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Disha Salian Case CBI FIR 2026: 6 साल बाद FIR, कई बड़े नाम जांच के घेरे में

दिशा सालियान केस में छह साल बाद CBI ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले में कई गंभीर आरोपों और पुराने जांच रिकॉर्ड की दोबारा पड़ताल होगी।

Disha Salian Case CBI FIR 2026

Disha Salian Case CBI FIR 2026

 

Disha Salian Case CBI FIR 2026: छह साल पहले मुंबई में हुई एक मौत ने बॉलीवुड के साथ-साथ महाराष्ट्र की राजनीति में भी कई सवाल खड़े किए थे। मामला उस समय और ज्यादा चर्चा में आया, जब यह घटना अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से कुछ दिन पहले हुई थी। पुलिस जांच में इसे आत्महत्या माना गया, लेकिन दिशा सालियान के परिवार की ओर से इस निष्कर्ष पर लगातार सवाल उठते रहे।

समय बीतता गया। मामला पुलिस रिकॉर्ड में आगे बढ़ता रहा, लेकिन दिशा के पिता सतीश सालियान अपनी बेटी की मौत को लेकर अलग जांच की मांग करते रहे। उनका दावा था कि मौत की परिस्थितियों की नए सिरे से जांच होनी चाहिए।

अब सितंबर 2026 में यह पुराना मामला फिर सुर्खियों में है। वजह सिर्फ इतनी नहीं है कि CBI ने जांच अपने हाथ में ली है, बल्कि इस बार CBI ने बाकायदा FIR दर्ज कर दी है। यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद हुई है, जिसमें केंद्रीय एजेंसी को FIR दर्ज करके मामले की नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया गया था।

मामला अब उस मोड़ पर पहुंच गया है जहां पुराने पुलिस रिकॉर्ड, फोरेंसिक सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और मौत से जुड़ी परिस्थितियों को फिर से जांचा जाएगा।

2020 में क्या हुआ था?

दिशा सालियान एक सेलिब्रिटी मैनेजर थीं और कुछ समय तक उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत के साथ भी काम किया था। 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी।

उस समय मुंबई पुलिस ने मामले को Accidental Death Report (ADR) के तौर पर दर्ज किया था। बाद की पुलिस जांच में आत्महत्या की थ्योरी सामने आई और किसी आपराधिक साजिश या फाउल प्ले का प्रमाण नहीं मिलने की बात कही गई।

इसके करीब छह दिन बाद 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया। दोनों घटनाओं के बीच कुछ दिनों का अंतर होने के कारण सोशल मीडिया और मीडिया में इनके बीच संभावित कनेक्शन को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हुईं।

लेकिन किसी भी संभावित कनेक्शन को तथ्य मान लेना सही नहीं है। अब CBI की जांच में यह देखा जाएगा कि दिशा की मौत वास्तव में किन परिस्थितियों में हुई थी और क्या पुराने रिकॉर्ड में ऐसी कोई कमी थी जिसके कारण मामले की दोबारा जांच जरूरी बनी।

मामला छह साल बाद फिर क्यों खुला?

इस पूरी कहानी में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ बॉम्बे हाईकोर्ट का 2 सितंबर 2026 का आदेश रहा।

दिशा के पिता सतीश सालियान ने अदालत में याचिका दाखिल कर अपनी बेटी की मौत की जांच नए सिरे से कराने की मांग की थी। उनका आरोप था कि दिशा की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक घटना थी। उन्होंने गैंगरेप और हत्या सहित कई गंभीर आरोप लगाए।

हालांकि यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है—ये आरोप हैं, अदालत या CBI की अंतिम जांच में साबित तथ्य नहीं।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंपते हुए कहा था कि किसी भी व्यक्ति को केवल नाम सामने आने के आधार पर आरोपी नहीं माना जाना चाहिए। जांच अधिकारी को उपलब्ध सामग्री के आधार पर पर्याप्त आधार मिलने के बाद ही आगे कार्रवाई करनी होगी।

अदालत के इस रुख से साफ है कि CBI को मामले की स्वतंत्र जांच करनी है और अंतिम निष्कर्ष सबूतों के आधार पर ही निकलेगा।

हाईकोर्ट को पुराने जांच रिकॉर्ड में क्या सवाल दिखे?

मामले को दोबारा जांच के लिए भेजने के पीछे सिर्फ परिवार के आरोप ही नहीं थे। हाईकोर्ट ने पुराने रिकॉर्ड की जांच करते हुए कई परिस्थितियों पर सवाल उठाए।

Bombay High Court के आदेश से जुड़ी जानकारी में दर्ज विवरण के अनुसार, अदालत ने जांच की प्रक्रिया में कई ऐसी बातों पर गौर किया जिन्हें नए सिरे से जांचे जाने की जरूरत महसूस हुई।

इनमें घटनास्थल का पंचनामा देर से किए जाने का मुद्दा भी शामिल था। कोर्ट के सामने यह सवाल आया कि घटना के कई घंटे बाद स्पॉट पंचनामा क्यों तैयार किया गया।

इसी तरह दिशा के मोबाइल फोन और लैपटॉप को घटना के तुरंत बाद जब्त नहीं किया गया था। कोर्ट के अनुसार ये महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सबूत थे और इन्हें बाद में जब्त किया गया।

फोरेंसिक सैंपल से जुड़ी विसंगति भी अदालत के सामने आई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जिन सैंपल का उल्लेख था, FSL तक पहुंचे सामग्री के रिकॉर्ड में उससे अंतर दिखाई दिया।

अदालत ने इन बातों को अंतिम अपराध का प्रमाण नहीं माना, लेकिन इन्हें इतना महत्वपूर्ण जरूर माना कि मामले की एक स्वतंत्र आपराधिक जांच की जरूरत है।

अब CBI ने FIR में क्या किया?

हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI ने 14 सितंबर 2026 को दिशा सालियान की मौत के मामले में FIR दर्ज कर ली है।

यही इस मामले का सबसे बड़ा नया अपडेट है।

अब मामला सिर्फ पुराने ADR या पुलिस जांच की समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। FIR दर्ज होने के बाद CBI के पास आपराधिक जांच के तहत मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ करने, दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच करने तथा उपलब्ध सबूतों की दोबारा पड़ताल करने का अधिकार होगा।

दिशा के पिता सतीश सालियान ने 11 सितंबर को CBI के सामने चार घंटे से ज्यादा समय तक अपना बयान भी दर्ज कराया था। उन्होंने अपनी शिकायत और बयान में कई लोगों के नामों का उल्लेख किया था।

FIR में किन बड़े नामों की चर्चा हो रही है?

CBI FIR को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्टों में कई चर्चित नामों का उल्लेख किया गया है। इनमें आदित्य ठाकरे, रिया चक्रवर्ती, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में उद्धव ठाकरे और पूर्व पुलिस अधिकारियों सहित अन्य लोगों के नाम भी FIR में दर्ज होने की बात कही गई है।

लेकिन यहां सबसे जरूरी कानूनी अंतर समझना होगा।

FIR में किसी व्यक्ति का नाम होना अपने आप में उसके दोषी होने का प्रमाण नहीं है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने आदेश में खास तौर पर कहा था कि किसी व्यक्ति को पर्याप्त सामग्री के बिना आरोपी नहीं माना जाना चाहिए। इसलिए अभी CBI की जांच को आरोपों की सत्यता पता लगाने की प्रक्रिया के रूप में देखना चाहिए।

आदित्य ठाकरे पहले ही दिशा सालियान मामले से जुड़े आरोपों को बेबुनियाद बताते रहे हैं और उनका कहना रहा है कि उनका दिशा की मौत से कोई लेना-देना नहीं है।

गैंगरेप और हत्या के आरोपों की भी होगी जांच?

यही इस केस का सबसे संवेदनशील हिस्सा है।

दिशा के पिता ने अपनी याचिका और बयान में आरोप लगाया था कि उनकी बेटी के साथ गैंगरेप के बाद हत्या की गई। इन्हीं आरोपों को लेकर CBI से FIR और जांच की मांग की गई थी।

अब CBI को इन आरोपों की भी जांच करनी है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि FIR में किसी आरोप का दर्ज होना उस आरोप के सच साबित होने के बराबर नहीं है।

जांच एजेंसी को मेडिकल रिकॉर्ड, फोरेंसिक सामग्री, घटनास्थल से जुड़े दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और उस समय मौजूद लोगों के बयान समेत तमाम पहलुओं को देखना होगा।

यही वजह है कि इस समय सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को अंतिम निष्कर्ष मानना ठीक नहीं होगा।

सुशांत सिंह राजपूत केस से क्या कनेक्शन है?

दिशा सालियान का नाम सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था।

दिशा की मौत 8 जून 2020 को हुई थी, जबकि सुशांत 14 जून 2020 को मृत पाए गए थे। छह दिनों के इस अंतर के कारण दोनों मामलों को जोड़कर कई दावे किए गए।

हालांकि दोनों मौतों के बीच आपराधिक संबंध होने की बात अभी साबित नहीं हुई है। CBI की मौजूदा जांच का मुख्य विषय दिशा सालियान की मौत की परिस्थितियां हैं।

सुशांत सिंह राजपूत से जुड़ी खबरों और बॉलीवुड से जुड़े पुराने मामलों की पृष्ठभूमि समझने के लिए पाठक हमारी Desh-Duniya खबरों का सेक्शन भी देख सकते हैं।

जांच में अब आगे क्या होगा?

अब सबसे ज्यादा नजर CBI की अगली कार्रवाई पर रहेगी।

जांच एजेंसी पुराने पुलिस रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर उनकी समीक्षा करेगी। इसके साथ ही फोरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम दस्तावेज, घटनास्थल से जुड़े रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को फिर से देखा जा सकता है।

जिन लोगों के नाम शिकायत या FIR में सामने आए हैं, उनसे पूछताछ की संभावना भी जांच के आधार पर बन सकती है। लेकिन किसे आरोपी बनाया जाएगा और किससे सिर्फ पूछताछ होगी, यह जांच के दौरान उपलब्ध सबूतों पर निर्भर करेगा।

यही कारण है कि अभी किसी भी नाम को दोषी बताना जल्दबाजी होगी।

महाराष्ट्र और देश की राजनीति में पहले भी जांच एजेंसियों से जुड़े कई मामले चर्चा में रहे हैं। पाठक महाराष्ट्र से जुड़ी हमारी अन्य प्रमुख खबरें भी पढ़ सकते हैं।

छह साल पुराने केस में अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?

दिशा सालियान की मौत के मामले में अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि FIR दर्ज हुई या नहीं।

असल सवाल यह है कि CBI की जांच पुराने सवालों के कितने ठोस जवाब तलाश पाती है।

क्या पुराने फोरेंसिक रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों का कारण सामने आएगा? मोबाइल और लैपटॉप से क्या जानकारी मिलेगी? घटनास्थल से जुड़े रिकॉर्ड में जो सवाल उठे, उनकी जांच किस दिशा में जाती है? और सबसे अहम—क्या जांच में किसी आपराधिक घटना के पर्याप्त सबूत मिलते हैं या नहीं?

इन सवालों का जवाब अभी बाकी है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी अपने आदेश में यह स्पष्ट किया था कि अदालत के सामने सामने आई परिस्थितियां केवल CBI जांच का रास्ता खोलने के लिए देखी गई थीं। किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि या अपराध में भूमिका तय करना जांच एजेंसी और आगे की न्यायिक प्रक्रिया का विषय होगा।

दिशा सालियान केस अब छह साल बाद फिर जांच के केंद्र में है। इस बार मामला सिर्फ पुराने आरोपों और राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है—CBI के पास FIR है और उसे सबूतों के आधार पर आगे बढ़ना है।

आने वाले दिनों में जांच से जुड़े आधिकारिक अपडेट इस मामले की दिशा तय करेंगे।

लेखक

Rakesh Kumar

नमस्कार, मैं राकेश कुमार हूँ। PAHALI KHABAR के माध्यम से मैं आपके लिए ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, खेल और अन्य महत्वपूर्ण खबरें लेकर आता हूँ। मेरा उद्देश्य है कि आपको हर खबर सरल भाषा में, सही तथ्यों के साथ और समय पर मिले।

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