LPG CLYINDER PRICE HIKED DESPITE देश में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी को लेकर सरकार की ओर से बड़ा स्पष्टीकरण सामने आया है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि हाल के महीनों में सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi Contract Price – CP) में भारी बढ़ोतरी हुई है, जो भारत के लिए एलपीजी आयात का मुख्य अंतरराष्ट्रीय मानक है। इसी वजह से घरेलू गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाना जरूरी हो गया था।
सरकार का कहना है कि यह बढ़ोतरी उतनी बड़ी नहीं है जितनी दिखाई दे रही है। पिछले कुछ वर्षों में कुल मिलाकर सिलेंडर की कीमतों में केवल 110 रुपये की ही बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों पर इस बढ़ोतरी का कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उनके लिए सरकार अतिरिक्त सब्सिडी जारी रखेगी।
सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस बढ़ने से बढ़े LPG के दाम
सरकारी सूत्रों के अनुसार, एलपीजी सिलेंडर (LPG CLYINDER PRICE HIKED DESPITE) की कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) में हुई तेज बढ़ोतरी है। यह कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की दर तय करने का प्रमुख आधार मानी जाती है और भारत जैसे बड़े आयातक देश पर इसका सीधा असर पड़ता है।
सूत्रों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में इस कीमत में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिसके कारण घरेलू बाजार में भी कीमतें समायोजित करना जरूरी हो गया था।
सरकार के अनुसार बढ़ोतरी ज्यादा नहीं

सरकारी सूत्रों ने यह भी कहा कि सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की वृद्धि को बहुत ज्यादा नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार एक औसत परिवार में एक सिलेंडर लगभग तीन महीने तक चलता है।
इस हिसाब से देखें तो एक परिवार के लिए प्रतिदिन खर्च में केवल लगभग 20 पैसे की बढ़ोतरी होती है। यानी चार सदस्यों वाले परिवार पर इसका दैनिक प्रभाव बेहद मामूली है।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों पर असर नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए (LPG CLYINDER PRICE HIKED DESPITE) सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। उनके लिए सरकार पहले की तरह 60 रुपये अतिरिक्त सब्सिडी देती रहेगी।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि उज्ज्वला योजना के तहत आने वाले परिवारों को राहत देने के लिए यह व्यवस्था जारी रखी गई है, ताकि गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर किसी तरह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
गैर-उज्ज्वला उपभोक्ताओं के लिए भी कीमत कम
सरकार का कहना है कि जो उपभोक्ता उज्ज्वला योजना के तहत नहीं आते, उनके लिए भी एलपीजी सिलेंडर की कीमत अभी भी बाजार दर से कम है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश कर रही है और इसी वजह से कीमतों को पूरी तरह बाजार के हिसाब से नहीं बढ़ाया गया है।
पेट्रोल-डीजल महंगा होने की आशंका पर सरकार का जवाब
मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। इसके चलते यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
हालांकि सरकारी सूत्रों ने साफ कहा है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई संभावना नहीं है। उनका कहना है कि भारत में ईंधन की खुदरा कीमतें दुनिया के कई देशों की तुलना में अभी भी काफी कम हैं।
सरकार पहले ही तीन बार पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कटौती कर चुकी है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिली है।
भारत में ऊर्जा की कोई कमी नहीं: हरदीप पुरी (LPG CLYINDER PRICE HIKED DESPITE)
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा कि भारत में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में बाधा के बावजूद भारत के पास पर्याप्त ऊर्जा संसाधन उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों को सस्ता और टिकाऊ ईंधन उपलब्ध कराना है और इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
मंत्री ने यह भी कहा कि ऊर्जा उपभोक्ताओं को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि देश की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है।
रूसी तेल की खरीद जारी रखेगा भारत
इस बीच अमेरिका की ओर से भारत को 30 दिनों की छूट भी दी गई है, जिसके तहत भारतीय रिफाइनरियां रूसी तेल खरीद सकती हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत को किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है।
सरकार का कहना है कि भारत हमेशा वही तेल खरीदता है जिसकी कीमत सबसे प्रतिस्पर्धी होती है। (LPG CLYINDER PRICE HIKED DESPITE)
केंद्र के बयान के अनुसार रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है और फरवरी 2026 तक भारत लगातार रूसी तेल का आयात कर रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के तीन वर्षों के दौरान भी भारत ने रूसी तेल की खरीद जारी रखी थी, भले ही अमेरिका और यूरोपीय देशों ने इस पर आपत्ति जताई थी।
2022 के बाद से रियायती कीमतों और रिफाइनरियों की मांग के कारण रूस से तेल आयात में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे भारत को ऊर्जा जरूरतें पूरी करने में मदद मिली है। LPG CLYINDER PRICE HIKED DESPITE








