श्रीनगर की मशहूर दल झील की सेहत को लेकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने झील में ईंधन से चलने वाली मोटरबोट, मोटरयुक्त शिकारा और जेट स्की के संचालन पर अगले आदेश तक तत्काल रोक लगा दी है — इसे दल झील मोटरबोट प्रतिबंध का अब तक का सबसे बड़ा फैसला माना जा रहा है। यह आदेश पर्यटन सीजन के बीच में आया है, जिससे करीब 166 ईंधन चालित नौकाओं का संचालन थम जाएगा।

अदालत ने क्या आदेश दिया?
मुख्य न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस राजेश सेखरी की खंडपीठ ने 14 अक्टूबर (बुधवार) को यह आदेश दिया। पीठ ने झील संरक्षण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एलसीएमए), पर्यटन विभाग और पुलिस को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि दल झील में ईंधन से चलने वाली कोई भी मोटरबोट या जेट स्की न चले।
अदालत ने सख्त लहजे में चेतावनी भी दी — अगर इस रोक के बाद भी कोई मोटरबोट चलती पाई गई या उसके चलने की सूचना मिली, तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा। संबंधित अधिकारियों को नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।
यह मामला अदालत कैसे पहुंचा?
हाईकोर्ट ईंधन चालित नौकाओं के लाइसेंस और उनके नवीनीकरण से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। कुछ नौका मालिकों ने परिवहन विभाग द्वारा लाइसेंस नवीनीकृत न किए जाने के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था और दलील दी थी कि देरी से उनके जीवन और आजीविका के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। इन्हीं याचिकाओं में से एक मोहम्मद रफीक मीर की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने यह व्यापक आदेश दिया।
सुनवाई में दलील दी गई कि नौकाओं के संचालन की अनुमति देने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, एक समान और पर्यावरण के अनुकूल होनी चाहिए। यह भी कहा गया कि मोटर से चलने वाले किसी भी वाहन या जेट स्की से झील के पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुंचता है।
सरकार का क्या कहना है?
सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त एडवोकेट जनरल मोहसिन कादरी ने अदालत को बताया कि प्रशासन दल झील में प्रदूषण को लेकर गंभीर है और पर्यटन गतिविधियों के साथ-साथ झील की स्वच्छता और गरिमा बनाए रखने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि दल झील का इस क्षेत्र की सभ्यता और संस्कृति में अहम स्थान है, इसलिए मोटरबोट के लाइसेंस तय करने के लिए विशेषज्ञों की सलाह से वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।
कादरी ने यह भी माना कि प्रदूषण एक समस्या है और पर्यटन व झील की सफाई के बीच संतुलन की जरूरत है।
दल झील मोटरबोट प्रतिबंध: किन नौकाओं को छूट मिलेगी?
प्रतिबंध से आपातकालीन सेवाओं, आपदा प्रबंधन, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा कार्यों में तैनात प्रशासनिक व सरकारी नौकाओं को छूट दी गई है। यानी राहत-बचाव और सुरक्षा से जुड़ी सरकारी नौकाएं पहले की तरह चलती रहेंगी।
सोलर और इलेक्ट्रिक नौकाओं पर जोर
अदालत ने सिर्फ रोक लगाकर मामला खत्म नहीं किया। पीठ ने सरकार से कहा कि वह यह पता लगाए कि क्या ईंधन चालित नौकाओं की जगह सोलर ऊर्जा या बैटरी से चलने वाली नौकाएं लाई जा सकती हैं। अदालत ने वरिष्ठ अतिरिक्त एडवोकेट जनरल को यह जांचने का निर्देश दिया कि क्या पूर्ण मोटरीकरण को सोलरयुक्त इलेक्ट्रिक इंजन से बदला जा सकता है।
पीठ ने कहा कि आधुनिक समय में जब झील प्रणालियों का संरक्षण सभ्यता के लिए बढ़ती चिंता बन गया है, तो प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को रोकने के कदम उठाए जा रहे हैं। अदालत ने यह भी कहा कि जो भी नीति बने, वह पर्यटन गतिविधियों, प्रदूषण नियंत्रण और सभी पक्षों के बीच एकरूपता का संतुलन रखते हुए उचित होनी चाहिए।
पर्यटन पर क्या असर पड़ेगा?
यह फैसला पर्यटन सीजन के बीच में आया है, इसलिए इसका तत्काल असर दिखेगा। लेकिन अदालत का रुख साफ है — अल्पकालिक पर्यटन लाभ के लिए झील के पारिस्थितिकी तंत्र को दांव पर नहीं लगाया जा सकता। लंबे समय में सोलर और इलेक्ट्रिक नौकाएं पर्यटन संचालकों की आजीविका और झील के संरक्षण, दोनों की जरूरतों को पूरा कर सकती हैं।
दल झील सिर्फ श्रीनगर का पर्यटन आकर्षण नहीं, बल्कि कश्मीर की सभ्यता और संस्कृति का प्रतीक है। हाईकोर्ट का यह दल झील मोटरबोट प्रतिबंध आदेश उसी विरासत को बचाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार सोलर विकल्पों को लेकर क्या ठोस नीति पेश करती है।
यह भी पढ़ें: यस बैंक एटी1 बॉन्ड राइट-ऑफ गैरकानूनी: सुप्रीम कोर्ट का फैसला | दिल्ली में तिरंगा मार्च: कनॉट प्लेस में सुरक्षा व्यवस्था

