रामपुर की जिला जेल का मुख्य द्वार। शाम के करीब सात बजे हैं। करीब ग्यारह महीने बाद जेल से बाहर आ रहे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के समर्थक बाहर इंतजार कर रहे हैं। लेकिन आजादी की यह घड़ी कुछ ही मिनटों की मेहमान साबित हुई। जेल के बाहर पहले से मौजूद प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने आजम खान को हिरासत में ले लिया। इस तरह एक रिहाई, देखते ही देखते एक नई कानूनी लड़ाई में बदल गई। आजम खान ED हिरासत का यह घटनाक्रम 31 अक्टूबर 2026 की शाम का है, और इसकी गूंज अब 1 नवंबर को गाजियाबाद की विशेष अदालत तक पहुंचने वाली है।
एक नजर में: क्या हुआ?
- कब: 31 अक्टूबर 2026 की शाम, करीब 7 बजे
- कहां: रामपुर जिला जेल के मुख्य द्वार पर
- कौन: समाजवादी पार्टी नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान
- किसने हिरासत में लिया: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम
- किस मामले में: मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े ट्रस्ट से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग जांच
- बेटे का क्या हुआ: अब्दुल्ला आजम रिहा होकर घर पहुंच गए
- आगे क्या: रिपोर्टों के अनुसार 1 नवंबर को गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत में पेशी संभव

रिहाई कैसे मिली थी?
आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड रखने के मामले में नवंबर 2025 में रामपुर की अदालत ने सात-सात साल की सजा सुनाई थी। बाद में राज्य सरकार की अपील पर मई 2026 में आजम खान की सजा बढ़ाकर दस साल कर दी गई, जबकि अब्दुल्ला की सात साल की सजा बरकरार रही।
29 अक्टूबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति समित गोपाल की पीठ ने दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर कर ली। यह बात समझना जरूरी है कि अदालत ने दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई थी — यानी यह आदेश सजा के क्रियान्वयन से अंतरिम राहत था, आरोपों से बरी करने का फैसला नहीं।
जमानत के बाद रामपुर की एमपी-एमएलए अदालतों में रिहाई की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने में दो दिन लग गए। शुक्रवार को ही रिहाई की उम्मीद थी, लेकिन कुछ परवाने जारी नहीं हो सके थे। शनिवार को सभी औपचारिकताएं पूरी हुईं और दोनों के बाहर आने का रास्ता साफ हुआ।
जेल के गेट पर क्या हुआ?
रिपोर्टों के अनुसार ED की टीम शाम करीब 6:15 बजे ही जेल के मुख्य द्वार पर पहुंच गई थी। टीम के साथ भारी सुरक्षा बल और सीआरपीएफ के जवान मौजूद थे। जैसे ही आजम खान शाम करीब सात बजे जेल से बाहर निकले, अधिकारियों ने उन्हें घेर लिया और एक आदेश दिखाते हुए हिरासत में ले लिया।
इसके बाद ED की टीम उन्हें पूछताछ के लिए गाजियाबाद स्थित अपने कार्यालय ले गई। रामपुर के अधिकारियों के हवाले से आई खबरों में यही जानकारी दी गई है कि आजम खान को जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए ले जाया गया है। कुछ रिपोर्टों में इस कार्रवाई को गिरफ्तारी भी कहा गया है, जबकि कुछ में हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए ले जाना बताया गया है। इस फर्क को लेकर अभी आधिकारिक स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है, इसलिए इस खबर में हम इसे हिरासत की कार्रवाई के रूप में ही दर्ज कर रहे हैं।
दो अलग मामले, एक ही शाम
इस घटनाक्रम को समझने के लिए दो मामलों का फर्क साफ होना चाहिए। पहला मामला दो पैन कार्ड से जुड़ा है, जिसमें हाईकोर्ट से जमानत मिली और रिहाई हुई। दूसरा मामला मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है, जिसमें ED जांच कर रही है। ED का कहना है कि विश्वविद्यालय के निर्माण में खर्च की गई रकम और घोषित वित्तीय विवरणों के बीच अंतर की जांच हो रही है। एजेंसी के आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में होना बाकी है।
जेल से बाहर आने के बाद आजम खान ने मीडिया से बातचीत में अपनी नाराजगी जाहिर की। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने कहा, “अब कहने को क्या है? मैं क्या कहूं? कानून का वजूद खत्म हो चुका है। क्या यह एक मुसलमान होने की सजा है? हमारी गलती यह थी कि एक मुसलमान ने यूनिवर्सिटी बनाई।” अब्दुल्ला आजम ने भी कहा कि उनका सबसे बड़ा दुश्मन उनका नाम है और इसी की सजा उन्हें दी जा रही है। ये बयान संबंधित नेताओं के अपने विचार हैं, और इन पर अदालत या जांच एजेंसी की ओर से अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब आगे क्या होगा?
रिपोर्टों के अनुसार ED आजम खान को रविवार, 1 नवंबर को गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत में पेश कर सकती है, जहां एजेंसी पूछताछ के लिए रिमांड की मांग कर सकती है। अदालत रिमांड देती है या नहीं, और ED आगे क्या दलील रखती है, इस पर सबकी नजर रहेगी। साथ ही, दो पैन कार्ड मामले में अपील की कार्यवाही हाईकोर्ट में अलग से चलती रहेगी।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति के बड़े नाम रहे हैं और रामपुर से उनका लंबा जुड़ाव है। उनकी रिहाई और तुरंत बाद की हिरासत ने एक बार फिर जांच एजेंसियों की कार्रवाई और राजनीति के रिश्ते पर बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही ही यह तय करेगी कि इस मामले का अगला मोड़ क्या होगा।
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