लखनऊ ईडी रिश्वत कांड में शुक्रवार को एक ऐसी कार्रवाई हुई, जिसने केंद्रीय जांच एजेंसियों के गलियारों में हड़कंप मचा दिया। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लखनऊ जोनल कार्यालय में तैनात दो अधिकारियों को 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार अधिकारियों की पहचान प्रवर्तन अधिकारी दीपक कुमार और हेड कांस्टेबल मनोज द्विवेदी के रूप में हुई है।
यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि रिश्वत मांगने का आरोप उसी एजेंसी के अधिकारियों पर लगा है, जो खुद देश में आर्थिक अपराधों की जांच करती है। CBI की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का एक और उदाहरण बताया जा रहा है।
लखनऊ ईडी रिश्वत कांड: कैसे शुरू हुआ मामला?
CBI के मुताबिक, यह पूरा मामला 23 अक्टूबर 2026 को दर्ज की गई एक शिकायत से शुरू हुआ। शिकायतकर्ता के पिता के खिलाफ ED में एक मामला चल रहा था। इस मामले में उन्हें अगस्त और सितंबर 2026 में दो समन मिले थे।
आरोप है कि इसके बाद हेड कांस्टेबल मनोज द्विवेदी ने शिकायतकर्ता के पिता से संपर्क किया और ED के मामले में मदद करने के नाम पर रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता ने इस मांग की जानकारी CBI को दी। CBI ने शिकायत का सत्यापन किया और फिर जाल बिछाने की योजना बनाई।
जाल बिछाकर रंगे हाथों पकड़ा
CBI की टीम ने तय योजना के तहत शिकायतकर्ता को रिश्वत की रकम लेकर भेजा। जैसे ही हेड कांस्टेबल मनोज द्विवेदी ने प्रवर्तन अधिकारी दीपक कुमार की ओर से 5 लाख रुपये की रिश्वत स्वीकार की, CBI की टीम ने मौके पर दबिश देकर दोनों को रंगे हाथों धर दबोचा।
CBI के प्रवक्ता ने बयान में कहा कि दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है। गिरफ्तारी के बाद CBI ने दोनों अधिकारियों के कार्यालय कक्षों और निजी आवासों पर भी छापेमारी शुरू कर दी है, ताकि रिश्वतखोरी के इस नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य साक्ष्यों का पता लगाया जा सके।
कौन हैं दोनों आरोपी?
- दीपक कुमार: ED के लखनऊ जोनल कार्यालय में प्रवर्तन अधिकारी। महत्वपूर्ण मामलों की जांच प्रक्रिया से जुड़े थे।
- मनोज द्विवेदी: हेड कांस्टेबल, मूल रूप से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान, वर्तमान में प्रतिनियुक्ति पर ED में सेवाएं दे रहे थे। आरोप है कि वे प्रवर्तन अधिकारी की ओर से रिश्वत की रकम ले रहे थे।
क्या है ED और CBI का काम?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) देश में मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा कानूनों के उल्लंघन की जांच करती है, जबकि CBI देश की प्रमुख जांच एजेंसी है जो भ्रष्टाचार सहित गंभीर अपराधों की जांच करती है। जब एक जांच एजेंसी दूसरी एजेंसी के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करती है, तो यह व्यवस्था के भीतर जवाबदेही का एक मजबूत संकेत माना जाता है।
आगे क्या होगा?
दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। CBI अब यह पता लगा रही है कि क्या इस रिश्वतखोरी के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है, और क्या पहले भी इसी तरह की रकम वसूली गई थी। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी पद या एजेंसी का नाम सुरक्षा कवच नहीं बन सकता।
और पढ़ें
- हिमांशु भाऊ गिरफ्तार: अमेरिका में ICE की कार्रवाई
- श्रद्धा दुबे गिरफ्तार: नागपुर शिवा शर्मा मामला
- SC-ST एक्ट दुरुपयोग: सुप्रीम कोर्ट ने SBI अधिकारियों के खिलाफ FIR रद्द की
स्रोत
- Latestly: लखनऊ में CBI ने ED के दो अधिकारियों को रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया
- Young Bharat News: ED प्रवर्तन अधिकारी और हेड कांस्टेबल लखनऊ में रिश्वत लेते गिरफ्तार
लखनऊ ईडी रिश्वत कांड की जांच में CBI अब यह भी देख रही है कि क्या इसी तरह की मांग पहले भी की गई थी। लखनऊ ईडी रिश्वत कांड को लेकर जांच एजेंसियों की जवाबदेही पर भी चर्चा हो रही है।
