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धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे पर तोड़ी चुप्पी, बोले- पद मेरे लिए महत्वपूर्ण नहीं था; Gen-Z को लेकर कही बड़ी बात

शिक्षा मंत्री पद छोड़ने के दो हफ्ते बाद धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार चुप्पी तोड़ी। भुवनेश्वर में छात्रों के बीच उन्होंने कहा कि NEET विवाद में Gen-Z को गुमराह किया गया, और उनके लिए पद कभी अहम नहीं था। इसी दौरान ओडिशा में नवीन पटनायक पर भी निशाना साधा।

धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा बयान Gen-Z जंतर मंतर विरोध

धर्मेंद्र प्रधान ने भुवनेश्वर में छात्रों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे पर पहली बार खुलकर बात की

शिक्षा मंत्री पद छोड़ने के करीब दो हफ्ते बाद धर्मेंद्र प्रधान आखिरकार खुलकर बोले हैं। भुवनेश्वर की GM यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों के बीच पहुंचे पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने अपने इस्तीफे की वजह बताई और साथ ही एक ऐसी बात कही जो अब सुर्खियों में है।

प्रधान ने कहा कि उनके लिए मंत्री पद कभी निजी अहमियत का विषय नहीं रहा। उनके मुताबिक, NEET पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान Gen-Z को गुमराह करने की कोशिश की गई, और यही वजह उनके इस्तीफे के पीछे रही।

इस्तीफे पर पहली बार खुलकर बोले धर्मेंद्र प्रधान

सांसद और सीनियर बीजेपी नेता धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। NEET पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के गुस्से और जंतर-मंतर पर हुए बड़े प्रदर्शनों के बीच लिया गया यह फैसला उस वक्त राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना था।

धर्मेंद्र प्रधान ने भुवनेश्वर में छात्रों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे पर पहली बार खुलकर बात की
धर्मेंद्र प्रधान ने भुवनेश्वर में छात्रों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे पर पहली बार खुलकर बात की

इस्तीफे के बाद प्रधान ने लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा। शनिवार को भुवनेश्वर पहुंचकर उन्होंने पहली बार इस पर विस्तार से प्रतिक्रिया दी।

“मेरे लिए पद अहम नहीं था”

प्रधान ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि Gen-Z उनके लिए अपने बच्चों जैसा है और कुछ लोगों ने विरोध-प्रदर्शनों के दौरान इस पीढ़ी को गुमराह करने की कोशिश की। उन्होंने साफ कहा कि “पद महत्वपूर्ण नहीं था”, बल्कि युवाओं की आकांक्षाएं और देश का भविष्य कहीं ज्यादा अहम मुद्दा है।

उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क कर इस्तीफे की पेशकश की थी। यानी उनके अनुसार यह फैसला बाहरी दबाव से ज्यादा उनका निजी निर्णय था।

Gen-Z को लेकर क्या तर्क दिया?

प्रधान ने अपने भाषण में युवा पीढ़ी की संख्या का हवाला भी दिया। उनके मुताबिक भारत में हर साल करीब दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं, और पिछले दस वर्षों में लगभग बीस करोड़ बच्चे इस पीढ़ी का हिस्सा बने हैं। उन्होंने इसी आधार पर कहा कि यही युवा आगे चलकर भारत को नई पहचान दिलाएंगे।

यह आंकड़ा प्रधान के अपने बयान का हिस्सा था, इसे स्वतंत्र जनसांख्यिकीय डेटा के तौर पर नहीं बल्कि उनकी राजनीतिक टिप्पणी के तौर पर देखा जाना चाहिए।

घटनाक्रम की टाइमलाइन

धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा: कब क्या हुआ (टाइमलाइन)

तारीख / समय घटनाक्रम
NEET विवाद के दौरान जंतर-मंतर पर छात्रों-युवाओं के विरोध-प्रदर्शन तेज हुए।
25 जुलाई 2026 धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया।
इसके बाद करीब दो हफ्ते प्रधान ने सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी।
9 अगस्त 2026 GM यूनिवर्सिटी में छात्रों-शिक्षकों के बीच पहली प्रमुख प्रतिक्रिया दी।

ओडिशा में नवीन पटनायक पर भी निशाना

इसी दौरे में प्रधान ने ओडिशा में अपने खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों पर भी बात की। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक पर आरोप लगाया कि उन्होंने युवाओं को अपने खिलाफ प्रदर्शन के लिए उकसाया।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफे पर पहला बयान, बोले- पद अहम नहीं था

एयरपोर्ट के पास BJD के युवा और छात्र संगठनों की ओर से हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए प्रधान ने कहा कि उन्हें “वापस जाओ” जैसे नारों से कोई परेशानी नहीं है। खुद को किसान का बेटा बताते हुए उन्होंने कहा कि अगर उन्हें वापस जाने के लिए कहा जाएगा, तो भी वह वापस आएंगे।

BJD की ओर से भी इस पर पलटवार आया। पार्टी के एक नेता ने छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए।

यह बयान अहम क्यों है?

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा NEET पेपर लीक विवाद और उससे जुड़े छात्र आंदोलन के बीच हुआ था, जिसने राजनीतिक हलकों में काफी हलचल पैदा की। ऐसे में उनका यह पहला विस्तृत बयान दोहरे मायनों में अहम है — एक तरफ यह इस्तीफे की वजह साफ करता है, दूसरी तरफ यह आने वाले वक्त में Gen-Z और छात्र आंदोलन को लेकर उनकी सियासी रणनीति का संकेत भी देता है।

प्रधान का यह आरोप कि “कुछ लोगों ने Gen-Z को गुमराह करने की कोशिश की”, उनका राजनीतिक बयान है। इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं, बल्कि उनके पक्ष के तौर पर पढ़ा जाना चाहिए।

मुख्य बातें एक नजर में

  • धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया
  • इस्तीफे के करीब दो हफ्ते बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से इस पर बात की
  • उनके मुताबिक NEET विवाद के दौरान Gen-Z को गुमराह करने की कोशिश हुई
  • प्रधान ने खुद PM मोदी से संपर्क कर इस्तीफे की पेशकश की थी
  • उन्होंने कहा कि उनके लिए मंत्री पद अहम नहीं था
  • ओडिशा में नवीन पटनायक और BJD के प्रदर्शनों पर भी प्रतिक्रिया दी

प्रधान के इस बयान के बाद NEET विवाद और उनके इस्तीफे को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो सकती है। खासकर Gen-Z और छात्र आंदोलन को लेकर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में सामने आ सकती है। इस मामले से जुड़े NEET पेपर लीक की CBI चार्जशीट पर भी नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा कब दिया?
धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे की क्या वजह बताई?
उन्होंने कहा कि NEET विवाद के दौरान Gen-Z को गुमराह करने की कोशिश की गई, और उन्होंने खुद पीएम मोदी से इस्तीफे की पेशकश की थी।

धर्मेंद्र प्रधान ने Gen-Z के बारे में क्या कहा?
उन्होंने Gen-Z को अपने बच्चों जैसा बताते हुए कहा कि उनकी अपनी आकांक्षाएं हैं और वे भारत के भविष्य में अहम भूमिका निभाएंगे।

क्या प्रधान ने कहा कि पद उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं था?
हां, उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मंत्री पद उनके लिए अहम नहीं था।

धर्मेंद्र प्रधान ने यह बयान कहां दिया?
उन्होंने भुवनेश्वर की GM यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए यह बयान दिया।

स्रोत: Aaj Tak और The Indian Express की 8-9 अगस्त 2026 की रिपोर्टों पर आधारित।

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लेखक

Rakesh Kumar

नमस्कार, मैं राकेश कुमार हूँ। PAHALI KHABAR के माध्यम से मैं आपके लिए ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, खेल और अन्य महत्वपूर्ण खबरें लेकर आता हूँ। मेरा उद्देश्य है कि आपको हर खबर सरल भाषा में, सही तथ्यों के साथ और समय पर मिले।

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