Commonwealth Games 2026 India का 10 दिन का सफर सोमवार तड़के खत्म हो गया। बीते दिन जूडो और ट्रैक साइक्लिंग में कोई मेडल हाथ न लगने के बाद भारतीय दल कुल 39 मेडल के साथ पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। इसी बीच ‘हाइड्रो’ एरीना में हुए भव्य समापन समारोह में एक ऐसा पल भी आया, जिसका इंतज़ार हर भारतीय खेल प्रेमी को था।
39 मेडल, चौथा स्थान — सीमित प्रोग्राम में भी बड़ी उपलब्धि
भारत ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुल 39 मेडल अपने नाम किए, जिसमें 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज़ मेडल शामिल रहे। इन नतीजों के दम पर भारतीय दल मेडल टैली में चौथे नंबर पर रहा। इस संस्करण में स्पर्धाओं की संख्या सीमित रखी गई थी, ऐसे में 39 मेडल जीतना भारतीय दल के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। हालांकि आखिरी दिन भारत के खाते में एक भी नया मेडल नहीं जुड़ पाया।
The honour of a lifetime. 🙌
Jaismine Lamboria carries the Tricolour as #TeamIndia‘s flag bearer at the Commonwealth Games Glasgow 2026 Closing Ceremony. #SonySportsNetwork #SonyLIV #Glasgow2026 #GlasgowMeinTiranga #Cheer4Bharat pic.twitter.com/fnqcaAupcB
— Sony Sports Network (@SonySportsNetwk) August 2, 2026
जूडो: इशरूप नारंग मामूली अंतर से चूकीं ब्रॉन्ज़ मेडल से
What a Commonwealth Games for Team India! 🇮🇳
Our boxers dominated Glasgow, bringing home a haul of gold and making the nation proud. Huge congratulations to all our champions and para trailblazers for inspiring the nation. This is Indian sport at its finest.
Proud of every…— Shreyas Iyer (@ShreyasIyer15) August 2, 2026
महिलाओं के -78kg वर्ग में इशरूप नारंग मेडल के सबसे करीब पहुंचकर भी खाली हाथ रहीं। ब्रॉन्ज़ मेडल मुकाबले में उन्हें कनाडा की कोराली गोडबाउट के खिलाफ ‘यूको’ से हार का सामना करना पड़ा। दिन की शुरुआत में इशरूप को क्वार्टर-फाइनल में इंग्लैंड की एम्मा रीड से ‘इप्पोन’ से हार मिली थी, लेकिन इससे उनका अभियान खत्म नहीं हुआ।
रेपेशाज राउंड में उन्होंने कैमरून की जॉर्जिना वेस्ली जेंग्यू मौने को ‘वाज़ा-अरी’ से हराकर शानदार वापसी की और मेडल की उम्मीदें ज़िंदा रखीं। इससे पहले के राउंड में इशरूप ने स्कॉटलैंड की निकोल वुड को गोल्डन स्कोर में ‘यूको’ से हराकर क्वार्टर-फाइनल में जगह बनाई थी। इतने उतार-चढ़ाव के बाद आखिरकार ब्रॉन्ज़ मेडल मुकाबले की हार के साथ उनका सफर थमा।
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Commonwealth Games 2026 India: यश घंघास और ओलंपियन अवतार सिंह का भी सफर थमा
हैवीवेट वर्ग में भी भारत को निराशा हाथ लगी। पुरुषों के +100kg राउंड ऑफ 16 में यश घंघास को वेल्स के जोशुआ व्हाइटहाउस के हाथों ‘यूको’ से हार मिली। वहीं रियो 2016 ओलंपियन अवतार सिंह पुरुषों के -100kg राउंड ऑफ 16 में गोल्डन स्कोर तक चले रोमांचक मुकाबले में साइप्रस के एरिस्टोस माइकल से ‘इप्पोन’ से हार गए। इससे पहले टूर्नामेंट में भारत का जूडो अभियान यादगार पलों से भरा रहा था — अस्मिता डे ने महिलाओं के 48kg वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय जूडोका बनने का गौरव हासिल किया था।
ट्रैक साइक्लिंग और पैरा साइक्लिंग में भी नहीं बनी बात
ट्रैक साइक्लिंग में भारत का इंतज़ार इस बार भी खत्म नहीं हुआ — देश को कॉमनवेल्थ गेम्स की ट्रैक साइक्लिंग स्पर्धाओं में अब भी अपने पहले मेडल का इंतज़ार है। पुरुषों की 1000 मीटर टाइम ट्रायल फाइनल में रोनाल्डो सिंह लैतोंजम से यह उम्मीद जुड़ी थी, लेकिन वे 1:04.191 का समय लेकर 20वें स्थान पर रहे। भारत के आखिरी दिन की शुरुआत पुरुषों की 40 किमी पॉइंट्स रेस से हुई थी, जिसमें हर्षवीर सिंह सेखों हीट 1 में रेस पूरी नहीं कर सके और डीएनएफ के साथ बाहर हो गए, जबकि हीट 2 में उतरे दिनेश कुमार चार पॉइंट्स बनाने के बावजूद क्वालिफाई नहीं कर सके।
इसके साथ ही ट्रैक साइक्लिंग में भारत का अभियान बिना मेडल के खत्म हुआ। पैरा साइक्लिंग में भारतीय दल की सबसे युवा सदस्य, सिर्फ 16 साल की लिशा दास ने महिलाओं की C4-C5 1000 मीटर टाइम ट्रायल फाइनल में हिस्सा लिया और 1:34.410 के समय के साथ छठा स्थान हासिल किया।
जगमगाया ‘हाइड्रो’, स्कॉटिश संगीत के साथ शुरू हुआ समापन समारोह
भारतीय समयानुसार सोमवार तड़के करीब 1:30 बजे शुरू हुए समापन समारोह की शुरुआत स्कॉटिश गायिका-गीतकार सैंडी थॉम की प्रस्तुति ‘प्राउड टू बी फ्रॉम स्कॉटलैंड’ से हुई। इसके तुरंत बाद खेलों के सफल आयोजन में जुटे हज़ारों वॉलंटियर्स को मंच से सलाम किया गया। एथलीटों की परेड के दौरान ऑस्ट्रेलियाई सिंगर-सॉन्गराइटर डेल्टा गुडरेम ने अपना मशहूर गाना ‘बॉर्न टू ट्राई’ पेश किया, तो बैंड ‘एलिफेंट सेशन्स’ और ‘प्राइमल स्क्रीम’ ने बैगपाइप के साथ अपनी लाइव परफॉर्मेंस से पूरे एरीना का माहौल बांधे रखा। समारोह में एक खास वीडियो प्रेजेंटेशन के ज़रिए बीते 11 दिनों के सबसे यादगार पल भी बड़ी स्क्रीन पर दिखाए गए।
बॉक्सिंग गोल्ड मेडलिस्ट जैस्मीन लैंबोरिया के हाथ में रहा तिरंगा
एथलीटों की परेड में कुल 74 देशों के दल अपने-अपने राष्ट्रीय झंडों के साथ एरीना में दाखिल हुए। भारत की अगुवाई जैस्मीन लैंबोरिया ने की, जिन्होंने गर्व से तिरंगा थामकर पूरे दल का नेतृत्व किया। जैस्मीन को यह ज़िम्मेदारी महिलाओं की 57kg बॉक्सिंग स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने के बाद सौंपी गई थी, और समापन समारोह की ध्वजवाहक बनना उनके शानदार टूर्नामेंट पर एक और सम्मान की मुहर था।
‘वंदे मातरम’ की प्रस्तुति के साथ दिखी भारत की सांस्कृतिक झलक
समारोह में भारत को 20 मिनट का सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करने का मौका मिला, जिसकी अगुवाई मशहूर गायक-संगीतकार शंकर महादेवन और पूर्व मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर ने की। दोनों कलाकारों ने ‘वंदे मातरम’ की प्रस्तुति से शुरुआत की, जिसके बाद पारंपरिक नृत्य और रंग-बिरंगी वेशभूषा के ज़रिए ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी ‘दुनिया एक परिवार है’ की थीम पर आधारित प्रस्तुतियां हुईं। इसके बाद एक ऑडियो-विज़ुअल प्रेजेंटेशन में अहमदाबाद 2030 की झलक भी दिखाई गई, जिसमें भारत के खेल सफर के साथ-साथ कॉमनवेल्थ गेम्स की आगामी 100वीं वर्षगांठ को भी खास तौर पर दर्शाया गया।
नीरज चोपड़ा और पीटी उषा की मौजूदगी में अहमदाबाद को सौंपी गई मेज़बानी
समारोह का सबसे बड़ा और भावुक पल तब आया जब कॉमनवेल्थ गेम्स का आधिकारिक झंडा भारत को सौंपा गया। यह ऐतिहासिक मौका टोक्यो 2020 ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा और भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा की मौजूदगी में आया। इसी के साथ भारत ने आधिकारिक तौर पर 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी की ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली, जिसकी मेज़बानी अहमदाबाद शहर करेगा।
इस मौके पर ग्लासगो 2026 के चेयरमैन जॉर्ज ब्लैक ने अहमदाबाद को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, “ग्लासगो से अहमदाबाद तक — दोनों ही शानदार नदी-किनारे बसे शहर हैं। जैसे-जैसे आप शताब्दी खेलों की मेज़बानी की तैयारी कर रहे हैं, हम आपकी सफलता की कामना करते हैं।” इसके बाद प्रिंस एडवर्ड, ड्यूक ऑफ एडिनबर्ग ने आधिकारिक तौर पर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के समापन का ऐलान किया और कॉमनवेल्थ देशों के सभी एथलीटों को 2030 में भारत में दोबारा मिलने का न्योता दिया।
2030 में अहमदाबाद में होंगे शताब्दी कॉमनवेल्थ गेम्स
ग्लासगो 2026 के समापन के साथ ही 11 दिन तक चले इस खेल महाकुंभ का पटाक्षेप हो गया। अब अगला संस्करण 2030 में भारत के अहमदाबाद शहर में खेला जाएगा, जो कॉमनवेल्थ गेम्स के 100 साल पूरे होने का ऐतिहासिक जश्न भी होगा। भारतीय खेल प्रेमियों के लिए अगले चार साल अब अपने ही देश में होने वाले इस बड़े खेल आयोजन की तैयारियों पर नज़र बनाए रखने के होंगे।
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