शेख हसीना बांग्लादेश वापसी को लेकर बुधवार को बड़ा ऐलान हुआ। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली से वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह दिसंबर 2026 में अपने वतन लौटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि देश में “लोकतंत्र और न्याय बहाल करने” के लिए वह गिरफ्तारी, जेल या मौत की सजा का सामना करने को भी तैयार हैं। 5 अगस्त 2024 को छात्रों के नेतृत्व में हुए बड़े आंदोलन के बाद सत्ता से हटाए जाने और भारत आने के बाद यह उनकी पहली सार्वजनिक मीडिया बातचीत थी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेख हसीना ने क्या कहा?
नई दिल्ली के सर मार्क टली ऑडिटोरियम में ‘फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया’ (FCCSA) की ओर से आयोजित इस ऑडियो-लिंक प्रेस वार्ता में हसीना का चेहरा नहीं दिखा, सिर्फ उनकी आवाज सुनाई दी। उन्होंने कहा, “वे मुझे जेल में डाल सकते हैं, या मार भी सकते हैं, लेकिन फिर भी मुझे वापस जाना है। डर मेरे कर्तव्य का फैसला नहीं कर सकता।” हसीना ने अपनी अवामी लीग पार्टी पर लगे प्रतिबंध को हटाने और सभी राजनीतिक बंदियों की रिहाई की भी मांग की। उन्होंने अंतरिम सरकार के प्रमुख रहे मोहम्मद यूनुस पर निशाना साधते हुए उन्हें “हत्यारा फासीवादी” करार दिया और दावा किया कि उनके नेतृत्व में बांग्लादेश में कभी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकते। मौजूदा बीएनपी सरकार को भी उन्होंने नहीं बख्शा — हसीना ने कहा कि “धांधली भरे चुनाव” से सत्ता में आई सरकार के बावजूद हालात नहीं बदले और देश अब भी डर, आतंक, अवसाद और आर्थिक तंगी की गिरफ्त में है। भाषण के दौरान वह कई बार भावुक भी नजर आईं। इस संबोधन को ऑनलाइन लाखों लोगों ने देखा, जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि दो साल बाद हुई उनकी इस पहली सार्वजनिक पेशी को लेकर बांग्लादेश और भारत दोनों जगह कितनी उत्सुकता थी।
बांग्लादेश सरकार की तीखी प्रतिक्रिया
ढाका ने इस वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस पर कड़ी आपत्ति जताई है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि उसने भारत सरकार को इस आयोजन के “संभावित दुष्परिणामों” के बारे में पहले ही आगाह किया था, लेकिन इसके बावजूद कार्यक्रम होने दिया गया, जिस पर उसे “गहरा खेद” है। मंत्रालय ने कहा कि बांग्लादेश, भारत के साथ संप्रभु समानता, आपसी सम्मान, एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप और राष्ट्रीय गरिमा के सिद्धांतों पर आधारित रचनात्मक और भविष्योन्मुखी रिश्ता चाहता है। बांग्लादेश की अंतरिम रही और अब मौजूदा सरकार, दोनों शुरू से हसीना पर लगे राजनीतिक उत्पीड़न के आरोपों को खारिज करती रही हैं।
पैनल में कौन-कौन हुआ शामिल?
इस वर्चुअल प्रेस वार्ता में हसीना के बेटे साजिब वाजेद जॉय भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि भारत सरकार हसीना को एक पूर्व राष्ट्राध्यक्ष की तरह पूरी सुरक्षा और सम्मान दे रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने उन्हें पूरा सम्मान दिया है। पैनल में बांग्लादेश ह्यूमन राइट्स वॉच के महासचिव मोहम्मद अली सिद्दीकी, संगठन की यूएसए इकाई के निदेशक शाह मोहम्मद बख्तियार, पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी नौफेल और लेखक-विश्लेषक अबु ओबैदा आरिफ जैसे कई चेहरे शामिल हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक बांग्लादेश के पूर्व क्रिकेट कप्तान साकिब अल हसन के भी इस पैनल में शामिल होने की संभावना जताई गई थी, जिसने सियासी हलकों के साथ-साथ क्रिकेट जगत में भी खासी चर्चा छेड़ दी।
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फांसी की सजा और अगस्त 2024 का घटनाक्रम
गौरतलब है कि ढाका के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने 17 नवंबर 2025 को हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों — यानी 2024 के आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने, मार डालने के आदेश देने और अत्याचार रोकने में नाकाम रहने — के आरोप में अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। इसी मामले में तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी मौत की सजा मिली, जबकि राज्य के गवाह बने पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्लाह अल-मामून को पांच साल कैद की सजा सुनाई गई। हसीना इस फैसले को “पक्षपातपूर्ण और राजनीति से प्रेरित” बता चुकी हैं। 2024 के आंदोलन में 1,400 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। 5 अगस्त 2024 को छात्रों के नेतृत्व वाले व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बाद हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी और वह भारत आ गई थीं। इसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी थी। फरवरी 2026 में हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के तारिक रहमान जीतकर सत्ता में आए, जबकि हसीना की अवामी लीग को पंजीकरण रद्द होने के चलते चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था। बांग्लादेश और दक्षिण एशिया से जुड़ी अन्य खबरों के लिए हमारा अंतरराष्ट्रीय सेक्शन देखते रहें।
भारत का रुख और आगे की सियासत
भारत सरकार ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से खुद को दूर रखते हुए स्पष्ट किया कि उसने न तो इस आयोजन का समर्थन किया और न ही इसमें कोई भूमिका निभाई। यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब भारत-बांग्लादेश रिश्तों में पहले से ही तनाव बना हुआ है और ढाका, भारतीय धरती से हो रही राजनीतिक गतिविधियों पर बार-बार चिंता जता चुका है। इसी बीच भारत ने पहली बार पुष्टि की है कि सितंबर में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भी आमंत्रित किया गया है। संयोग से उसी बुधवार को तारिक रहमान ने ढाका में हसीना के पूर्व सरकारी आवास में बने ‘जुलाई मास अपराइज़िंग मेमोरियल म्यूजियम’ का उद्घाटन भी किया, जो 2024 के जन आंदोलन में जान गंवाने वालों को समर्पित है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के अनुसार भी हसीना ने अपनी वापसी को अपने समर्थकों और आम बांग्लादेशी नागरिकों के प्रति कर्तव्य बताया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दिसंबर में हसीना अपने ऐलान पर अमल करती हैं या नहीं, और अगर वह लौटती हैं तो बांग्लादेश की सियासत किस करवट बैठेगी। इस तरह की और ताजा खबरों के लिए पहली खबर होमपेज पर विजिट करते रहें।