एशियन पैरा गेम्स भारत 114 पदक — आइची-नागोया में शनिवार को समापन समारोह के साथ एशियन पैरा गेम्स 2026 का पर्दा गिर गया, और भारत के लिए यह खेल अब तक के सबसे सुनहरे अध्याय के रूप में याद रखे जाएंगे। भारतीय दल ने 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य सहित कुल 114 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। यह भारत का इन खेलों के पांच संस्करणों में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। पिछला सर्वश्रेष्ठ 2022 के हांगझोउ खेलों में 108 पदक था, जिसे नागोया में पीछे छोड़ दिया गया। स्वर्ण पदकों की संख्या 30 भी भारत के लिए नया मानक है।
एशियन पैरा गेम्स भारत 114 पदक: अंतिम पदक तालिका में भारत कहां रहा
चीन 435 पदकों (207 स्वर्ण) के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि मेजबान जापान 186 पदकों के साथ दूसरे और उज्बेकिस्तान 145 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। भारत के लिए चौथा स्थान आखिरी दिन तक पक्का नहीं था, क्योंकि दक्षिण कोरिया 100 पदकों तक पहुंच गया था। लेकिन कोरिया को सिर्फ 29 स्वर्ण मिले, यानी भारत ने महज एक स्वर्ण के अंतर से चौथा स्थान बचा लिया। ईरान 26 स्वर्ण के साथ छठे स्थान पर रहा।
किस खेल ने कितने पदक दिलाए
भारत की सफलता की सबसे बड़ी धुरी पैरा एथलेटिक्स रही, जिसने अकेले 65 पदक (22 स्वर्ण, 19 रजत, 24 कांस्य) दिलाए। पैरा बैडमिंटन से 16 पदक (3 स्वर्ण, 5 रजत, 8 कांस्य), पैरा तैराकी से 11, पैरा टेबल टेनिस से 7 कांस्य, पैरा तीरंदाजी से 6 पदक (3 स्वर्ण, 3 रजत) और पैरा निशानेबाजी से 5 पदक आए। पैरा जूडो से 2 और पैरा पावरलिफ्टिंग से 2 पदक मिले। यह फैलाव बताता है कि भारत की सफलता अब किसी एक खेल तक सीमित नहीं रही।
किन सितारों ने रचा इतिहास
इस अभियान के सबसे चमकते सितारों में तीरंदाज शीतल देवी रहीं, जिन्होंने व्यक्तिगत और तोमन कुमार के साथ मिश्रित टीम स्पर्धा में दो स्वर्ण जीते और एक रजत भी जोड़ा। संदीप कुमार ने पुरुषों की 400 मीटर टी44 स्पर्धा में 52.28 सेकंड के विश्व रिकॉर्ड के साथ भारत का 100वां पदक दिलाया। धाविका सिमरन शर्मा ने 100 मीटर और 200 मीटर टी12 में खेल रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण जीते, जबकि दीप्ति जीवनजी ने 400 मीटर टी20 में खिताब का बचाव करते हुए खेल रिकॉर्ड बनाया। निशाद कुमार ने लंबी कूद और ऊंची कूद में दो स्वर्ण जीते, मोना अग्रवाल ने एयर राइफल में खेल रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण जीता और दो बार की पैरालंपिक चैंपियन अवनि लेखरा ने रजत पदक अपने नाम किया। भारतीय दल ने तीन बार पोडियम स्वीप भी किया, जिनमें पुरुषों की शॉट पुट एफ46 स्पर्धा में सचिन खिलारी का 15.87 मीटर के खेल रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण भी शामिल है।
168 खिलाड़ियों के दल की कहानी
भारत ने 11 खेलों में 168 खिलाड़ियों का दल उतारा था, जिसकी अगुवाई उद्घाटन समारोह में ध्वजवाहक प्रमोद भगत और सिमरन शर्मा ने की थी। यह प्रदर्शन सिर्फ पदकों की गिनती नहीं है, बल्कि विशेष कोचिंग, आधुनिक उपकरणों और अंतरराष्ट्रीय अनुभव में हुए निवेश का नतीजा है। पैरा खेलों को अब देश में वह पहचान मिलने लगी है, जिसकी वे हकदार हैं।
आगे की राह
नागोया का प्रदर्शन पैरालंपिक चक्र की तैयारियों के लिए मजबूत आधार है। चुनौती अब इस लय को बनाए रखने की है — युवा पैरा एथलीटों की पहचान, खेल विज्ञान और वित्तीय सहायता के जरिए। अगर यह गति बनी रही तो अगला लक्ष्य चौथे से तीसरे स्थान की ओर बढ़ना होगा, जो अब दूर नहीं दिखता।
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स्रोत: Sportscape Magazine | Techword News
