शीतल देवी जब धनुष उठाती हैं, तो पूरी दुनिया सांसें थाम लेती है। जम्मू-कश्मीर की 18 साल की यह पैरा तीरंदाज़ जन्म से ही दोनों हाथों से वंचित हैं — फिर भी पैरों से धनुष थामकर निशाना लगाने वाली शीतल ने नागोया में ऐसा कमाल किया कि उनका नाम एशियन पैरा गेम्स 2026 के सबसे चमकीले सितारों में दर्ज हो गया। एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक, एक वर्ल्ड रिकॉर्ड और एक सिल्वर।
मिक्स्ड टीम गोल्ड: इंडोनेशिया को 151-148 से हराया
गुरुवार 22 अक्टूबर को आइची-नागोया में शीतल ने तोमन कुमार के साथ कंपाउंड मिक्स्ड टीम फाइनल में इंडोनेशिया की जोड़ी (तेओदोरा ऑडी अयुदिया फेरेली और केन स्वागुमिलांग) को 151-148 से हराकर भारत को इस संस्करण का पहला तीरंदाजी स्वर्ण दिलाया।
फाइनल में भारतीय जोड़ी ने पहले ही एंड में 38-37 की बढ़त बनाई। दूसरे एंड में तीन परफेक्ट शॉट्स के साथ बढ़त 77-73 हो गई, तीसरे एंड के बाद 113-110 और आखिरी एंड में भारत ने 151-148 से मुकाबला अपने नाम कर लिया। तोमन कुमार का औसत एरो स्कोर 9.63 और शीतल का 9.25 रहा। सेमीफाइनल में चीनी ताइपे के खिलाफ 142-141 की कांटे की जीत और क्वार्टरफाइनल में जापान पर 154-147 की जीत ने फाइनल का रास्ता खोला था।

वर्ल्ड रिकॉर्ड: क्वालिफिकेशन में 1402 अंक
इस स्वर्ण की नींव 19 अक्टूबर के क्वालिफिकेशन राउंड में पड़ी थी। शीतल ने 720 में से 704 अंक बटोरे — वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी और नया एशियाई रिकॉर्ड। तोमन के 698 अंकों के साथ दोनों का संयुक्त स्कोर 1402 हुआ, जो मिक्स्ड टीम क्वालिफिकेशन का नया वर्ल्ड रिकॉर्ड है (पुराना रिकॉर्ड भी भारत के ही 1400 अंकों का था)।
व्यक्तिगत फाइनल: 4 अंक पिछड़कर भी गोल्ड
असली नाटक तो व्यक्तिगत कंपाउंड फाइनल में हुआ। सिंगापुर की नूर स्याहिदा अलीम के खिलाफ शीतल 55-59 से पिछड़ गई थीं — 4 अंक का घाटा। लेकिन 18 साल की इस चैंपियन ने हार नहीं मानी। लगातार दो परफेक्ट 30 स्कोर किए और 142-139 से मुकाबला पलट दिया। इसी के साथ उन्होंने हांगझोऊ 2023 के अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव भी किया।
एक ही दिन में तीन पदक, भारत का 16वां-17वां स्वर्ण
मिक्स्ड टीम और व्यक्तिगत स्पर्धा के दो स्वर्ण के अलावा शीतल ने पायल नाग के साथ महिला कंपाउंड डबल्स में रजत पदक भी जीता (चीन की जोड़ी से 141-150 से हार)। इस तरह उन्होंने 2023 एशियन पैरा गेम्स के अपने तीन पदकों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।
यही दिन भारत के लिए और भी यादगार रहा — सुवर्णा राज ने महिला डिस्कस थ्रो F54 में 15.66 मीटर के थ्रो से स्वर्ण जीता, जो भारत का 16वां स्वर्ण था। शीतल का व्यक्तिगत स्वर्ण 17वां बना। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने शीतल और तोमन को बधाई देते हुए इसे #Cheer4Bharat का गौरवपूर्ण क्षण बताया।
शीतल देवी की कहानी सिर्फ पदकों की नहीं है — यह इच्छाशक्ति की है। पैरों से तीर चलाने वाली यह बेटी आज दुनिया की सर्वश्रेष्ठ पैरा तीरंदाज़ों में गिनी जाती है, और नागोया ने एक बार फिर यह साबित कर दिया।
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