अगर आपका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, या उसमें कोई गलती है, तो आपके लिए अच्छी खबर है। चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की समयसीमा बढ़ा दी है। 29 अक्टूबर को जारी निर्देशों के तहत दिल्ली समेत छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए अब ज्यादा समय मिलेगा।

SIR क्या है, और यह क्यों मायने रखता है
SIR यानी Special Intensive Revision — मतदाता सूची को दुरुस्त करने की एक खास प्रक्रिया। इसमें नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं, गलत या डुप्लीकेट प्रविष्टियों पर आपत्ति दर्ज की जा सकती है, और पते या अन्य विवरणों की गलतियां सुधारी जाती हैं। अंतिम सूची ही तय करती है कि चुनाव में कौन वोट डाल सकेगा, इसलिए यह प्रक्रिया सीधे आपके वोट के अधिकार से जुड़ी है।
किस राज्य में क्या बदला: नई तारीखें
दिल्ली: दावे और आपत्तियां अब 25 नवंबर तक दर्ज की जा सकेंगी — पहले यह समयसीमा 30 अक्टूबर थी। नोटिस जारी करने और दावों के निपटारे की अवधि 15 दिसंबर तक बढ़ा दी गई है, जो पहले 30 नवंबर थी। अंतिम मतदाता सूची 22 दिसंबर को प्रकाशित होगी।
महाराष्ट्र: दावे और आपत्तियों की अंतिम तारीख 26 अक्टूबर से बढ़ाकर 13 नवंबर कर दी गई है। नोटिस और निपटारे की प्रक्रिया 25 नवंबर तक चलेगी, जबकि पहले यह 10 नवंबर तक तय थी। अंतिम सूची 30 नवंबर को आएगी। राज्य की मसौदा सूची 31 अगस्त को प्रकाशित हुई थी।
आंध्र प्रदेश और हरियाणा: दोनों राज्यों में नोटिस और दावों के निपटारे की अवधि 20 नवंबर तक रहेगी, और अंतिम सूची 30 नवंबर को प्रकाशित होगी।
तेलंगाना: नोटिस और निपटारे की अवधि 26 नवंबर तक तय की गई है, अंतिम सूची 30 नवंबर को आएगी।
नगालैंड: नोटिस और निपटारे की अवधि 25 नवंबर तक रहेगी, अंतिम सूची 30 नवंबर को प्रकाशित होगी।
यह फैसला क्यों लिया गया
चुनाव आयोग के अनुसार, संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) के औपचारिक अनुरोध पर यह बदलाव किया गया है। आयोग ने निर्वाचन सदन से 29 अक्टूबर को अलग-अलग पत्र जारी किए और सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि संशोधित समयसीमा का व्यापक प्रचार किया जाए और राजनीतिक दलों को लिखित में सूचित किया जाए। संबंधित मुख्य सचिवों को भी इन पत्रों की प्रतियां भेजी गई हैं।
दिल्ली को बाकी राज्यों से ज्यादा समय दिया गया है — दावा-आपत्ति की अवधि और अंतिम सूची दोनों में। इसका संकेत यही है कि दिल्ली में लंबित दावों की संख्या या प्रक्रिया की जटिलता ज्यादा है, हालांकि आयोग ने इसके पीछे कोई खास वजह सार्वजनिक रूप से नहीं बताई है।
आपको क्या करना चाहिए
अगर आप इन छह राज्यों में से किसी में रहते हैं, तो यह समयसीमा बढ़ोतरी आपके लिए एक मौका है। सबसे पहले अपनी प्रविष्टि की जांच करें — नाम की वर्तनी, पता, उम्र और फोटो सही है या नहीं। अगर नाम नहीं है, तो दावा दर्ज करें। अगर किसी गलत प्रविष्टि पर आपत्ति है, तो तय समय के भीतर उसे दर्ज करें। अपने राज्य की नई अंतिम तारीख का ध्यान रखें, क्योंकि अंतिम सूची छपने के बाद सुधार का मौका अगली प्रक्रिया तक टल सकता है।
यह भी ध्यान रहे कि SIR की समयसीमा पहले भी कई बार बदली जा चुकी है, इसलिए इस बार की तारीखों को ही अंतिम मानकर समय पर कदम उठाना समझदारी होगी। दिल्ली और महाराष्ट्र तीसरे चरण के राज्यों में शामिल हैं, जो 14 मई को शुरू हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार, इस चरण के पूरा होने के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर पूरे देश में SIR पूरा हो जाएगा।
संबंधित खबरें: SIR पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, MLC चुनाव नतीजे
स्रोत: चुनाव आयोग के संशोधित कार्यक्रम की खबर, एजेंसी रिपोर्ट

