नई दिल्ली में 6 अक्टूबर को राहुल गांधी और विपक्षी सांसदों का चुनाव आयोग की ओर मार्च आठ घंटे से ज्यादा चले धरने और पुलिस हिरासत तक पहुंच गया। इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम सवाल मुलाकात को लेकर रहा। विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च कर रहे थे, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल ने औपचारिक appointment नहीं मांगा था।
विपक्षी सांसद संसद भवन परिसर से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों तथा विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों से जुड़ा था।
मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य नेता आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठ गए। राहुल गांधी दोपहर के आसपास वहां पहुंचे थे। धरना आठ घंटे से ज्यादा चला।
चुनाव आयोग ने मुलाकात को लेकर क्या कहा?
चुनाव आयोग ने 6 अक्टूबर की शाम जारी अपने बयान में कहा कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल ने आयोग से औपचारिक मुलाकात के लिए appointment नहीं मांगा था।
आयोग के मुताबिक, करीब 4 बजे उसे दिल्ली पुलिस के जरिए जानकारी मिली कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलकर ज्ञापन देना चाहता है।
इसके बाद दिल्ली पुलिस के DCP से आयोग को बताया गया कि प्रतिनिधिमंडल में करीब 240 सांसद हैं और बैठक संसद भवन एनेक्सी में प्रस्तावित है। चुनाव आयोग ने इस प्रस्ताव को ‘असामान्य’ बताया और कहा कि उसके protocol के मुताबिक ऐसी बैठकें चुनाव आयोग के परिसर में होती हैं।
आयोग ने इसके बाद एक वैकल्पिक व्यवस्था की पेशकश की। उसके मुताबिक, उसका सबसे वरिष्ठ ड्यूटी अधिकारी सांसदों के पास जाकर उनका ज्ञापन ले सकता था। चुनाव आयोग ने कहा कि यह भी एक असामान्य कदम होता, लेकिन सांसदों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
धरना खत्म कराने के बाद हिरासत
मुलाकात को लेकर गतिरोध के बीच प्रदर्शनकारी आकाशवाणी भवन परिसर में बैठे रहे। आठ घंटे से ज्यादा समय बाद पुलिस ने कार्रवाई की और प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया।
PTI के मुताबिक पुलिस ने राहुल गांधी को बलपूर्वक वहां से हटाया और बस में ले गई। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार करीब 250 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें लगभग 50 सांसद थे।
हिरासत में लिए गए लोगों को किंग्सवे कैंप स्थित न्यू पुलिस लाइंस ले जाया गया। बाद में राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं को रिहा कर दिया गया।
शशि थरूर ने क्या कहा?
कांग्रेस सांसद शशि थरूर उस समय बर्लिन में थे और प्रदर्शन में शामिल नहीं थे। राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने की तस्वीरें सामने आने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी और पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई।
थरूर ने सरकार की प्रतिक्रिया को ‘disgraceful’ बताया। उनकी प्रतिक्रिया घटना के समय मौके पर मौजूदगी पर आधारित नहीं थी।
इस पूरे विवाद में ‘वोट चोरी’ का आरोप विपक्ष की ओर से लगाया गया है। इसे स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि विपक्ष के आरोप के तौर पर ही लिखा जाना चाहिए।
फिलहाल इस घटनाक्रम में दो बातें स्पष्ट हैं। विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च कर रहे थे और आयोग से मुलाकात कर ज्ञापन देने की बात सामने आई। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि 4 बजे तक कोई औपचारिक appointment नहीं मांगा गया था और बाद में प्रस्तावित बैठक का स्थान उसके तय protocol के अनुरूप नहीं था। इसके बाद प्रदर्शन लंबा चला और पुलिस ने राहुल गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।

