विश्व पोलियो दिवस 2026 पर आज 24 अक्टूबर है — यह दिन हर साल उस बीमारी के खिलाफ दुनिया की सबसे बड़ी जीत की याद दिलाता है, जिसने कभी हर साल लाखों बच्चों को अपंग बना दिया था। भारत के लिए यह दिन खास तौर पर गर्व का है, क्योंकि 12 साल पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत को आधिकारिक तौर पर पोलियो मुक्त घोषित किया था।
लेकिन यह जीत एक दिन में नहीं मिली। इसके पीछे तीन दशक की मेहनत, लाखों स्वास्थ्य कर्मियों की पदयात्रा और एक ऐसा नारा है, जो आज भी हर भारतीय के दिल में बसा है — ‘दो बूंद जिंदगी की’।
विश्व पोलियो दिवस 2026: सवाल-जवाब में समझें पूरी कहानी
विश्व पोलियो दिवस क्यों मनाया जाता है?
विश्व पोलियो दिवस हर साल 24 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत रोटरी इंटरनेशनल ने की थी। यह तारीख पोलियो वैक्सीन के जनक जोनास साल्क के जन्मदिन से जुड़ी है। आज WHO, UNICEF, रोटरी इंटरनेशनल और अमेरिकी CDC का गठबंधन — ग्लोबल पोलियो उन्मूलन पहल (GPEI) — इस दिन को दुनिया से पोलियो खत्म करने के अभियान के लिए जागरूकता और संसाधन जुटाने के मौके के तौर पर मनाता है।
भारत में पोलियो की कहानी कहां से शुरू हुई?
भारत में पोलियो उन्मूलन की असली शुरुआत 1995 में हुई, जब सरकार ने पल्स पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया। इस अभियान में तय राष्ट्रीय टीकाकरण दिवसों पर पांच साल से कम उम्र के हर बच्चे को पोलियो की दो बूंदें पिलाई जाती थीं। लाखों आशा कार्यकर्ता, एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और स्वयंसेवक गांव-गांव, झुग्गी-झोपड़ी और रेलवे स्टेशनों तक पहुंचे। गर्मी हो या बाढ़, यह अभियान रुका नहीं।
भारत को पोलियो मुक्त कब घोषित किया गया?
भारत में जंगली पोलियोवायरस का आखिरी मामला 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा में दर्ज हुआ था। इसके बाद तीन साल तक निगरानी में कोई नया मामला नहीं मिला। आखिरकार 27 मार्च 2014 को WHO ने भारत सहित पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र को पोलियो मुक्त प्रमाणित किया। तब यह माना गया था कि इतनी बड़ी आबादी और भौगोलिक जटिलता वाले देश में यह लगभग असंभव काम था।
आज भी पोलियो की बूंदें क्यों पिलाई जाती हैं?
यह सबसे आम सवाल है। जवाब सीधा है — प्रमाणन का मतलब स्थायी सुरक्षा नहीं है। पोलियोवायरस आज भी पड़ोसी पाकिस्तान और अफगानिस्तान में फैल रहा है। इसलिए भारत अपनी सीमाओं — पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और म्यांमार से लगते इलाकों में लगातार टीकाकरण दल चलाता है। अगर किसी बच्चे की इम्युनिटी में गैप रहा, तो वायरस वापस आ सकता है।
इस साल विश्व पोलियो दिवस पर नेताओं ने क्या कहा?
विश्व पोलियो दिवस 2026 पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने कहा कि भारत की पोलियो मुक्त स्थिति टीकाकरण के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता का प्रमाण है, लेकिन वायरस के आयात के खतरे के प्रति सतर्क रहना होगा और हर बच्चे की सुरक्षा के प्रयास तेज करने होंगे।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘दो बूंद जिंदगी की’ के नारे को याद करते हुए कहा कि सबसे बड़े जन-स्वास्थ्य लक्ष्य भी छोटे-छोटे निरंतर प्रयासों से ही हासिल होते हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी नागरिकों से भारत को हमेशा पोलियो मुक्त बनाए रखने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
माता-पिता के लिए 4 जरूरी बातें
- टीकाकरण कार्ड जांचें: बच्चे का टीकाकरण कार्ड डॉक्टर या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से मिली अनुसूची से मिलाकर देखें।
- अभियान के दौर में बूंदें जरूर पिलवाएं: पांच साल से कम उम्र के बच्चों को अभियान के हर दौर में पोलियो की बूंदें दिलवाएं।
- अचानक कमजोरी को हल्के में न लें: बच्चे में अचानक कमजोरी या लकवे का कोई लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- अधूरा टीकाकरण खतरनाक है: सुरक्षा एक खुराक से नहीं, पूरी अनुसूची पूरी करने से मिलती है।
क्यों है यह कहानी आज भी प्रासंगिक?
पोलियो की कहानी सिर्फ एक बीमारी की हार की कहानी नहीं है। यह इस बात का सबूत है कि जब सरकार, स्वास्थ्य कर्मी और आम लोग एक लक्ष्य पर एकजुट हो जाएं, तो सबसे मुश्किल चुनौती भी जीती जा सकती है। यही सबक आज के हर टीकाकरण अभियान — चाहे वह किसी भी बीमारी का हो — पर लागू होता है।
विश्व पोलियो दिवस हमें यही याद दिलाता है: जीत हासिल करना बड़ी बात है, लेकिन उसे बनाए रखना उससे भी बड़ी जिम्मेदारी है।
नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है।
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स्रोत
- Nation Press: नड्डा — भारत को पोलियो पर सतर्क रहना होगा
- Boldsky: विश्व पोलियो दिवस 2026 — तारीख, थीम और महत्व
