Tata Motors Iveco deal ने 3 नवंबर 2026 को एक ऐतिहासिक पड़ाव पार कर लिया है। भारत की सबसे बड़ी कमर्शियल व्हीकल कंपनी टाटा मोटर्स और इटली की इवेको ग्रुप ने इटली के ट्यूरिन में आयोजित एक ग्लोबल प्रेस मीट में संयुक्त रूप से काम शुरू करने का ऐलान किया। इसके साथ ही दुनिया की चौथी सबसे बड़ी कमर्शियल व्हीकल कंपनी अस्तित्व में आ गई है — और यह कहानी भारत से शुरू होकर 130 से ज्यादा देशों तक फैली हुई है।
यह सिर्फ दो कंपनियों का मिलन नहीं है। यह भारत के ऑटो उद्योग के लिए एक नया अध्याय है, जिसमें ट्रक, बस और पावरट्रेन की दुनिया में भारतीय इंजीनियरिंग अब यूरोप और लैटिन अमेरिका के बाजारों में सीधे अपनी जगह बनाएगी।

Tata Motors Iveco deal: क्या हुआ है 3 नवंबर को
ट्यूरिन में हुई घोषणा के मुताबिक, टाटा मोटर्स और इवेको ग्रुप अब एक संयुक्त ग्लोबल कमर्शियल मोबिलिटी एंटरप्राइज के रूप में काम करेंगे। दोनों कंपनियों के पोर्टफोलियो, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी क्षमताएं अब एक ही छत के नीचे आएंगी, लेकिन इवेको की पहचान बरकरार रहेगी।
आंकड़ों में यह साझेदारी कितनी बड़ी है, इसे इन नंबरों से समझिए:
- सालाना लगभग 5,90,000 वाहनों की बिक्री
- लगभग 21 अरब यूरो (करीब 2.28 लाख करोड़ रुपये) का संयुक्त राजस्व
- 130 से ज्यादा देशों में मौजूदगी
- 27 मैन्युफैक्चरिंग साइट और 25 रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर
- लगभग 9,300 सेल्स और सर्विस सेंटर
- 73,000 से ज्यादा कर्मचारी
टाटा संस, टाटा मोटर्स और इवेको ग्रुप के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि यह साझेदारी लंबे समय के निवेश और दोनों संगठनों के बीच इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और ऑपरेशनल क्षमताओं के आदान-प्रदान पर केंद्रित होगी। टाटा मोटर्स के एमडी और सीईओ गिरीश वाघ ने कहा कि अब ग्राहकों और साझेदारों के लिए ज्यादा मूल्य पैदा करने का मौका है। इवेको ग्रुप के सीईओ ओलोफ पर्सन ने इसे इवेको के लिए एक निर्णायक क्षण बताया।
डील की कहानी: जुलाई 2025 से नवंबर 2026 तक
इस डील की शुरुआत जुलाई 2025 में हुई थी, जब टाटा मोटर्स ने इवेको के कमर्शियल व्हीकल कारोबार को खरीदने का ऐलान किया था। इवेको का डिफेंस डिवीजन इस सौदे से अलग रहा और उसे लियोनार्डो को बेचा गया।
30 अक्टूबर 2026 को टाटा मोटर्स ने टेंडर ऑफर के तहत इवेको के 23,81,57,212 कॉमन शेयर खरीदना पूरा किया — यह इवेको की कुल कॉमन शेयर पूंजी (ट्रेजरी शेयरों को छोड़कर) का 89.42 प्रतिशत है। प्रति शेयर 14.4 यूरो (डिविडेंड सहित) की कीमत पर यह सौदा करीब 3.9 अरब यूरो का बैठता है।
जो शेयरधारक अभी रह गए हैं, उनके लिए टेंडर ऑफर 2 से 6 नवंबर 2026 तक फिर से खुलेगा और इसका सेटलमेंट 13 नवंबर को होगा। 3 नवंबर को ही इवेको के तीसरी तिमाही के नतीजे भी जारी किए गए, जो पहले 5 नवंबर को आने थे।
भारत के लिए इसका क्या मतलब है
पहला और सबसे सीधा असर टेक्नोलॉजी पर होगा। टाटा को इवेको के यूरोपीय इंजीनियरिंग बेस, बस और हेवी ट्रक की विशेषज्ञता तक सीधी पहुंच मिलेगी। वहीं इवेको को भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार और टाटा के कम लागत वाले मैन्युफैक्चरिंग अनुभव का फायदा मिलेगा। ग्रीन मोबिलिटी यानी इलेक्ट्रिक और कम उत्सर्जन वाले वाहनों पर दोनों का साझा जोर भी अहम है।
दूसरा असर पावरट्रेन की दुनिया में दिखेगा। इवेको की एफपीटी इंडस्ट्रियल इकाई सिर्फ ट्रकों के इंजन नहीं बनाती — उसके इंजन कृषि मशीनों, कंस्ट्रक्शन उपकरणों, समुद्री जहाजों और पावर जनरेशन में भी लगते हैं। कंपनी ने साफ किया है कि डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बैकअप पावर एक बड़ा मौका है। भारत में टाटा की कमिंस के साथ 30 साल पुरानी हेवी व्हीकल इंजन साझेदारी जस की तस रहेगी, जबकि नॉन-हेवी रेंज में एफपीटी पावरट्रेन उतारने की योजना है।
क्या-क्या नहीं बदलेगा
ग्राहकों के लिए राहत की बात यह है कि मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट, डीलर और सप्लायर संबंध, वारंटी और आफ्टरमार्केट प्रतिबद्धताएं जस की तस रहेंगी। इवेको ग्रुप का मुख्यालय ट्यूरिन में ही रहेगा और उसके ब्रांड — IVECO, FPT, IVECO BUS, HEULIEZ और IVECO CAPITAL — अपनी पहचान के साथ चलते रहेंगे। यानी सड़क पर दिखने वाले ट्रक और बस के लोगो रातोंरात नहीं बदलेंगे, बदलेगी उनके पीछे की ताकत।
आगे क्या देखना है
अब नजर तीन बातों पर रहेगी: 2 से 6 नवंबर तक फिर से खुलने वाले टेंडर ऑफर पर कितने शेयरधारक आते हैं, संयुक्त कंपनी का पहला साझा प्रोडक्ट प्लान क्या होता है, और भारत में एफपीटी पावरट्रेन की एंट्री किस रूप में होती है। एक बात तय है — भारतीय ट्रक अब सिर्फ भारतीय सड़कों की कहानी नहीं रहे, वे दुनिया के चौथे सबसे बड़े कमर्शियल व्हीकल समूह की कहानी बन गए हैं।
और पढ़ें: टाटा पंच ईवी, बीवाईडी की रिकॉर्ड ईवी बिक्री और मर्सिडीज जीएलसी इलेक्ट्रिक भारत लॉन्च। स्रोत: Autocar Professional और Morningstar।

