लेखक: पहली खबर डेस्क
यस बैंक एटी1 बॉन्ड को लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को यस बैंक के ₹8,415 करोड़ के एटी1 बॉन्डों को रद्द (राइट-ऑफ) करने के फैसले को गैरकानूनी और मनमाना करार देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के 20 जनवरी 2023 के फैसले को बरकरार रखा। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने यस बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और केंद्र सरकार की ओर से दायर अपीलें खारिज कर दीं।
मुख्य बातें: एक नजर में
- सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को यस बैंक के ₹8,415 करोड़ के एटी1 बॉन्ड राइट-ऑफ को रद्द करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया।
- कोर्ट ने यस बैंक, आरबीआई और केंद्र सरकार की अपीलें खारिज कर दीं और राइट-ऑफ को गैरकानूनी व मनमाना बताया।
- मामला मार्च 2020 के यस बैंक पुनर्गठन से जुड़ा है, जब 14 मार्च 2020 को प्रशासक ने सभी एटी1 बॉन्ड एक झटके में रद्द कर दिए थे।
- फैसले से हजारों संस्थागत और खुदरा बॉन्डधारकों को बड़ी राहत मिली है, जिनका निवेश पूरी तरह मिट गया था।
- फैसले के बाद गुरुवार को यस बैंक के शेयर करीब 13–15 फीसदी तक टूटे; एनएसई पर शेयर ₹16.96 के इंट्राडे निचले स्तर तक गया।

एटी1 बॉन्ड होते क्या हैं?
एटी1 बॉन्ड बैंकों के ऐसे स्थायी ऋणपत्र होते हैं जो संकट में नुकसान सोखने के लिए बने हैं। इन पर अधिक ब्याज मिलता है, लेकिन राइट-ऑफ का जोखिम भी रहता है — यानी गंभीर संकट में ये बॉन्ड पूरी तरह रद्द हो सकते हैं। 2023 में क्रेडिट सुइस के बॉन्डों के रद्द होने के बाद दुनियाभर में एटी1 बॉन्ड चर्चा में आए थे। भारत में यस बैंक एटी1 बॉन्ड का मामला इसका सबसे बड़ा घरेलू उदाहरण बन गया।
मार्च 2020 में क्या हुआ था?
यस बैंक ने 23 दिसंबर 2016 को ₹3,000 करोड़ और 18 अक्टूबर 2017 को ₹5,415 करोड़ के एटी1 बॉन्ड जारी किए थे — कुल ₹8,415 करोड़। 2020 की शुरुआत में बैंक की हालत बिगड़ने पर सरकार ने 5 मार्च 2020 को बैंक पर रोक (मॉरेटोरियम) लगा दी और आरबीआई ने एक प्रशासक नियुक्त किया।
इसके बाद यस बैंक लिमिटेड पुनर्गठन योजना 2020 का मसौदा तैयार हुआ, जिसमें एटी1 बॉन्डों के स्थायी राइट-ऑफ का प्रस्ताव था। लेकिन 13 मार्च 2020 को जब केंद्र सरकार ने अंतिम योजना अधिसूचित की, तो उसमें यह प्रस्ताव शामिल नहीं था। बावजूद इसके, 14 मार्च 2020 को प्रशासक ने आरबीआई के बेसल-III मास्टर सर्कुलर का हवाला देते हुए पूरे ₹8,415 करोड़ के बॉन्ड रद्द कर दिए। बॉन्डधारकों की ओर से एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज ने इस कदम को अदालत में चुनौती दी।
यस बैंक एटी1 बॉन्ड पर कोर्ट ने क्या कहा?
यस बैंक एटी1 बॉन्ड विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि चूंकि केंद्र सरकार की अंतिम अधिसूचित पुनर्गठन योजना में एटी1 बॉन्डों के राइट-ऑफ का कोई प्रावधान नहीं था, इसलिए प्रशासक का यह कदम गैरकानूनी और मनमाना था। Bar and Bench रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले में कोई खामी नहीं पाई और तीनों अपीलें — यस बैंक, आरबीआई और केंद्र सरकार की — खारिज कर दीं।
बॉन्डधारकों और बाजार पर असर
यस बैंक एटी1 बॉन्ड विवाद में यह फैसला उन हजारों निवेशकों के लिए बड़ी राहत है, जिनका पैसा 2020 में एक ही झटके में शून्य हो गया था। इनमें पेंशन फंड व म्यूचुअल फंड जैसे संस्थागत निवेशक और अधिक ब्याज के लालच में बॉन्ड खरीदने वाले खुदरा निवेशक भी शामिल हैं। बॉन्डधारकों के वकील श्रीजन सिन्हा (एडिक्टम लॉ एंड कंपनी) ने इस कदम को पहले से ही गैरकानूनी और मनमाना बताया था।
दूसरी ओर, शेयर बाजार ने फैसले को नकारात्मक रूप में लिया। गुरुवार को यस बैंक के शेयर करीब 13–15 फीसदी तक टूट गए — एनएसई पर शेयर ₹16.96 के इंट्राडे निचले स्तर तक फिसला और अंत में करीब ₹18.12 पर बंद हुआ। बाजार को डर है कि बैंक को अब बॉन्डधारकों को बड़ा भुगतान करना पड़ सकता है, जिससे उसकी बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ेगा। जापान का एसएमबीसी बैंक यस बैंक में करीब 24.99 फीसदी हिस्सेदारी रखता है, इसलिए यह फैसला उसके लिए भी अहम है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला बैंकिंग क्षेत्र के लिए नियामकीय अनिश्चितता पैदा करता है। BusinessLine रिपोर्ट के मुताबिक, अब यह सवाल उठेगा कि भविष्य में संकटग्रस्त बैंकों के पुनर्गठन में एटी1 बॉन्डों के साथ कैसा व्यवहार किया जाएगा। शेयर बाजार की ऐसी ही हलचल के बीच जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की खबर भी निवेशकों के बीच चर्चा में है। वहीं केंद्र सरकार के ताजा फैसलों पर भी अदालतों की नजर बनी हुई है।
आगे क्या होगा?
फैसले के बाद अब यस बैंक को यस बैंक एटी1 बॉन्ड धारकों के दावों का निपटारा करना होगा, हालांकि भुगतान की सटीक प्रक्रिया और समयसीमा अभी तय होनी बाकी है। बैंक इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका जैसे कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर सकता है। निवेशकों के लिए सबक साफ है — अधिक रिटर्न वाले बॉन्डों में निवेश से पहले उनके जोखिमों को समझना जरूरी है।

