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BRICS New Delhi Declaration 2026: पहलगाम पर सख्त संदेश, टैरिफ पर चिंता और चीन के साथ बढ़ी बातचीत, जानिए भारत को क्या मिला

BRICS New Delhi Declaration 2026 में पहलगाम आतंकी हमले, आतंकवाद, टैरिफ, West Asia conflict, UN reforms और भारत-चीन संबंधों को लेकर कई अहम बातें सामने आईं।

BRICS New Delhi Declaration 2026: भारत को क्या मिला?

BRICS New Delhi Declaration 2026

BRICS New Delhi Declaration 2026: दिल्ली में दुनिया की नजरें पिछले दो दिनों से एक ही जगह टिकी थीं। भारत की राजधानी में जब ब्रिक्स देशों के नेता एक साथ बैठे तो चर्चा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं थी। मंच पर युद्ध, आतंकवाद, व्यापार, टैरिफ, वैश्विक संस्थाओं में सुधार और बदलती अंतरराष्ट्रीय राजनीति जैसे कई ऐसे मुद्दे थे, जिनका असर आने वाले समय में भारत की विदेश नीति और वैश्विक भूमिका पर दिखाई दे सकता है।

इस बार बैठक की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई थी क्योंकि भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में हो रहा 18वां BRICS Summit भारत की चौथी BRICS अध्यक्षता के दौरान आयोजित हो रहा है। सरकार ने इस अध्यक्षता के लिए resilience, innovation, cooperation और sustainability को केंद्र में रखा है।

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लेकिन सम्मेलन खत्म होने से पहले सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या इतने अलग-अलग हित रखने वाले देश किसी साझा मुद्दे पर एक साथ खड़े दिखाई देंगे?

अब तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी है।

BRICS New Delhi Declaration 2026 को सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है। इसमें आतंकवाद, पहलगाम हमला, पश्चिम एशिया का युद्ध, व्यापार में एकतरफा टैरिफ और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर साझा रुख सामने आया है।

BRICS New Delhi Declaration 2026 में भारत के लिए सबसे बड़ी बात क्या रही?

पूरे घोषणापत्र को देखें तो भारत के लिए कई स्तरों पर महत्वपूर्ण बातें निकलकर आती हैं। सबसे पहले आतंकवाद का मुद्दा है।

BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख दोहराया। रिपोर्टों के मुताबिक घोषणा में आतंकवाद के प्रति zero tolerance की बात कही गई है। पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।

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भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह मुद्दा उठाता रहा है कि आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक या वैचारिक बहाने से सही नहीं ठहराया जा सकता। ऐसे में BRICS जैसे बड़े समूह के साझा दस्तावेज में आतंकवाद पर स्पष्ट रुख भारत के लिए कूटनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

यहां एक और बात ध्यान देने वाली है। घोषणा में आतंकवाद के साथ-साथ आतंकवाद की फंडिंग, साइबर अपराध और दूसरे अंतरराष्ट्रीय अपराधों के खिलाफ सहयोग की जरूरत भी सामने आई है।

पहलगाम हमले पर BRICS का संदेश क्यों अहम है?

पहलगाम आतंकी हमला भारत के लिए सिर्फ सुरक्षा से जुड़ा मामला नहीं रहा है। भारत लगातार इस हमले को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के बड़े संदर्भ में उठाता रहा है।

BRICS में रूस, चीन, ईरान, UAE समेत कई बड़े देश शामिल हैं। इसलिए इस मंच से आने वाला साझा बयान भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें अलग-अलग विदेश नीति वाले देशों की सहमति दिखाई देती है।

यही वजह है कि BRICS New Delhi Declaration 2026 Pahalgam attack इस समय तेजी से खोजा जाने वाला विषय बन सकता है।

हालांकि घोषणा को पढ़ते समय एक बात समझना जरूरी है। साझा दस्तावेज में सभी देशों के अलग-अलग द्विपक्षीय विवादों का विस्तृत उल्लेख होना जरूरी नहीं होता। BRICS का उद्देश्य साझा बिंदुओं पर सहमति बनाना है, इसलिए भाषा अक्सर कूटनीतिक रखी जाती है।

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टैरिफ को लेकर भी BRICS देशों ने जताई चिंता

घोषणापत्र का दूसरा बड़ा हिस्सा वैश्विक व्यापार से जुड़ा है।

BRICS देशों ने एकतरफा tariff और non-tariff measures को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ऐसे कदम वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकते हैं और व्यापारिक व्यवस्था में असंतुलन पैदा कर सकते हैं।

यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस समय व्यापार शुल्क और संरक्षणवादी नीतियों को लेकर आमने-सामने हैं।

भारत भी पिछले कुछ समय से यह कहता रहा है कि विकासशील देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए वैश्विक व्यापार व्यवस्था में संतुलन होना चाहिए।

BRICS के भीतर व्यापार को बढ़ाने, बाजार खोलने और भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने पर भी जोर दिया गया है। भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सम्मेलन से पहले BRICS देशों के बीच ज्यादा संतुलित व्यापार, payment systems को जोड़ने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की जरूरत बताई थी।

भारत और दुनिया की दूसरी बड़ी खबरें

क्या BRICS की अपनी करेंसी बनेगी?

यह सवाल हर BRICS Summit के दौरान चर्चा में रहता है।

लेकिन इस बार भी तस्वीर वैसी नहीं बनी जैसी सोशल मीडिया पर कई बार दिखाई जाती है।

घोषणापत्र ने किसी नई साझा BRICS currency की घोषणा नहीं की। इसके बजाय सदस्य देशों ने अपनी-अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा पार भुगतान को आसान बनाने पर ध्यान दिया है।

BRICS Payment Task Force पहले से अलग-अलग देशों की payment और messaging systems को आपस में बेहतर तरीके से जोड़ने पर काम कर रहा है। उद्देश्य यह है कि सदस्य देशों के बीच payments ज्यादा तेज, सुरक्षित और कम लागत वाले हों।

यानी फिलहाल कहानी “नई BRICS करेंसी” से ज्यादा “स्थानीय मुद्राओं में आसान व्यापार” की है।

यह फर्क समझना जरूरी है, क्योंकि दोनों बातें एक जैसी नहीं हैं।

मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात ने क्यों बढ़ाई हलचल?

BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात भी चर्चा में रही।

दोनों नेताओं ने भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने और लोगों की आवाजाही को आसान बनाने पर जोर दिया। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दोनों देश 2020 के सीमा विवाद के बाद संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं।

यही वजह है कि BRICS Summit 2026 को भारत-चीन संबंधों के नजरिए से भी देखा जा रहा है।

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसके बावजूद व्यापार, यात्रा और लोगों की आवाजाही जैसे क्षेत्रों में बातचीत आगे बढ़ रही है।

इसका मतलब यह नहीं कि दोनों देशों के सभी मतभेद खत्म हो गए हैं। बल्कि इसे एक नियंत्रित और सावधानी भरे engagement के रूप में देखना ज्यादा सही होगा।

UN Security Council पर भारत ने फिर उठाया सुधार का मुद्दा

BRICS मंच पर भारत की एक पुरानी मांग भी प्रमुखता से सामने आई।

भारत लगातार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की मांग करता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS मंच से global governance में सुधार की जरूरत पर जोर दिया। भारत का तर्क है कि आज की दुनिया की वास्तविकता को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में बेहतर तरीके से प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए।

BRICS के दौरान प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात की। दोनों ने multilateral institutions में सुधार और UN Security Council में contemporary realities के अनुरूप बदलाव की जरूरत पर चर्चा की।

भारत के लिए यह सिर्फ कूटनीतिक बयान नहीं है। लंबे समय से भारत UN Security Council की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को आगे बढ़ा रहा है।

BRICS 2026 और भारत की अध्यक्षता की आधिकारिक जानकारी (Press Information Bureau)

West Asia War पर BRICS ने क्या कहा?

घोषणापत्र का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर भी है।

BRICS देशों ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की। साझा बयान में बातचीत, परामर्श और कूटनीति के जरिए विवादों को सुलझाने पर जोर दिया गया।

यह विषय इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि BRICS में ईरान भी शामिल है और UAE जैसे ऐसे देश भी हैं जिनके पश्चिमी देशों के साथ अलग रणनीतिक संबंध हैं।

ऐसे माहौल में सभी देशों का एक साझा दस्तावेज स्वीकार करना अपने आप में कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी मुलाकात की और पश्चिम एशिया में शांति, समुद्री आवाजाही तथा व्यापार की सुरक्षा पर भारत का रुख दोहराया।

भारत को व्यापार और भुगतान के मोर्चे पर क्या फायदा हो सकता है?

BRICS का एक बड़ा हिस्सा आर्थिक सहयोग है।

भारत चाहता है कि सदस्य देशों के बीच व्यापार बढ़े और इसके लिए payment systems को ज्यादा आसान बनाया जाए। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ने से कुछ मामलों में डॉलर पर निर्भरता कम करने की संभावना बन सकती है।

हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत या BRICS देश अचानक डॉलर को छोड़ने जा रहे हैं।

मौजूदा दिशा ज्यादा व्यावहारिक है। जहां संभव हो वहां स्थानीय मुद्राओं में settlement, payment connectivity और व्यापार की लागत कम करने की कोशिश की जा रही है।

भारत की इस पहल का असर आगे चलकर exporters, importers और BRICS देशों के बीच कारोबार करने वाली कंपनियों पर दिखाई दे सकता है।

भारत-चीन संबंध और मोदी-शी मुलाकात (Reuters)

AI और टेक्नोलॉजी पर भी भारत की छाप

इस सम्मेलन की चर्चा केवल युद्ध और आतंकवाद तक सीमित नहीं रही।

BRICS declaration में Artificial Intelligence को लेकर भी बात हुई। सदस्य देशों ने AI के विकास को सुरक्षित, समावेशी, विश्वसनीय और ऊर्जा-कुशल बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

भारत की AI Impact Summit की मेजबानी का भी उल्लेख किया गया है। इसके साथ Global South की जरूरतों के हिसाब से AI governance पर सहयोग बढ़ाने की बात सामने आई है।

यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है क्योंकि देश खुद को AI और digital public infrastructure के क्षेत्र में Global South के लिए एक मॉडल के रूप में पेश कर रहा है।

घोषणापत्र में BRICS digital public infrastructure repository की दिशा में काम करने का भी उल्लेख है।

भारत ने BRICS में कौन-कौन सी पहल आगे बढ़ाईं?

इस साल भारत की अध्यक्षता में BRICS का एजेंडा केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं रहा।

घोषणापत्र में भारत की कई पहलों को जगह मिली है। इनमें digital public infrastructure से जुड़ी पहल, मानसिक स्वास्थ्य सहयोग के लिए training network और Bengaluru स्थित NIMHANS की भूमिका शामिल है।

इसके अलावा Industry 4.0 और advanced digital technologies को अपनाने के लिए India Centre for BRICS Industrial Competencies की स्थापना का भी स्वागत किया गया है।

भारत ने BRICS Risk Lab को गुजरात के GIFT City में आगे बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा है।

यानी BRICS 2026 में भारत ने सुरक्षा और कूटनीति के साथ-साथ finance, technology, health और industry को भी अपने agenda में प्रमुख जगह दी है।

BRICS 2026 में कितने देश शामिल हैं?

भारत की अध्यक्षता में 2026 का BRICS अब पहले के छोटे समूह जैसा नहीं रहा।

PIB के अनुसार BRICS में फिलहाल 11 सदस्य देश हैं: भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और UAE। ये देश मिलकर दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, 40 प्रतिशत GDP और 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।

यही आर्थिक और जनसंख्या का आकार BRICS को वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण मंच बनाता है।

क्या BRICS अब पश्चिम के खिलाफ नया गुट बन रहा है?

यह सवाल भी सम्मेलन के दौरान बार-बार उठा है।

लेकिन भारत का रुख यहां थोड़ा अलग है।

भारत BRICS को किसी एक देश या पश्चिमी देशों के खिलाफ गठबंधन के रूप में पेश करने के बजाय Global South की आवाज मजबूत करने वाले मंच के रूप में देखता है।

AP की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने भी BRICS को anti-West समूह की तरह देखने के बजाय एक अधिक बहुपक्षीय और संतुलित मंच के रूप में पेश किया।

यही भारत की विदेश नीति का संतुलन भी दिखाता है। एक तरफ भारत रूस, चीन और ईरान जैसे देशों के साथ BRICS में बैठता है, दूसरी तरफ अमेरिका और यूरोप के साथ भी उसके रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं।

BRICS New Delhi Declaration की प्रमुख बातें (The Indian Express)

Next क्या होगा

BRICS New Delhi Declaration 2026 के सामने आने के बाद असली परीक्षा अब उसके implementation की होगी।

घोषणापत्र में स्थानीय मुद्रा में व्यापार, payment systems, AI, आतंकवाद, व्यापार, ऊर्जा, स्वास्थ्य और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे कई मुद्दे शामिल हैं।

इनमें से कौन-सी पहल जमीन पर कितनी तेजी से आगे बढ़ती है, यह आने वाले महीनों में साफ होगा।

भारत के लिए इस सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उसने BRICS की अध्यक्षता का इस्तेमाल अपने कई पुराने और नए मुद्दों को एक ही मंच पर आगे बढ़ाने के लिए किया है।

पहलगाम हमले पर सख्त अंतरराष्ट्रीय संदेश, आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख, UN reforms की मांग, चीन के साथ संवाद, व्यापार में स्थानीय मुद्राओं का इस्तेमाल और AI जैसे नए क्षेत्रों पर सहयोग—इन सभी को एक साथ देखें तो तस्वीर काफी बड़ी बनती है।

दिल्ली में हुई यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि दुनिया इस समय कई संकटों से गुजर रही है। ऐसे दौर में अलग-अलग हितों वाले देशों को एक साझा घोषणा पर सहमत कराना आसान नहीं था।

फिलहाल BRICS New Delhi Declaration 2026 ने भारत को अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का एक बड़ा मंच दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि दिल्ली में लिए गए फैसले आने वाले महीनों में कितनी तेजी से जमीन पर उतरते हैं।

लेखक

Rakesh Kumar

नमस्कार, मैं राकेश कुमार हूँ। PAHALI KHABAR के माध्यम से मैं आपके लिए ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, खेल और अन्य महत्वपूर्ण खबरें लेकर आता हूँ। मेरा उद्देश्य है कि आपको हर खबर सरल भाषा में, सही तथ्यों के साथ और समय पर मिले।

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