बारिश ने जिस कार्यक्रम को एक दिन के लिए टाल दिया था, वह आज दिल्ली में होने जा रहा है। CEC जन महाभियोग के नाम से विपक्ष का यह प्रतीकात्मक कार्यक्रम शनिवार, 31 अक्टूबर को दोपहर 3:30 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आधिकारिक आवास, 10 राजाजी मार्ग पर आयोजित होगा। शुक्रवार को लगातार बारिश के कारण खरगे आवास का लॉन कीचड़ में बदल गया था, इसलिए विपक्षी दलों ने आपसी सहमति से कार्यक्रम को एक दिन आगे बढ़ाने का फैसला किया था।
CEC जन महाभियोग: आज के कार्यक्रम की रूपरेखा क्या है?
तय रूपरेखा के अनुसार पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार इस प्रतीकात्मक कार्यवाही की अध्यक्षता करेंगी। मल्लिकार्जुन खरगे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव रखेंगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अंतिम वक्ता होंगे। इसके बाद प्रस्ताव पर मतदान भी कराया जाएगा। खबरों के अनुसार 21 दलों के 30 से अधिक वक्ता इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।
कार्यक्रम का मंच भले ही खरगे आवास का लॉन हो, लेकिन विपक्ष इसे ‘सड़क पर संसद’ का नाम दे रहा है। राहुल गांधी ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा था कि यह कार्यक्रम और इसके बाद रविवार की रैली, दोनों का मकसद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जनता के सामने अपनी बात रखना है। उन्होंने राजनीतिक दलों के साथ-साथ नागरिक समाज, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को भी इसमें शामिल होने का न्योता दिया है।
यह संवैधानिक महाभियोग क्यों नहीं है?
यह समझना सबसे जरूरी है कि आज का कार्यक्रम कोई औपचारिक संवैधानिक महाभियोग नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का अधिकार सिर्फ संसद के पास है, वह भी सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने जैसी प्रक्रिया से — दोनों सदनों में विशेष बहुमत के साथ। खरगे आवास पर होने वाली कार्यवाही की कोई कानूनी बाध्यता नहीं होगी; यह विपक्ष का प्रतीकात्मक राजनीतिक प्रदर्शन है, जिसके जरिए वह जनता के बीच अपना आरोप दर्ज कराना चाहता है।
विपक्ष का आरोप क्या है?
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान गड़बड़ियां होने दीं और ‘वोट चोरी’ की शिकायतों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की। INDIA गठबंधन लंबे समय से SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का कहना है कि लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटने या गलत तरीके से दर्ज होने से लोकतंत्र की बुनियाद पर असर पड़ता है। चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों को पहले भी खारिज किया जाता रहा है। इस खबर में विपक्ष के आरोपों को विपक्ष के दावे के रूप में ही पेश किया जा रहा है, किसी स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं।
कल रामलीला मैदान में क्या होगा?
आज के कार्यक्रम के अगले दिन, रविवार 1 नवंबर को INDIA गठबंधन दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘चलो दिल्ली’ मार्च और ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली आयोजित करेगा। राहुल गांधी के अनुसार कनॉट प्लेस से रामलीला मैदान तक मार्च होगा, जिसमें राजनीतिक दलों के साथ गैर-राजनीतिक संगठन और आम नागरिक भी शामिल हो सकते हैं। विपक्ष इस रैली को अपने अभियान का अगला बड़ा पड़ाव मान रहा है, जबकि आज का कार्यक्रम उसके लिए एक तरह का curtain-raiser है।

व्यापारियों की चिंता: दिवाली सीजन में रैली?
दूसरी ओर, दिल्ली के व्यापारियों ने रैली के समय को लेकर अपनी चिंता आज फिर जाहिर की है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने शनिवार को रामलीला मैदान के पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले 20 बड़े थोक बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू किया है। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, कनॉट प्लेस, करोल बाग और पहाड़गंज जैसे बाजार शामिल हैं।
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल का कहना है कि रैली के कारण करीब 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का त्योहारी कारोबार प्रभावित हो सकता है और 20 लाख व्यापारियों के साथ करीब 75 लाख लोगों की आजीविका पर असर पड़ सकता है। संगठन का दावा है कि रैली में करीब 10 लाख लोग और 20 हजार वाहन आ सकते हैं, जबकि रामलीला मैदान के आसपास इतनी पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। CTI ने राहुल गांधी को तीन पत्र लिखकर रैली टालने की अपील की है और सोनिया गांधी से भी हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने दो विकल्प सुझाए हैं — रैली को दिवाली के बाद तक टाल दिया जाए, या फिर उसे बुराड़ी ग्राउंड में आयोजित किया जाए। विपक्ष की ओर से अब तक रैली की तारीख बदलने पर सहमति नहीं बनी है।
आगे क्या देखें?
आज दोपहर खरगे आवास पर होने वाली कार्यवाही में विपक्ष के प्रस्ताव का मजमून, मतदान का नतीजा और राहुल गांधी का समापन भाषण सबसे ज्यादा ध्यान खींचेगा। इसके बाद सबकी नजर रविवार की रैली पर होगी — उसमें कितनी भीड़ जुटती है, ट्रैफिक और बाजारों पर क्या असर पड़ता है, और चुनाव आयोग या सरकार की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है। एक बात साफ है: मतदाता सूची को लेकर छिड़ी यह सियासी लड़ाई अभी थमने वाली नहीं है।

