
वडोदरा के कोटांबी स्टेडियम में 25 अक्टूबर को खेला गया दूसरा वनडे भारतीय महिला क्रिकेट के लिए एक यादगार दिन बन गया। हरमनप्रीत कौर शतक के साथ न सिर्फ टीम को मुश्किल से उबारा, बल्कि एक ऐसा रिकॉर्ड भी अपने नाम किया जो भारतीय क्रिकेट में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
शुरुआत में ही लड़खड़ाई टीम
जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे वनडे में कप्तान स्मृति मंधाना ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी, लेकिन शुरुआत किसी बुरे सपने जैसी रही। मंधाना बिना खाता खोले आउट हो गईं और शेफाली वर्मा सिर्फ 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। स्कोरबोर्ड पर 19 रन पर 2 विकेट गिर चुके थे और दबाव बढ़ता जा रहा था।
ऐसे में क्रीज पर आईं पूर्व कप्तान हरमनप्रीत कौर ने पारी को संभालने का जिम्मा उठाया। सलामी बल्लेबाज प्रतीका रावल ने 67 गेंदों पर 61 रन बनाकर उनका अच्छा साथ दिया, लेकिन उनके आउट होने के बाद तेजल हसबनीस भी सिर्फ 3 रन पर चलती बनीं। एक समय भारत का स्कोर 148 रन पर 4 विकेट था।
हरमनप्रीत कौर शतक: हरमनप्रीत-दीप्ति की साझेदारी ने बदला खेल
इसके बाद हरमनप्रीत और दीप्ति शर्मा ने ऐसी साझेदारी की जिसने मैच का रुख ही पलट दिया। दोनों ने संभलकर लेकिन आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी की और टीम को 300 रन के पार पहुंचाया। हरमनप्रीत ने 101 गेंदों पर अपना शतक पूरा किया और अंत में 121 गेंदों पर 15 चौकों की मदद से 126 रन बनाए। दीप्ति शर्मा ने भी नाबाद 106 रन की पारी खेली — 86 गेंदों पर 15 चौकों के साथ।
भारत ने दूसरा वनडे जीतकर तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। पहला वनडे भी भारत ने 9 विकेट से जीता था, जिसमें हरमनप्रीत को बल्लेबाजी का मौका ही नहीं मिला था।
हरमनप्रीत कौर शतक: मिताली राज का रिकॉर्ड टूटा
इस शतक के साथ हरमनप्रीत के नाम महिला वनडे में 8 शतक हो गए हैं। उन्होंने पूर्व कप्तान मिताली राज (7 शतक) को पीछे छोड़ दिया है। अब भारतीय महिलाओं में उनसे आगे सिर्फ कप्तान स्मृति मंधाना हैं, जिनके नाम 14 शतक दर्ज हैं। इसके बाद पूनम राउत, जेमिमा रोड्रिग्स और प्रतीका रावल के नाम 3-3 शतक हैं।
एक और खास रिकॉर्ड भी इस पारी से जुड़ा। 37 साल 231 दिन की उम्र में शतक लगाकर हरमनप्रीत महिला वनडे में शतक लगाने वाली चौथी सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गई हैं। इस सूची में न्यूजीलैंड की बार्ब बेवेज (39 साल 48 दिन) सबसे ऊपर हैं।
कप्तानी बदलने के बाद नया अध्याय
इस सीरीज से पहले एक बड़ा बदलाव हुआ था — बीसीसीआई अधिकारियों से मुलाकात के बाद स्मृति मंधाना को टीम की कप्तानी सौंपी गई और हरमनप्रीत को बल्लेबाजी पर ध्यान देने की सलाह दी गई। तीसरे टी20 में उन्होंने 41 गेंदों पर नाबाद 91 रन बनाए थे और अब वनडे शतक के साथ यह संदेश साफ है कि बल्ले से वह अभी भी टीम की सबसे बड़ी ताकत हैं।
हरमनप्रीत कौर शतक की यह पारी सिर्फ एक शतक नहीं, अनुभव और निरंतरता की मिसाल है। 37 साल की उम्र में भी वह दबाव में टीम को संभालना जानती हैं — और यही वजह है कि भारतीय महिला क्रिकेट में उनका नाम अब मिताली राज से आगे, सिर्फ मंधाना के पीछे लिखा जाएगा।
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