“अब UPI पर भी पैसा लगेगा!” — पिछले कुछ हफ्तों में आपके WhatsApp ग्रुप्स में भी यह संदेश जरूर आया होगा। लेकिन ठहरिए। असलियत क्या है? UPI charges को लेकर फैली आधी-अधूरी जानकारी के बीच एक ताजा और अहम अपडेट आया है — और अच्छी खबर यह है कि फिलहाल आपकी जेब पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा। आइए, सवाल-जवाब में समझते हैं पूरी कहानी।

सवाल 1: UPI charges क्या हैं — क्या वाकई चार्ज लगेगा?
हां, लेकिन बहुत सीमित दायरे में। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का फैसला किया है। यह चार्ज ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर लगेगा और प्रति लेनदेन अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा। यानी ₹3,000 के पेमेंट पर ₹12, ₹50,000 पर ₹200 और ₹75,000 या उससे ज्यादा पर सिर्फ ₹300।
कुछ कैटेगरी के लिए विशेष दरें हैं — रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल पर ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर एकमुश्त ₹5, और कैपिटल मार्केट्स पर 0.02% (अधिकतम ₹300)।
सवाल 2: यह चार्ज कब से लागू होगा?
यहीं सबसे बड़ा अपडेट है। यह चार्ज 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाला था, लेकिन 13 अक्टूबर को NPCI की UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने इसे दिवाली के बाद तक स्थगित कर दिया। नई तारीख अभी घोषित नहीं हुई है — समिति ने कहा है कि “तुरंत दिवाली के बाद, अलग से अधिसूचित तिथि” से यह लागू होगा। इस साल दिवाली 8 नवंबर को है, यानी चार्ज नवंबर के मध्य से पहले लागू होने की उम्मीद नहीं है।
कमेटी ने फैसला त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए लिया, ताकि खरीदारी के पीक सीजन में व्यापारियों और ग्राहकों को कोई दिक्कत न हो।
सवाल 3: क्या यह चार्ज मुझे देना होगा?
नहीं। यह सबसे अहम बात है — UPI charges दुकानदार (मर्चेंट) देगा, आप नहीं। वित्त मंत्रालय के फ्रेमवर्क में साफ कहा गया है कि मर्चेंट यह चार्ज ग्राहकों पर नहीं थोप सकता। QR कोड स्कैन करके पेमेंट करना आपके लिए पहले जैसा ही मुफ्त रहेगा।
सवाल 4: क्या दोस्तों को पैसे भेजना भी महंगा होगा?
बिल्कुल नहीं। पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त रहेंगे — चाहे रकम कितनी भी हो। दोस्तों को पैसे भेजना, परिवार को ट्रांसफर करना या बिल बांटना, सब पहले जैसा ही फ्री है।
सवाल 5: छोटे दुकानदारों का क्या होगा?
छोटे दुकानदारों के लिए राहत है। जीरो-MDR फ्रेमवर्क के तहत आने वाले छोटे मर्चेंट इस चार्ज से छूट प्राप्त रहेंगे। NPCI के अनुसार, लगभग 96% पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन इस चार्ज के दायरे से बाहर रहेंगे। यानी आपकी गली की चाय की दुकान, किराना स्टोर या ऑटो वाले पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा — सिर्फ बड़े और मध्यम आकार के व्यापारियों के ₹2,000 से ऊपर के लेनदेन पर यह लागू होगा।
सवाल 6: दिवाली की शॉपिंग पर इसका क्या असर पड़ेगा?
कोई असर नहीं। चार्ज दिवाली के बाद लागू होगा, तो त्योहारी सीजन की खरीदारी — चाहे ऑनलाइन हो या दुकान पर — पहले जैसी ही मुफ्त UPI पेमेंट के साथ होगी। यही वजह है कि NPCI ने टाइमिंग बदली।
सवाल 7: तो फिर WhatsApp की अफवाहों में कितना सच था?
आधा सच, आधा डर। अफवाहों ने यह तो सही कहा कि कोई चार्ज आ रहा है, लेकिन यह गलत बताया कि हर UPI पेमेंट पर पैसा लगेगा। सच यह है कि आम ग्राहक के लिए कुछ नहीं बदलेगा — चार्ज सिर्फ बड़े व्यापारियों के बड़े लेनदेन पर है, वह भी दिवाली के बाद। NPCI प्रमुख दिलीप असबे ने पहले कहा था कि इस फ्रेमवर्क से मिलने वाला राजस्व डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में ही निवेश किया जाएगा — साउंडबॉक्स और AI-आधारित समाधानों जैसी तकनीकों में।
निष्कर्ष
UPI charges की कहानी का सार एक लाइन में — आपकी जेब सुरक्षित है। QR स्कैन कीजिए, दोस्तों को पैसे भेजिए, दिवाली की शॉपिंग कीजिए — सब पहले जैसा मुफ्त। बदलाव सिर्फ बड़े व्यापारियों के ₹2,000 से ऊपर के लेनदेन पर है, और वह भी दिवाली के बाद। तो अगली बार कोई “UPI महंगा हो गया” वाला फॉरवर्ड आए, तो यह आर्टिकल उसे भेज दीजिए।
स्रोत: WeNotice और TechChaska
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