केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने केनरा बैंक से 212.34 करोड़ रुपये की कथित ठगी के मामले में मुंबई स्थित IL&FS एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड और उसके वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। केनरा बैंक के बांद्रा (पूर्व), मुंबई स्थित सर्किल कार्यालय की शिकायत पर यह FIR 21 अक्टूबर को दर्ज की गई, जिसके बाद 24 अक्टूबर को मुंबई, दिल्ली और नोएडा सहित कई स्थानों पर छापेमारी की गई।
FIR में कंपनी के प्रबंध निदेशकों और निदेशकों — सुनील वाधवा, अनूप सेठ, हरि शंकरन, रमेश चंद्र बावा और अरुण कुमार साहा — को नामजद किया गया है। इनके अलावा अज्ञात लोक सेवकों और अज्ञात निजी व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। सभी पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों का आरोप है।
केनरा बैंक घोटाला कैसे हुआ?
CBI के अनुसार आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत तत्कालीन सिंडिकेट बैंक (जो अब केनरा बैंक में विलय हो चुका है) की मुंबई स्थित लार्ज कॉरपोरेट शाखा से 100 करोड़ रुपये का टर्म लोन और लंदन शाखा से 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर का विदेशी मुद्रा ऋण हासिल किया।
100 करोड़ रुपये का ऋण कंपनी की परियोजना इकाइयों के जरिए सोलर पार्क, पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए था, जबकि 5 करोड़ डॉलर की सुविधा मौजूदा और नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में लगी विशेष प्रयोजन इकाइयों को आगे उधार देने और भारतीय रिजर्व बैंक के बाहरी वाणिज्यिक उधारी नियमों के तहत अनुमत अन्य उपयोगों के लिए थी।
CBI का आरोप है कि कंपनी ने यह पैसा उन उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जिनके लिए इसे मंजूर किया गया था। इसके बजाय, रकम को सहयोगी कंपनियों के जरिए डायवर्ट और साइफन करके बैंक को 212.34 करोड़ रुपये का गलत नुकसान पहुंचाया गया।
छापों में क्या-क्या मिला?
FIR दर्ज होने के बाद CBI ने आरोपियों से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी ली। छापों के दौरान बैंक दस्तावेज, डिपॉजिट स्लिप, म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो दस्तावेज, निदेशकों के बैंक खातों और संपत्तियों का विवरण तथा कंपनी के लेजर जैसे आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद कर जब्त किए गए हैं। इन दस्तावेजों की अब जांच की जा रही है।
CBI ने कहा है कि जांच जारी है और साजिश के पूरे दायरे, धन के अंतिम उपयोग और इसमें शामिल सभी व्यक्तियों — जिनमें लोक सेवक भी शामिल हो सकते हैं — की भूमिका का पता लगाया जा रहा है। दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद नामजद निदेशकों की गिरफ्तारी या समन की भी संभावना है।
IL&FS संकट से जुड़ा है मामला
यह मामला IL&FS समूह के लंबे समय से चल रहे संकट से जुड़ा है। 2018 में तरलता संकट के बाद समूह की सहायक कंपनियों में कथित वित्तीय कुप्रबंधन सामने आया था, जिसके बाद समूह की कई इकाइयों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही चल रही है। IL&FS एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी के खिलाफ यह CBI मामला उसी कड़ी का हिस्सा है और समूह की इकाइयों तथा नेतृत्व पर जारी नियामक और जांच एजेंसियों की निगरानी को दर्शाता है।
फिलहाल किसी गिरफ्तारी की खबर नहीं है, लेकिन जांच के दायरे के बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। CBI की जांच का अगला चरण यह तय करेगा कि इस मामले में और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं।
बैंकिंग और जांच से जुड़ी अन्य खबरों के लिए पढ़ें: लखनऊ में ED दफ्तर पर CBI की रेड और SBI ग्राहकों का डेटा डार्क वेब पर। बाजार से जुड़ी खबर के लिए FPI निकासी का विश्लेषण देखें।
स्रोत: Nation Press और TradingView News
