इज़राइल के चुनाव की अंतिम गिनती पूरी हो गई है, और नतीजा एक राजनीतिक गतिरोध है। इजरायल चुनाव परिणाम 2026 के अनुसार प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गुट को 120 सदस्यीय नेसेट में 53 सीटें मिली हैं — बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों से 8 कम। विपक्षी गुट को 48 सीटें मिली हैं, जबकि अरब दलों ने मिलकर रिकॉर्ड 19 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया है।

यह चुनाव मंगलवार को हुआ था और 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद इज़राइल का पहला राष्ट्रीय चुनाव था। यही वजह है कि मतदान प्रतिशत 77.9 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो दशकों में सबसे ज्यादा बताया जा रहा है। मतगणना में डबल-लिफाफा मतों — यानी सैनिकों, अस्पतालों और विदेश में रह रहे मतदाताओं के करीब साढ़े चार लाख मतों — की गिनती आखिर तक चली।
सीटों का गणित: कौन कहां खड़ा है?
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी अकेले सबसे बड़ी पार्टी बनी है — उसे 27 सीटें मिली हैं। उनके गुट में शास और रिलिजियस ज़ायनिज्म को 6-6 सीटें, जबकि यूनाइटेड टोराह ज्यूडिज्म और ओत्ज़्मा येहुदित को 7-7 सीटें मिली हैं। कुल मिलाकर यह गुट 53 पर पहुंचा, जो पिछली नेसेट में उसके 68 सीटों के मुकाबले 15 सीटों की बड़ी गिरावट है।
दूसरी ओर, गादी आइज़ेनकोट की याशर पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट को 48 सीटें मिली हैं, जिसमें याशर अकेले 21 सीटों पर है। अरब दलों — राअम (8 सीटें) और जॉइंट लिस्ट (11 सीटें) — ने मिलकर 19 सीटें जीती हैं। यानी गैर-नेतन्याहू खेमे के पास कुल 67 सीटें हैं, लेकिन वह भी एकजुट गुट नहीं है।
‘चोरी’ का आरोप और चुनाव आयोग का जवाब
नतीजों के साथ विवाद भी जुड़ गया है। लिकुड ने आरोप लगाया है कि अरब दलों ने चुनाव ‘चुरा’ लिया है और इसमें विदेशी दखल की आशंका जताई है। केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष जस्टिस नोआम सोलबर्ग ने इस पर शिन बेट (इज़राइल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी) के प्रमुख को पत्र लिखकर जांच का अनुरोध किया।
हालांकि चुनाव समिति ने साफ कहा है कि व्यवस्थित धांधली के आरोप बेबुनियाद हैं, और शिन बेट ने भी स्पष्ट किया है कि उसकी जांच अंतिम नतीजों पर कोई असर नहीं डालेगी और इसका मकसद अरब मतदाताओं पर शक करना नहीं है। समिति के अनुसार प्रमाणित नतीजे 4 नवंबर को राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग को सौंपे जाएंगे, जिसके बाद वे पार्टी नेताओं से सलाह करके सरकार बनाने का जिम्मा किसी एक नेता को देंगे। नई नेसेट का शपथ ग्रहण 10 नवंबर को होना है।
इजरायल चुनाव परिणाम 2026: अब सरकार कैसे बनेगी?
रास्ते तीन दिख रहे हैं। पहला — नेतन्याहू किसी तरह दलबदल या छोटे दलों के समर्थन से 61 का आंकड़ा जुटाएं, जो फिलहाल मुश्किल दिख रहा है। दूसरा — विपक्ष अरब दलों के साथ मिलकर बहुमत बनाए, जो राजनीतिक रूप से जोखिम भरा कदम माना जा रहा है क्योंकि अरब दलों के साथ सरकार बनाना इज़राइली राजनीति में दुर्लभ और विवादास्पद रहा है। तीसरा — लिकुड और विपक्षी दलों की एकता सरकार, जो सैद्धांतिक रूप से 66 सीटों तक पहुंच सकती है, लेकिन इसमें भी भारी मतभेद आड़े आएंगे।
अगर सरकार बनाने की कोशिशें नाकाम रहीं, तो इज़राइल अगले साल की शुरुआत में फिर चुनाव की ओर बढ़ सकता है। तब तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में बने रहेंगे। एक बात साफ है — मतदाताओं ने किसी को स्पष्ट जनादेश नहीं दिया है, और अब सरकार की कुंजी उन दलों के हाथ में है जो अब तक हाशिए पर थे।
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