नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर शुक्रवार (23 अक्टूबर) को अजरबैजान की राजधानी बाकू पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत-अजरबैजान संबंधों में नई गर्माहट देखी जा रही है। जयशंकर ने राष्ट्रपति अलीयेव को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं पहुंचाईं।

मुख्य बातें
- जयशंकर ने बाकू में राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात की, द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने पर चर्चा।
- विदेश मंत्री जेहुन बयरामोव के साथ राजनीतिक संवाद, व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी पर बैठक।
- ईरान में फंसे भारतीयों (विशेषकर छात्रों) की निकासी में मदद के लिए भारत ने अजरबैजान को कहा धन्यवाद।
- बाकू-त्बिलिसी-कार्स रेलवे, बाकू बंदरगाह और नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर पर जोर।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जयशंकर ने लिखा, “बाकू में अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात करके खुशी हुई। मैंने उन्हें राष्ट्रपति मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी की शुभकामनाएं पहुंचाईं। हमने दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की।”
ईरान से निकासी पर धन्यवाद
दौरे की सबसे अहम कूटनीतिक बात बयरामोव के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आई। जयशंकर ने कहा कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव के दौरान अजरबैजान ने ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों — विशेषकर छात्रों — की निकासी में भारत की मदद की। भारत ने इसके लिए अजरबैजान का आभार जताया।
जयशंकर ने कहा कि भारत और अजरबैजान शांति, प्रगति और समृद्धि को बढ़ावा देने में समान हित रखते हैं, जबकि आतंकवाद, संघर्ष और अस्थिरता दोनों देशों के लिए साझा खतरे हैं।
कनेक्टिविटी का बड़ा एजेंडा
अजरबैजान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर और बयरामोव ने दोनों देशों के संबंधों के पूरे एजेंडे पर चर्चा की — राजनीतिक संवाद, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन, शिक्षा, विज्ञान और सांस्कृतिक सहयोग। बैठक में अजरबैजान के ईस्ट-वेस्ट और नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर, बाकू-त्बिलिसी-कार्स रेलवे, बाकू बंदरगाह और अलात फ्री इकोनॉमिक जोन की संभावनाओं पर खास जोर दिया गया।
भारत के लिए यह कॉरिडोर नेटवर्क रणनीतिक रूप से अहम है, क्योंकि यह मध्य एशिया और यूरोप तक वैकल्पिक व्यापार मार्ग खोलता है। दोनों मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र, एससीओ और सीआईसीए जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग पर भी विचार-विमर्श किया।
दक्षिण काकेशस पर ब्रीफिंग
बयरामोव ने जयशंकर को दक्षिण काकेशस की स्थिति, अजरबैजान-आर्मेनिया सामान्यीकरण प्रक्रिया और विश्वास बहाली के उपायों पर जानकारी दी। अजरबैजान के “मुक्त क्षेत्रों” में पुनर्निर्माण के प्रयासों और जमीन में बिछी बारूदी सुरंगों (लैंडमाइन) के लगातार खतरे पर भी चर्चा हुई।
क्यों अहम है यह दौरा
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क तेज हुआ है। 16 अक्टूबर को अजरबैजान में भारत के राजदूत अभय कुमार ने राष्ट्रपति अलीयेव को अपना परिचय-पत्र सौंपा था। इससे पहले 1 सितंबर को बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति अलीयेव के बीच भी मुलाकात हुई थी। बैठक में दोनों पक्षों ने कहा कि भारत और अजरबैजान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध सदियों पुराने हैं, जो आज भी रिश्तों की मजबूत नींव हैं।
जयशंकर ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच हुई सार्थक चर्चा ने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का रास्ता तय कर दिया है।
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