कल्पना कीजिए — आपने कभी दो ही SIM कार्ड लिए हैं, लेकिन किसी सरकारी पोर्टल पर पता चलता है कि आपके नाम पर पांच नंबर चालू हैं। बाकी तीन किसके हैं? कौन इस्तेमाल कर रहा है? और सबसे बड़ा सवाल — अगर उन नंबरों से कोई ठगी हो जाए, तो जिम्मेदारी किसकी होगी? डरिए मत। सरकार ने इसका समाधान दे दिया है — और संचार साथी पोर्टल सिम चेक से यह जांच सिर्फ 2 मिनट में, बिल्कुल मुफ्त में हो जाती है।

आंकड़े चौंकाने वाले हैं। दूरसंचार विभाग के मुताबिक, अब तक 82 लाख से ज्यादा फर्जी मोबाइल कनेक्शन काटे जा चुके हैं — इनमें से कई दूसरों की पहचान का इस्तेमाल करके लिए गए थे। आपके नाम पर जारी एक अज्ञात SIM आपके लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है, क्योंकि बैंक खातों से लेकर सोशल मीडिया तक, सब कुछ OTP पर टिका है। इसलिए आज ही यह जांच कर लेना समझदारी है।
TAFCOP से ऐसे करें SIM की जांच — स्टेप बाय स्टेप
संचार साथी पोर्टल पर “अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शन जानें” (Know Mobile Connections in Your Name) नाम की सेवा है, जिसे पहले TAFCOP कहा जाता था। प्रक्रिया बेहद आसान है:
- पोर्टल खोलें: tafcop.sancharsaathi.gov.in या sancharsaathi.gov.in पर जाएं। यह दूरसंचार विभाग (DoT) की आधिकारिक सेवा है।
- मोबाइल नंबर डालें: अपना 10 अंकों का चालू मोबाइल नंबर लिखें और कैप्चा भरें।
- OTP से वेरिफाई करें: आपके फोन पर आया वन-टाइम पासवर्ड (OTP) डालकर लॉगिन करें।
- लिस्ट देखें: स्क्रीन पर आपके नाम पर जारी सभी मोबाइल कनेक्शन की सूची दिखेगी।
- रिपोर्ट करें: जो नंबर आपका नहीं है, उसके सामने “This is not my number” चुनें। जो पुराना नंबर आप इस्तेमाल नहीं करते, उसके लिए “Not Required” विकल्प है। फिर “Report” पर क्लिक करें।
- टिकट ID संभालकर रखें: रिपोर्ट करने पर आपको एक टिकट ID मिलेगी — इसे नोट कर लें, ताकि बाद में फॉलो-अप किया जा सके।
धोखाधड़ी की जांच का जिम्मा ऑपरेटर पर होता है। आधिकारिक प्रक्रिया के अनुसार, रिपोर्ट किए गए नंबर की पुन: जांच (re-verification) की जाती है — और अगर जांच में नंबर फर्जी पाया जाता है, तो उसे बंद कर दिया जाता है।
एक व्यक्ति के नाम पर कितनी SIM हो सकती हैं?
टेलीकॉम नियमों के मुताबिक, सामान्य रूप से एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन हो सकते हैं (कुछ क्षेत्रों में यह सीमा अलग हो सकती है)। अगर लिस्ट में 9 से ज्यादा नंबर दिखें, या कोई ऐसा नंबर दिखे जो आपने कभी लिया ही नहीं, तो यह खतरे की घंटी है — तुरंत रिपोर्ट करें।
संचार साथी पोर्टल सिम चेक के 4 पावरफुल फीचर — सिर्फ SIM चेक नहीं
1. चक्षु (Chakshu) — ठगी की रिपोर्ट: अगर आपको कोई संदिग्ध कॉल, SMS या WhatsApp मैसेज आए, तो उसे चक्षु के जरिए रिपोर्ट कर सकते हैं। यह फीचर साइबर ठगी के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।
2. CEIR — खोया फोन ब्लॉक करें: अगर आपका फोन चोरी हो जाए या गुम हो जाए, तो उसके IMEI नंबर से उसे ब्लॉक किया जा सकता है, ताकि कोई भी नेटवर्क पर उसका दुरुपयोग न कर सके। फोन मिल जाने पर अनब्लॉक भी किया जा सकता है।
3. IMEI जांच (Know Your Mobile): पुराना (सेकंड-हैंड) फोन खरीदने से पहले उसकी IMEI जांच जरूर करें — इससे पता चलता है कि फोन असली है, ब्लैकलिस्टेड तो नहीं, या डुप्लिकेट IMEI वाला तो नहीं। SMS से जांच के लिए KYM <15 अंकों का IMEI> लिखकर 14422 पर भेजें।
4. ऐप भी उपलब्ध: संचार साथी का ऐप Android और iOS दोनों पर मुफ्त है, जिसे अब तक करोड़ों बार डाउनलोड किया जा चुका है। पोर्टल की सारी सेवाएं ऐप पर भी मिलती हैं।
कुछ जरूरी बातें जो याद रखें
- असली पोर्टल कभी आपसे आधार नंबर नहीं मांगता। अगर कोई कॉल या मैसेज करके “सिम वेरिफिकेशन” के नाम पर आधार या OTP मांगे, तो वह ठगी है — उसे चक्षु पर रिपोर्ट करें।
- अपने पुराने, बंद पड़े कनेक्शनों को “Not Required” करके हटाना भी अच्छी आदत है। भुला दिया गया पुराना नंबर भविष्य में दुरुपयोग का जरिया बन सकता है।
- निष्क्रिय नंबर को दोबारा किसी और को देने से पहले 90 दिन का इंतजार अनिवार्य है — यह नियम आपकी सुरक्षा के लिए ही है।
डिजिटल ठगी के इस दौर में संचार साथी पोर्टल सिम चेक वह 2 मिनट का काम है, जो आपको लाखों के नुकसान से बचा सकता है। आज ही पोर्टल खोलिए, लिस्ट देखिए और जो आपका नहीं है, उसे रिपोर्ट कीजिए।
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स्रोत: संचार साथी आधिकारिक पोर्टल | विस्तृत गाइड

