त्योहारों का सीजन चरम पर है, बाजारों में भीड़ बढ़ रही है और लोग खरीदारी के लिए बैंक खातों से नकदी निकाल रहे हैं। ठीक इसी मौके पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक बड़ा फैसला लिया है — 19 अक्टूबर को केंद्रीय बैंक ने RBI VRR auction के जरिए बैंकिंग सिस्टम में ₹1 लाख करोड़ की 7-दिवसीय नीलामी की घोषणा की। यह पिछले करीब तीन महीनों में आरबीआई का पहला ऐसा कदम है, जिससे बैंकों को अल्पकालिक नकदी की उपलब्धता होगी।

मुख्य तथ्य एक नजर में
- नीलामी की राशि: ₹1,00,000 करोड़ (7-दिवसीय)
- नीलामी की तारीख: सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 (सुबह 9:30–10:00)
- प्राप्त बोलियां: ₹1,50,735 करोड़ — नोटिफाइड राशि से डेढ़ गुना मांग
- आवंटित राशि: ₹1,00,014 करोड़, भारित औसत दर 5.52%, कटऑफ दर 5.51%
- रिवर्सल तिथि: 26 अक्टूबर 2026 (उसी दिन बैंकों को रकम लौटानी होगी)
- अगली नीलामी: बुधवार, 21 अक्टूबर को ₹50,000 करोड़ की और VRR नीलामी
RBI VRR auction क्या है? आसान भाषा में समझिए
वीआरआर यानी वेरिएबल रेट रेपो (Variable Rate Repo) नीलामी, रिजर्व बैंक का एक अल्पकालिक साधन है। इसमें बैंक केंद्रीय बैंक से 7 दिन या उससे कम अवधि के लिए सरकारी प्रतिभूतियां (government securities) गिरवी रखकर नकदी उधार लेते हैं। “वेरिएबल रेट” इसलिए क्योंकि इसमें बैंक खुद ब्याज दर पर बोली लगाते हैं — जो ज्यादा दर देगा, उसे पैसा मिलेगा।
यह पूरी प्रक्रिया लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (LAF) के तहत होती है। RBI ने यह साफ किया है कि नीलामी के संचालन दिशानिर्देश वही रहेंगे जो 20 जनवरी 2022 की प्रेस विज्ञप्ति में तय हुए थे। प्रेस विज्ञप्ति संख्या 2026-2027/1345 के तहत इसकी औपचारिक घोषणा डिप्टी जनरल मैनेजर (संचार) अजित प्रसाद के हस्ताक्षर से जारी हुई।
आरबीआई को यह कदम क्यों उठाना पड़ा?
इस सवाल के कई कारण हैं। पहला और सबसे बड़ा — त्योहारों के मौसम में नकदी की भारी निकासी। दशहरे-दिवाली के सीजन में कारोबार और भुगतान गतिविधियां तेज होती हैं, जिससे बैंकिंग सिस्टम में अस्थायी तंगी आ जाती है।
दूसरा कारण है ओवरनाइट कॉल मनी दरों में उछाल। 19 अक्टूबर को वेटेड एवरेज कॉल रेट (WACR) 5.67% पर पहुंच गया था, जो पॉलिसी रेपो दर 5.50% से 17 बेसिस पॉइंट ज्यादा है। आरबीआई का काम यह सुनिश्चित करना है कि ओवरनाइट दर रेपो दर के आसपास बनी रहे — इसलिए नकदी की आपूर्ति बढ़ानी पड़ी।
तीसरा कारण तकनीकी है। 16 अक्टूबर से डेली कैश रिजर्व अनुपात (CRR) की न्यूनतम रखरखाव सीमा 90% से बढ़ाकर 99% कर दी गई, जिससे बैंकों की नकदी प्रबंधन में लचीलापन कम हुआ। ताजा आंकड़ों के अनुसार, 18 अक्टूबर को बैंकिंग सिस्टम में अधिशेष तरलता घटकर ₹1,85,873 करोड़ रह गई थी — जबकि सितंबर में दैनिक औसत ₹7.8 लाख करोड़ था।
गौरतलब है कि अगस्त से आरबीआई तरलता सोखने के मोड में था (VRRR नीलामियां कर रहा था), लेकिन अब रुख बदल गया है — 29 जुलाई के बाद यह पहली VRR नीलामी है। विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयरों से निकासी और रुपये की चाल जैसे कारण भी बैंकों की नकदी स्थिति पर असर डाल रहे हैं।
क्या आपका होम लोन सस्ता होगा? आम लोगों पर असर
सबसे पहले ईमानदार बात — यह ₹1 लाख करोड़ सीधे आम लोगों की जेब में नहीं आएगा, और न ही इससे आपके होम लोन, पर्सनल लोन या कार लोन की EMI तुरंत घट जाएगी। यह पैसा बैंकों के लिए है, और सिर्फ 7 दिन के लिए।
लेकिन परोक्ष असर जरूर है। जब सिस्टम में तरलता बनी रहती है, तो बैंकों को अल्पकालिक जरूरतों के लिए महंगी उधारी नहीं लेनी पड़ती और बाजार में ब्याज दरों पर अचानक दबाव नहीं बनता। अगर VRR जैसी नीलामी न होती, तो त्योहारों के सीजन में क्रेडिट की लागत बढ़ सकती थी — जिसका असर अंततः ग्राहकों तक पहुंचता।
दूसरी ओर, हाल ही में रेपो दर में हुई 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का असर धीरे-धीरे कर्ज की दरों में दिखेगा। पर्याप्त तरलता से यह ट्रांसमिशन सुचारू होगा — यानी बढ़ी हुई दरें व्यवस्थित तरीके से बाजार तक पहुंचेंगी। तो अगर आप नया लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो अपने बैंक की मौजूदा शर्तों को जरूर समझ लें।
आगे क्या होगा?
RBI VRR auction की अगली कड़ी में बुधवार, 21 अक्टूबर को ₹50,000 करोड़ की एक और VRR नीलामी होगी। 26 अक्टूबर को यह नीलामी रिवर्स हो जाएगी — बैंकों को ली गई रकम लौटानी होगी।
कुल मिलाकर, यह कदम बताता है कि आरबीआई त्योहारी सीजन में नकदी की कमी को लेकर पूरी तरह सतर्क है — और बैंकों को झटका नहीं लगने देना चाहता।
स्रोत: The Hindu BusinessLine
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