ITC Q2 नतीजे 2 नवंबर की शाम को जारी हुए, तो पहली नज़र में खबर बुरी लगी — मुनाफा 20% घट गया। लेकिन अगले दिन, 3 नवंबर को शेयर बाजार खुला तो ITC का शेयर लगभग वहीं टिका रहा, जहां पहले था। सवाल उठता है कि मुनाफा इतना घटने के बाद भी निवेशकों ने घबराहट क्यों नहीं दिखाई? जवाब नतीजों की भीतरी परतों में छिपा है।

ITC Q2 नतीजे: नतीजों में क्या आया?
ITC Q2 नतीजे के मुताबिक, कंपनी का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा जुलाई-सितंबर तिमाही में ₹4,137.12 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹5,175.70 करोड़ से करीब 20% कम है। कंसोलिडेटेड आधार पर मुनाफा 18.45% घटकर ₹4,229.33 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल यह ₹5,186.55 करोड़ था।
दूसरी तरफ, आय का आंकड़ा मज़बूत दिखा। कंसोलिडेटेड परिचालन आय 43.85% बढ़कर ₹30,578.4 करोड़ हो गई। कंपनी ने खुद कहा कि उसके सभी गैर-सिगरेट कारोबारों में मज़बूत बढ़त दर्ज हुई है। यानी कहानी सिर्फ मुनाफे के घटने की नहीं, बल्कि कारोबार के भीतर हो रहे बड़े बदलाव की है।
मुनाफा क्यों घटा?
सबसे बड़ी वजह सिगरेट कारोबार पर बढ़ा टैक्स है। नई कर व्यवस्था लागू होने के बाद सिगरेट कारोबार का परिचालन मुनाफा सालाना आधार पर 27.23% घटकर ₹3,813.45 करोड़ रह गया। ऊंचे टैक्स ने वैध खपत और मार्जिन दोनों पर दबाव डाला। दिलचस्प बात यह है कि सिगरेट सेगमेंट की आय बढ़ी हुई दिखती है, लेकिन यह बढ़त करों के लेखांकन से जुड़ी है — असली कमाई यानी मुनाफा घटा है।
इसका असर कंपनी के कुल मार्जिन पर भी पड़ा। ब्याज, टैक्स, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई (EBITDA) 17% घटकर ₹5,160 करोड़ रह गई, और EBITDA मार्जिन पिछले साल के 31.15% से सिकुड़कर 18.22% पर आ गया।
फिर शेयर क्यों नहीं गिरा?
इसके तीन कारण हैं। पहला, मुनाफा भले घटा हो, लेकिन वह बाजार के अनुमान से थोड़ा बेहतर रहा — विश्लेषकों का अनुमान ₹4,129 करोड़ का था, और वास्तविक आंकड़ा ₹4,137 करोड़ रहा। दूसरा, गैर-सिगरेट FMCG कारोबार ने 14 तिमाहियों का सबसे अच्छा प्रदर्शन दिया, जिसमें स्टेपल्स, स्नैक्स और पर्सनल वॉश जैसे उत्पादों में दो अंकों की बढ़त दर्ज हुई। तीसरा, ब्रोकरेज हाउसों का रुख सकारात्मक रहा — नुवामा ने ITC की रेटिंग बढ़ाकर ‘खरीदें’ कर दी और ₹310 का लक्ष्य मूल्य बरकरार रखा, जबकि एम्के और डीएएम कैपिटल ने भी खरीदारी की सलाह बनाए रखी।
नतीजों के बाद शेयर लगभग स्थिर रहा और ₹266-268 के दायरे में कारोबार करता दिखा। बाजार का संदेश साफ था — टैक्स का झटका एकमुश्त है, लेकिन कंपनी का गैर-सिगरेट कारोबार अब उसकी असली ताकत बनता जा रहा है। इस बीच हिंदू बिज़नेसलाइन की रिपोर्ट और afaqs की रिपोर्ट में भी मुनाफे में गिरावट और टैक्स के असर का ब्योरा दिया गया है।
आम ग्राहक पर क्या असर पड़ेगा?
आम ग्राहक के लिए सीधा संदेश यह है कि ITC के रोज़मर्रा के उत्पादों — आटा, स्नैक्स, साबुन, बिस्कुट — का कारोबार मज़बूत हो रहा है। कंपनी इस सेगमेंट में निवेश बढ़ा रही है, जिसका मतलब है कि आने वाले महीनों में नए उत्पाद और बेहतर उपलब्धता देखने को मिल सकती है। सिगरेट की कीमतों पर टैक्स का असर पहले से ही दिख रहा है, और यही वजह है कि वैध बिक्री पर दबाव बना हुआ है।
आगे क्या देखें?
आने वाली तिमाहियों में दो बातों पर नज़र रहेगी। पहली, क्या सिगरेट कारोबार का मार्जिन नई कर व्यवस्था के साथ स्थिर होता है या और दबाव आता है। दूसरी, क्या गैर-सिगरेट FMCG की यह रफ्तार बनी रहती है। अगर दोनों मोर्चों पर स्थिरता आती है, तो ITC की कहानी धीरे-धीरे एक सिगरेट कंपनी से एक विविध FMCG कंपनी की कहानी में बदल जाएगी — और यही बदलाव निवेशकों को सबसे ज्यादा दिलचस्प लग रहा है।
एक बात ध्यान रखने की है कि यह खबर जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं। शेयरों में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह ज़रूर लें।
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