
बुधवार की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकराने के बाद भी चक्रवात अर्नब का असर खत्म नहीं हुआ है। तट पार करने के बाद यह सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर तो पड़ रहा है, लेकिन अपने साथ लाई नमी और बारिश अब देश के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंच रही है। गुरुवार सुबह तक ओडिशा के 17 जिले मूसलाधार बारिश की चपेट में आ चुके थे, और अब बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर तक इसका असर दिख रहा है।
लैंडफॉल के बाद क्या-क्या हुआ
चक्रवात ने 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश और यनम के तटों पर लैंडफॉल पूरा किया। इसके बाद यह उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा। ओडिशा में इसका सबसे ज्यादा असर दक्षिणी जिलों पर पड़ा। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बताया कि पुख्ता तैयारियों की वजह से राज्य अपने ‘शून्य जनहानि’ के लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहा, हालांकि गजपति जिला सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। वहां बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, गर्भवती महिलाओं की विशेष देखभाल की जा रही है और राहत अभियान युद्धस्तर पर चल रहा है। कई स्थानों पर पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए, भूस्खलन की घटनाएं सामने आईं और सड़कें पानी में डूब गईं। आंध्र प्रदेश के 13 जिलों और यनम के कुछ हिस्सों में अचानक बाढ़ का मध्यम से उच्च जोखिम भी बताया गया था।
आज कहां-कैसा रहेगा मौसम
- ओडिशा: 29 अक्टूबर की सुबह तक भी तेज बारिश का दौर जारी रहने की चेतावनी थी। गजपति समेत 17 जिले प्रभावित।
- झारखंड: रांची, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सिमडेगा में 29 अक्टूबर तक स्कूल बंद रखने का आदेश दिया गया है। 28 और 29 अक्टूबर को गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
- बिहार: मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के मुताबिक 28 अक्टूबर से 1 नवंबर तक बारिश का दौर चल सकता है। सबसे खराब दौर 29 और 30 अक्टूबर को रहेगा, जब कुछ इलाकों में भारी से अति भारी बारिश और वज्रपात का खतरा है। हवाएं 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं।
- उत्तर प्रदेश: 28 से 31 अक्टूबर के बीच मौसम खराब रहने की आशंका है। पूर्वांचल में 29 और 30 अक्टूबर को सबसे ज्यादा असर रहेगा, जबकि लखनऊ, कानपुर, बरेली, आगरा और नोएडा में हल्की बूंदाबांदी से लेकर भारी बारिश तक हो सकती है।
- दिल्ली-एनसीआर: गुरुवार को संगम विहार, कालकाजी, ओखला, जामिया, कालिंदी कुंज और नोएडा के कई सेक्टरों में गरज-चमक के साथ बारिश हुई। हवाएं 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलीं, कुछ जगह 50 तक पहुंचीं। अगले दो दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री की कमी आने का अनुमान है, जिससे सुबह-शाम ठंड बढ़ेगी।
किसानों की चिंता बढ़ी
इस बेमौसम बारिश से सबसे ज्यादा चिंता किसानों को है। ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और बंगाल में धान की तैयार फसल पर मौसम की मार पड़ने की आशंका है। तेज हवा और अत्यधिक बारिश से फसल गिर सकती है, खेतों में पानी भर सकता है और दानों की गुणवत्ता खराब हो सकती है। कटी हुई फसल भीगने से उसकी बिक्री पर भी असर पड़ेगा। हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान की खरीद और गन्ना पेराई की शुरुआत के समय बारिश से मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उत्तर प्रदेश में गन्ना पेराई पहले ही समय से शुरू नहीं हो सकी थी, अब फिर बारिश से और देरी हो सकती है।
क्या करें, क्या न करें
वज्रपात के दौरान खुले मैदान, खेत, तालाब और जलाशयों के पास रहने से बचें। बिजली चमकने या गरजने पर किसी सुरक्षित इमारत में शरण लें। पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें। जिन जिलों में स्कूल बंद हैं, वहां प्रशासन के आदेशों का पालन करें और अनावश्यक यात्रा से बचें। मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर बनाए रखें, क्योंकि यह सिस्टम कमजोर पड़ने के साथ-साथ आगे भी बारिश ला सकता है। चक्रवात अर्नब की यह कहानी एक बार फिर याद दिलाती है कि लैंडफॉल खबर का अंत नहीं होता। असली परीक्षा उसके बाद के 48 घंटों की होती है — जब बारिश, जलभराव और फसल के नुकसान से जूझना पड़ता है। राहत की बात यह है कि ओडिशा में जान का नुकसान टाल लिया गया, लेकिन अब नजर इस बात पर रहेगी कि अंदरूनी राज्यों में बारिश से कितना नुकसान होता है।

