
सोमवार की सुबह लखनऊ से सुल्तानपुर का रास्ता राहुल गांधी के लिए आसान नहीं रहा, लेकिन दोपहर तक दिन की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। सुबह पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर उनके काफिले की गाड़ियां आपस में टकरा गईं, और दोपहर को सुल्तानपुर की विशेष अदालत ने आठ साल पुराने मानहानि मामले में उन्हें बरी कर दिया। एक ही दिन में हादसे की खबर और अदालत के फैसले की खबर — दोनों ने इस मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया।
सुबह 10:15 बजे एक्सप्रेसवे पर क्या हुआ?
राहुल गांधी सोमवार सुबह लखनऊ पहुंचे और वहां से सड़क मार्ग से सुल्तानपुर के लिए रवाना हुए। पुलिस के हवाले से आई खबरों के मुताबिक, सुबह करीब 10:15 बजे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर सुल्तानपुर जिले के हलियापुर थाना क्षेत्र में, करीब 91 किलोमीटर मील के पत्थर के पास, काफिले में आगे चल रही एक निजी गाड़ी ने अचानक ब्रेक लगा दिए। पीछे चल रही गाड़ियां उससे टकरा गईं और एक के बाद एक कई गाड़ियों की टक्कर हो गई।
शुरुआती खबरों में चार से पांच गाड़ियों और एक एंबुलेंस के टकराने की बात कही गई। अच्छी खबर यह रही कि राहुल गांधी की गाड़ी काफिले में आगे थी और उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा। वह पूरी तरह सुरक्षित रहे और कुछ देर रुकने के बाद काफिला फिर सुल्तानपुर की ओर बढ़ गया। कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं और सुरक्षा कर्मियों के घायल होने की खबरें भी आईं, हालांकि घायलों की सही संख्या और चोटों की गंभीरता के बारे में शुरुआती रिपोर्टों में एकरूपता नहीं थी, इसलिए इस पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना ही सही होगा।
दोपहर को अदालत में क्या फैसला आया?
राहुल गांधी के सुल्तानपुर पहुंचने के बाद विशेष MP-MLA अदालत में 2018 के मानहानि मामले का फैसला सुनाया गया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणियां मानहानिकारक प्रकृति की नहीं थीं। अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। राहुल गांधी फैसले के समय खुद अदालत में मौजूद थे। उनके वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने अदालत के बाहर कहा कि अदालत ने शिकायत खारिज करते हुए उनके पक्ष में फैसला दिया है।
यह मामला 2018 में कैसे शुरू हुआ था?
यह मामला मई 2018 का है। उस समय कर्नाटक विधानसभा चुनाव का प्रचार चल रहा था। बेंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बारे में टिप्पणी की थी। शिकायत के मुताबिक, उन्होंने कहा था कि भारत के लोग भूल जाते हैं कि भाजपा के अध्यक्ष हत्या के मामले में आरोपी हैं, और जो पार्टी ईमानदारी की बात करती है, उसका अध्यक्ष हत्या का आरोपी रहा है।
इस टिप्पणी पर सुल्तानपुर के भाजपा नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि यह बयान अमित शाह की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला था। मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत दर्ज हुआ था, जिनमें मानहानि के अपराध में अधिकतम दो साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
राहुल गांधी का पक्ष शुरू से यही रहा कि उनकी टिप्पणी का मकसद किसी का अपमान करना नहीं था और शिकायत राजनीति से प्रेरित थी। अदालत में बहस के दौरान बचाव पक्ष ने कहा कि बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना था कि बयान देना ही अपने आप में काफी है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह फैसला पहले 13 अक्टूबर को आना था, लेकिन बाद में इसे 26 अक्टूबर के लिए टाल दिया गया था।
इस फैसले का क्या मतलब है?
पहली बात तो यह कि आठ साल चला एक मुकदमा अब खत्म हो गया है। किसी नेता के खिलाफ मानहानि का मुकदमा जब इतने लंबे समय तक चलता है, तो वह न सिर्फ उस नेता बल्कि पूरी राजनीतिक बहस पर असर डालता है। अदालत का यह कहना कि टिप्पणी मानहानिकारक नहीं थी, राजनीतिक बयानों और मानहानि के बीच की रेखा को लेकर एक अहम संकेत है।
दूसरी बात यह कि यह मामला राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे इकलौते मामले जैसा नहीं है। 2023 में सूरत की अदालत ने उन्हें ‘मोदी सरनेम’ वाली टिप्पणी पर मानहानि का दोषी ठहराया था और दो साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उनकी संसद सदस्यता भी गई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उस सजा पर रोक लगा दी थी, जिससे वह सांसद बने रहे। सुल्तानपुर का फैसला उससे अलग मामला है और इसका उस पुराने मामले पर सीधा असर नहीं पड़ता, लेकिन यह जरूर दिखाता है कि हर बयान को अदालत एक ही तराजू पर नहीं तौलती।
आगे क्या होगा?
फैसले के बाद शिकायतकर्ता पक्ष के पास ऊपरी अदालत में अपील का रास्ता खुला रहता है। वह इस फैसले को चुनौती दे सकता है, लेकिन अभी तक इस बारे में कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है। फिलहाल तय बात सिर्फ इतनी है कि सुल्तानपुर की अदालत ने राहुल गांधी को बरी कर दिया है और 2018 से चला आ रहा यह मामला फिलहाल खत्म हो गया है।
एक दिन में हादसे से बाल-बाल बचना और फिर अदालत से बरी होना — राहुल गांधी के लिए 26 अक्टूबर 2026 का दिन लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
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स्रोत: Live Law | Bar and Bench

