शिमला सड़क हादसा दरोटी में शनिवार सुबह हुआ, जिसमें मां-बेटे समेत पांच लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल के टिक्कर-नावर क्षेत्र में दरोटी गांव के पास पानु नाला के पास हुआ, जब एक मारुति कार अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे गहरी खाई में जा गिरी। सुबह करीब 8:20 से 8:30 बजे के बीच हुए इस हादसे ने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है।

शिमला सड़क हादसा दरोटी: एक नजर में
- जगह: दरोटी गांव, पानु नाला के पास, टिक्कर-नावर क्षेत्र, रोहड़ू, शिमला
- समय: शनिवार सुबह करीब 8:20-8:30 बजे
- वाहन: मारुति कार, सवार 6 लोग
- मौत: 5 (मां-बेटे समेत), घायल: 1 गंभीर
- कारण: जांच जारी, अभी स्पष्ट नहीं
कैसे हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार दरोटी गांव निवासी कुशल अपनी मां कल्पना देवी और कुछ नेपाली मजदूरों को वाहन में बैठाकर सुबह घास काटने के लिए ले जा रहा था। इसी दौरान गुजांदली और दरोटी के बीच पानु नामक स्थान पर कार अचानक अनियंत्रित हो गई और सड़क के ऊपर वाले हिस्से से गिरकर नीचे खाई में पहुंच गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वाहन में सवार पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय लोगों के अनुसार यह पहाड़ी सड़क घुमावदार है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
मृतकों की पहचान
मृतकों की पहचान दरोटी निवासी कुशल (27 वर्ष, पुत्र प्रमोद) और उनकी मां कल्पना देवी (47 वर्ष, पत्नी प्रमोद) के रूप में हुई है। इनके साथ वाहन में सवार तीन नेपाली नागरिकों — निर्मला (पत्नी पवन), मीना (पत्नी प्रेम) और रोशनी (पुत्री प्रेम) — की भी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि कुशल अपनी स्थानीय पंचायत का वार्ड सदस्य भी था। एक युवा जनप्रतिनिधि और उसकी मां सहित पांच लोगों की एक साथ हुई मौत से पूरा गांव शोक में है।
घायल की हालत और जांच
हादसे में गंभीर रूप से घायल एक नेपाली मजदूर प्रेम को पहले टिक्कर अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया, फिर नाजुक हालत में शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) रेफर कर दिया गया है। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वाहन किस वजह से खाई में गिरा। टिक्कर की तहसीलदार प्रियांजली और नायब तहसीलदार मेहर सिंह फिष्टा ने हादसे की पुष्टि की है।
शोक और राहत
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया है और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को फौरी राहत राशि भी प्रदान की गई है। पहाड़ी सड़कों पर इस तरह के हादसे हर साल कई जानें लेते हैं — घुमावदार मोड़ों पर धीमी गति, ओवरटेक से बचना और वाहन की नियमित जांच ही सबसे बड़ा बचाव है।
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