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रविवार, 18 अक्टूबर 2026
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रुपये की सात महीने की सबसे बड़ी साप्ताहिक छलांग: डॉलर के मुकाबले 94.96 पर बंद, RBI के कदमों से बदला रुख

रुपये ने शुक्रवार को 94.96 प्रति डॉलर पर बंद होकर सात महीने की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त दर्ज की। RBI के विशेष उपायों से डॉलर की मांग पर लगाम लगी, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि स्थायी मजबूती के लिए कच्चे तेल, पूंजी प्रवाह और व्यापार घाटे में सुधार जरूरी है।

रुपया डॉलर विनिमय दर

रुपया डॉलर के मुकाबले इस हफ्ते कितना मजबूत हुआ? शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को रुपया 94.96 प्रति डॉलर पर बंद हुआ — पूरे हफ्ते में करीब 1.9 से 2 प्रतिशत की मजबूती के साथ। यह सात महीनों में रुपये का सबसे दमदार साप्ताहिक प्रदर्शन है, और 38 दिनों में पहली बार रुपया मनोवैज्ञानिक 95 के स्तर से नीचे बंद हुआ है।

हफ्ते की शुरुआत में रुपया 95.83 पर खुला था, जबकि पिछले हफ्ते यह 96.73 पर बंद हुआ था — जो 20 मई 2026 को छुए गए 96.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर के बेहद करीब था। शुक्रवार को कारोबार के दौरान रुपया 94.67 के इंट्राडे उच्च स्तर तक भी पहुंचा।

रुपया डॉलर विनिमय दर
रुपया डॉलर विनिमय दर बढ़त (प्रतीकात्मक फोटो)

RBI के वे कदम, जिन्होंने बदला खेल

इस रिकवरी के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 10 अक्टूबर को घोषित विशेष उपाय हैं, जिनका मकसद डॉलर की सट्टा मांग पर लगाम लगाना था:

  • तेल कंपनियों के लिए विशेष डॉलर विंडो: तीन सरकारी तेल विपणन कंपनियों (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) की डॉलर जरूरत अब RBI के जरिए पूरी होगी, न कि खुले बाजार से — इससे स्पॉट मार्केट पर दबाव घटा।
  • फॉरेक्स डेरिवेटिव पर सख्ती: रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के नियम कड़े किए गए, ताकि रुपये के खिलाफ सट्टेबाजी पर अंकुश लगे।
  • 20% रिजर्व की शर्त: 20 लाख डॉलर से अधिक की डॉलर खरीद पर बैंकों को 20 प्रतिशत फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व बनाना होगा।
  • बिना दस्तावेज खरीद पर रोक: वास्तविक व्यापार के दस्तावेज बिना डॉलर खरीद की सीमा 95% घटाकर 50 लाख डॉलर कर दी गई।

सोमवार, 12 अक्टूबर को रुपया एक ही दिन में करीब 1% मजबूत हुआ था — छह महीनों से अधिक समय की सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त। मंगलवार को यह 40 पैसे चढ़कर 95.38 पर और बुधवार को 96 पैसे उछलकर 95.75 पर बंद हुआ था।

क्या यह रिकवरी टिकेगी?

विशेषज्ञों का कहना है कि RBI के कदमों ने तात्कालिक दबाव जरूर कम किया है, लेकिन स्थायी मजबूती कुछ बुनियादी बातों पर निर्भर करेगी — कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेश का प्रवाह, भारत का व्यापार घाटा और डॉलर इंडेक्स की चाल। दिलचस्प बात यह है कि इसी हफ्ते भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 8.58 अरब डॉलर घटकर 726.03 अरब डॉलर रह गया — हालांकि इसका बड़ा हिस्सा मुद्रा मूल्यों में उतार-चढ़ाव का असर है, न कि RBI की सीधी डॉलर बिक्री का।

आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?

मजबूत रुपया आयात-निर्भर चीजों — कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, विदेश में पढ़ाई और विदेश यात्रा — को सस्ता करता है। विदेश से पैसा भेजने वालों को थोड़े कम रुपये मिलेंगे, लेकिन महंगाई पर लगाम का फायदा सबको मिलेगा। वहीं निर्यातकों, खासकर IT और फार्मा कंपनियों के लिए मजबूत रुपया मिली-जुली खबर है, क्योंकि डॉलर में कमाई का रुपये में मूल्य घट जाता है।

निचली रेखा: RBI के उपायों ने रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर के मुहाने से वापस खींच लिया है — लेकिन यह राहत टिकेगी या नहीं, यह अगले कुछ हफ्तों के आंकड़े तय करेंगे।

लेखक

Rakesh Kumar

नमस्कार, मैं राकेश कुमार हूँ। PAHALI KHABAR के माध्यम से मैं आपके लिए ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, खेल और अन्य महत्वपूर्ण खबरें लेकर आता हूँ। मेरा उद्देश्य है कि आपको हर खबर सरल भाषा में, सही तथ्यों के साथ और समय पर मिले।

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