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SIR पर सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? चुनाव आयोग का हलफनामा और अगली तारीख

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई। चुनाव आयोग ने कहा कि सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए थे, याचिकाकर्ता को जवाब के लिए 10 दिन मिले।

SIR सुप्रीम कोर्ट सुनवाई

SIR सुप्रीम कोर्ट सुनवाई (प्रतीकात्मक फोटो)

SIR सुप्रीम कोर्ट सुनवाई
SIR सुप्रीम कोर्ट सुनवाई (प्रतीकात्मक फोटो)
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार, 27 अक्टूबर को हुई सुनवाई फिलहाल टल गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता को चुनाव आयोग के जवाब पर अपना पक्ष रखने के लिए 10 दिन का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होने की संभावना जताई गई है, हालांकि अंतिम तारीख अदालत की सूची के अनुसार तय होगी। SIR सुप्रीम कोर्ट सुनवाई में यही मुख्य घटनाक्रम रहा।

चुनाव आयोग ने हलफनामे में क्या कहा?

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करते हुए कहा है कि SIR से जुड़े सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी — तीनों इन फैसलों पर सहमत थे। हलफनामे में 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को लिए गए फैसलों सहित SIR से जुड़े सभी निर्णयों का उल्लेख है। आयोग का यह जवाब उस याचिका के संदर्भ में आया है, जिसमें एक अखबार की रिपोर्ट के आधार पर दावा किया गया था कि SIR के 14 महत्वपूर्ण फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी। आयोग ने इन दावों से असहमति जताते हुए कहा कि सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए थे।

सुनवाई क्यों टली?

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता राकेश सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत से कहा कि चुनाव आयोग ने अपना जवाबी हलफनामा पिछली रात ही दाखिल किया था, इसलिए उसे पढ़कर जवाब तैयार करने के लिए समय चाहिए। अदालत ने यह मांग स्वीकार करते हुए 10 दिन की मोहलत दे दी। इसके चलते मामले के गुण-दोष पर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

SIR क्या है और विवाद क्यों है?

SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूचियों की समीक्षा की प्रक्रिया है, जिसका मकसद पात्र मतदाताओं का विवरण सत्यापित करना है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और संबंधित नियमों के तहत उसके अधिकार क्षेत्र में आती है। आयोग ने याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों को आधारहीन बताते हुए उन्हें खारिज करने का अनुरोध किया है। विवाद का एक प्रमुख मुद्दा यह है कि मतदाताओं की पात्रता की पुष्टि के लिए किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी, और पुराने रिकॉर्ड से विवरण न मिलने की स्थिति में क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इस प्रकरण में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं की ओर से दायर याचिकाएं भी शामिल हैं।

सुनवाई के दौरान और क्या हुआ?

रिपोर्टों के अनुसार, सुनवाई के एक बड़े हिस्से के दौरान अदालत की कार्यवाही का ऑडियो-वीडियो बंद रहा, और मामला समाप्त होने के करीब पहुंचने पर इसे फिर चालू किया गया। उपलब्ध रिपोर्ट में ऑडियो-वीडियो बंद रहने की पूरी अवधि और उसके पीछे के विस्तृत कारणों की जानकारी नहीं दी गई है, इसलिए इस पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। इससे पहले सांसद डोला सेन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने ऑनलाइन फॉर्म-6 में कथित छेड़छाड़ और चुनाव आयोग के एक प्रेस नोट का मुद्दा उठाया। याचिकाकर्ता पक्ष की दलील थी कि प्रेस नोट में कहा गया था कि पीठ ने कथित छेड़छाड़ को अधिकृत किया है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत इस मामले की जांच करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को सभी याचिकाओं के संबंध में फिर से नोटिस भी जारी किया है।

आगे क्या होगा?

अब अगले चरण में याचिकाकर्ता का जवाब और चुनाव आयोग के पक्ष पर आगे विचार होगा। तब तक SIR की प्रक्रिया और उससे जुड़े फैसलों की वैधता पर अदालत का अंतिम रुख सामने नहीं आया है। मतदाताओं के लिए इसका सीधा संदेश यह है कि सूची से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें, और अफवाहों से बचें। यह खबर अदालत की कार्यवाही की रिपोर्ट है। मामले में अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट का होगा।

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लेखक

Rakesh Kumar

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