठीक पहले का फैसला

यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 18 से 22 अक्टूबर तक भारत यात्रा पर हैं। अब दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और ऊर्जा साझेदारी पर बातचीत सकारात्मक माहौल में होगी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पिछले महीने न्यूयॉर्क में रुबियो से मुलाकात में इस अधिनियम पर चिंता जताई थी।

आगे क्या देखें?

संक्षेप में — भारत को दोहरी संजीवनी मिली है: सस्ते रूसी तेल की बेरोकटोक खरीद जारी रहेगी और अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात पर 100 फीसदी टैरिफ का खतरा टल गया है। लेकिन GTRI की चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता — यह छूट कभी भी वापस ली जा सकती है। आने वाले हफ्तों में रुबियो की यात्रा और द्विपक्षीय व्यापार वार्ताएं तय करेंगी कि यह अस्थायी राहत स्थायी समझौते में बदलती है या नहीं।

और पढ़ें: भारत-अमेरिका ट्रेड डील | रुबियो की भारत यात्रा | पेट्रोल-डीजल एक्सपोर्ट ड्यूटी

स्रोत: रिपोर्ट

लेखक

Rakesh Kumar

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