NEET पेपर लीक CBI चार्जशीट मामले ने तस्वीर बदल दी है। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने दिल्ली के रोज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसमें कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA के तीन विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जिन पर प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग करने का सीधा आरोप है।
जांच एजेंसी के मुताबिक 3 मई को हुई NEET-UG परीक्षा के लीक होने की जड़ें हफ्तों पहले तक जाती हैं। प्रश्नपत्र प्रिंट होने के बाद नहीं, बल्कि अप्रैल में चल रही ट्रांसलेशन और प्रूफरीडिंग प्रक्रिया के दौरान ही सवाल बाहर निकल गए थे। यही वजह है कि परीक्षा रद्द कर 21 जून को दोबारा कराई गई थी।
NEET पेपर लीक CBI चार्जशीट में क्या है खास
चार्जशीट में नाम आए तीन एक्सपर्ट्स की पहचान बॉटनी की मनीषा गुरुनाथ मंदारे, केमिस्ट्री के प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी और फिजिक्स की मनीषा संजय हवलदार के रूप में हुई है। CBI ने कुलकर्णी को इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार करार दिया है। तीनों को मार्च के अंत से अप्रैल की शुरुआत तक दिल्ली स्थित NTA मुख्यालय की पहली मंजिल पर बने गोपनीय सेक्शन में ट्रांसलेशन, बैक-ट्रांसलेशन और प्रूफरीडिंग के काम पर लगाया गया था।
कैसे हुई पेपर की चोरी
चार्जशीट में दर्ज ब्योरे के अनुसार गोपनीय सेक्शन में काम के दौरान विशेषज्ञों को रफ वर्क के लिए सादे कागज दिए जाते थे। आरोप है कि कुलकर्णी ने इन्हीं कागजों पर केमिस्ट्री के सभी 135 प्रश्न और उनके उत्तर विकल्प संक्षेप में छोटी पर्चियों पर उतार लिए और उन्हें कार्यालय से बाहर ले गए। आसान सवालों को वे सिर्फ याद रखते थे और शाम को होटल लौटने के बाद कॉपी में लिख लेते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि लीक हुए पेपर के दो सेट्स को कथित तौर पर ‘कैलाश’ और ‘शिवालिक’ जैसे कोडनेम दिए गए थे, ताकि बातचीत के दौरान पहचान न हो सके।

मंदारे पर आरोप है कि वे बॉटनी और जूलॉजी के जिन हिस्सों का अनुवाद कर रही थीं, शाम को होटल पहुंचकर उन्हीं अध्यायों को NCERT की किताबों में चिन्हित कर देती थीं। बरसों के शिक्षण अनुभव के चलते वे सिर्फ प्रश्न पढ़कर संबंधित अध्याय पहचान लेती थीं। वहीं हवलदार पर फिजिक्स के प्रश्नों को संक्षेप में नोट करने और दिल्ली स्थित अपने ठहरने के स्थान पर पहुंचकर उन्हें दोबारा लिखने का आरोप है।
सुरक्षा में कहां हुई चूक
जांच एजेंसी ने सबसे बड़ी खामी NTA के गोपनीय सेक्शन की सुरक्षा व्यवस्था में मानी है। चार्जशीट के मुताबिक वहां आने-जाने वाले विशेषज्ञों की न तो नियमित तलाशी ली जाती थी, न ही कोई सीसीटीवी लाइव मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम मौजूद था। दिनभर के काम के बाद विशेषज्ञों को शाम को अपने-अपने होटल लौटने की छूट थी, जिसका फायदा उठाकर वे याद किए गए और नोट किए गए सवाल आसानी से बाहर ले जाने में कामयाब रहे।

CBI का यह भी दावा है कि पुणे लौटने के बाद कुलकर्णी और मंदारे ने अप्रैल में अपने घरों पर कथित तौर पर खास कोचिंग क्लास चलाईं, जहां छात्रों को सवाल, जवाब के विकल्प और सही उत्तर तक बताए गए। ये क्लास 3 मई को हुई परीक्षा से ठीक पहले आयोजित की गई थीं, यानी लीक का फायदा सीधे कुछ चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया।
बिचौलियों की कड़ी और पैसों का खेल
चार्जशीट में तीन एक्सपर्ट्स के अलावा 10 अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें तेजस शाह, शिवराज मोटेगांवकर, डॉ. मनोज शिरुरे, मनीषा संजय वाघमारे, धनंजय लोखंडे, शुभम खैरनार, यश यादव, मंगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल और विकास बिवाल शामिल हैं। जांच में सामने आया कि प्रश्नपत्र वाघमारे से शुरू होकर कई बिचौलियों से गुजरता हुआ अभ्यर्थियों तक पहुंचा। नासिक के खैरनार ने कथित तौर पर लोखंडे को पेपर के बदले 25 लाख रुपये दिए, जबकि मंगीलाल बिवाल ने यादव से टेलीग्राम के जरिए सवाल हासिल करने के लिए अपने दसवीं-बारहवीं के मूल प्रमाणपत्र और एक हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक बतौर गारंटी सौंप दिए थे।

जांच में एक और चौंकाने वाला ब्योरा सामने आया है। एक अभ्यर्थी और उसके पिता को कथित तौर पर 4 लाख रुपये में पेपर के साथ-साथ कोचिंग और ऑफलाइन रिवीजन क्लास का पूरा पैकेज ऑफर किया गया था। वाघमारे के घर से मिले मोबाइल फोन में ‘NEET 2026’ नाम का एक व्हाट्सऐप ग्रुप भी मिला है, जिसे जांच एजेंसी इस पूरी साजिश के समन्वय का जरिया मान रही है।
आरोपियों पर लगीं कौन-सी धाराएं
CBI ने तीनों एक्सपर्ट्स पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5) के तहत आपराधिक विश्वासघात का आरोप लगाया है, जिसमें उम्रकैद या दस साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। सबूत मिटाने के आरोप में धारा 238 भी जोड़ी गई है। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की धाराएं भी लगाई गई हैं, जिनमें सात से दस साल तक की सजा और न्यूनतम 10 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान है। गौरतलब है कि ये सभी आरोप अभी अदालत में साबित होने बाकी हैं।
2024 और 2026 के मामलों में फर्क समझिए
यह चार्जशीट NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़ी है, न कि 2024 वाले उस विवादित मामले से जिसमें बिहार के सॉल्वर गैंग और संजीव मुखिया का नाम सुर्खियों में रहा था। दोनों मामलों की जांच अलग-अलग है और CBI हाल ही में 2024 के मामले में मुखिया को क्लीनचिट भी दे चुकी है। ऐसे में अभ्यर्थियों और अभिभावकों के लिए यह समझना जरूरी है कि मौजूदा चार्जशीट पूरी तरह नए और अलग मामले से जुड़ी है।
अब आगे क्या
इस पूरे विवाद के बाद NTA ने अपने यहां बड़े स्तर पर सफाई अभियान चलाते हुए 47 कर्मचारियों को हटाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मामले पर सख्त कार्रवाई का भरोसा पहले दे चुके हैं। फिलहाल मामला विशेष अदालत में विचाराधीन है और सभी आरोपों पर सुनवाई अभी बाकी है। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस नेटवर्क से जुड़े कुछ और लोग अभी भी जांच के दायरे से बाहर हैं।