सऊदी अरब ड्रोन हमला: 21 अक्टूबर की रात दम्माम के किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अरामको के शयबाह तेल फील्ड पर हुए हमलों में 3 लोगों की मौत हो गई और 10 घायल हुए। घटना के कुछ घंटों बाद अमेरिका ने अपने गैर-जरूरी राजनयिकों और उनके परिवारों को सऊदी अरब छोड़ने का आदेश दे दिया, जिससे क्षेत्र में बढ़ते तनाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
सऊदी अरब के जनरल अथॉरिटी ऑफ सिविल एविएशन (GACA) ने गुरुवार तड़के दिए बयान में कहा कि दम्माम के एयरपोर्ट पर हुए हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई और 8 लोग घायल हुए। घायलों की हालत मामूली से लेकर गंभीर बताई गई है, और सभी को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। एयरपोर्ट की इमारत को नुकसान भी पहुंचा है, जिसका आकलन किया जा रहा है। हमले के बाद फ्लाइट-ट्रैकिंग सर्विस Flightradar24 ने बताया कि विमानों को दम्माम एयरपोर्ट से दूसरे हवाई अड्डों की ओर मोड़ा गया।

शयबाह तेल फील्ड पर भी हमला
उसी दिन सुबह-सुबह अरामको के शयबाह तेल फील्ड पर एक ड्रोन को सऊदी हवाई रक्षा प्रणाली ने मार गिराया। ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, गिरते हुए मलबे से 2 लोगों की मौत हो गई — मृतकों में फिलीपींस और नेपाल के नागरिक शामिल हैं — और 2 अन्य घायल हुए। रिपोर्टों के अनुसार घायलों में पाकिस्तानी और भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। मलबे से एक ठेकेदार के वाहन में आग लग गई, हालांकि अरामको ने पुष्टि की है कि तेल उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ा है।
सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने बताया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने राज्य की ओर आ रहे पांच ड्रोनों को मार गिराया, जिनमें से कुछ ईस्टर्न प्रोविंस और मदीना क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे। अधिकारियों ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन हमलों की जिम्मेदारी किसने ली है।
सऊदी अरब ड्रोन हमला: अमेरिका ने निकाला निकासी आदेश
इन हमलों से कुछ घंटे पहले अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब में अपने गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया था। मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि यमन के ईरान समर्थित हूती आंदोलन द्वारा सऊदी अरब में नागरिक हवाई अड्डों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले बढ़ रहे हैं, जिनमें नागरिकों की मौतें और यात्रा में भारी बाधा हो रही है।
रियाद में अमेरिकी दूतावास ने बुधवार को सुरक्षा अलर्ट जारी कर हूतियों द्वारा सऊदी अरब पर और हमलों की संभावना जताई थी। समाचार एजेंसी रॉयटर्स को चार अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि खाड़ी के अन्य देशों में अमेरिकी मिशनों के परिवारों को भी वहां से हटाने का आदेश दिया जाएगा।
पहले भी हो चुके हैं हमले
यह सऊदी हवाई अड्डों पर हुए हमलों की एक श्रृंखला में ताजा घटना है। 10 अक्टूबर को रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले में 12 लोगों की मौत हुई थी और 300 से ज्यादा घायल हुए थे। इसके अगले ही दिन एक और हमले में एक व्यक्ति मारा गया था। किंग फहद एयरपोर्ट को इससे पहले 11 अक्टूबर को भी निशाना बनाया गया था।
भारत के लिए क्यों जरूरी है यह खबर
सऊदी अरब में लाखों भारतीय प्रवासी रहते और काम करते हैं, और यह भारत के लिए कच्चे तेल का एक प्रमुख स्रोत है। इसलिए इस सऊदी अरब ड्रोन हमला से न केवल प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी हलचल हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है, जिसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी इस घटनाक्रम के दूरगामी असर पड़ने की आशंका है।
स्रोत: लाइवमिंट, दैनिक जागरण (अंग्रेजी), सऊदी GACA व ऊर्जा मंत्रालय के बयान, रॉयटर्स

